BNS धारा 351 क्या है? आपराधिक अभित्रास (Criminal Intimidation) की पूरी जानकारी
परिचय
भारतीय न्याय संहिता (BNS) में कई ऐसे प्रावधान हैं जो व्यक्ति की सुरक्षा और सम्मान को बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं। धारा 351 उन्हीं महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है, जो “आपराधिक अभित्रास” यानी Criminal Intimidation से संबंधित है।
सीधी भाषा में समझें तो जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे को डराकर, धमकाकर या दबाव बनाकर कुछ करने या न करने के लिए मजबूर करता है, तो यह अपराध इस धारा के अंतर्गत आता है।
आज के समय में यह अपराध केवल आमने-सामने ही नहीं, बल्कि फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से भी तेजी से बढ़ रहा है।
धारा 351 की कानूनी परिभाषा (Legal Definition)
आपराधिक अभित्रास
(1) जो कोई किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो कोई क्षति करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या किसी ऐसे कार्य को करने का लोप कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह आपराधिक अभित्रास करता है।
व्याख्या :- किसी ऐसे मृत व्यक्ति की ख्याति को क्षति करने की धमकी जिससे वह व्यक्ति, जिसे धमकी दी गई है, हितबद्ध हो इस धारा के अन्तर्गत आता है।
उदाहरण :- सिविल वाद चलाने से प्रतिविरत रहने के लिए जगदीश को उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से जगदीश के घर को जलाने की धमकी रामदेव देता है। रामदेव आपराधिक अभित्रास का दोषी है।
(2) जो कोई आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(3) जो कोई मृत्यु या घोर उपहति कारित करने की, या अग्नि द्वारा किसी संपत्ति का नाश कारित करने की या मृत्यु दण्ड से या आजीवन कारावास से, या सात वर्ष की अवधि तक के कारावास से दण्डनीय अपराध कारित करने की, या किसी स्त्री पर असतित्व का लांछन लगाने की धमकी द्वारा आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा; तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(4) जो कोई अनाम संसूचना द्वारा या उस व्यक्ति का, जिसने धमकी दी हो, नाम या निवास-स्थान छिपाने की पूर्वावधानी करके आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह उपधारा (1) के अधीन उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड के अतिरिक्त, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।
👉 खास बात:
यदि किसी मृत व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी जाती है, जिससे उसके परिवार को ठेस पहुँचे — तो वह भी इस धारा के अंतर्गत आता है।
धारा 351 क्या कहती है? (सरल भाषा में समझें)
कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति—
▪️किसी को नुकसान पहुँचाने की धमकी देता है
▪️नुकसान शरीर, संपत्ति या प्रतिष्ठा से जुड़ा हो
▪️या उसके परिवार/करीबी व्यक्ति को नुकसान की बात करता है
▪️और उसका उद्देश्य सामने वाले को डराना या मजबूर करना हो
तो यह “आपराधिक अभित्रास” कहलाता है
👉 खास बात:
यह अपराध तभी पूरा माना जाता है जब धमकी देने का उद्देश्य “डर पैदा करना” हो, चाहे नुकसान वास्तव में किया गया हो या नहीं।
धारा 351 के मुख्य तत्व (Important Ingredients)
इस अपराध को साबित करने के लिए निम्न बातें जरूरी होती हैं:
1. धमकी होना
धमकी स्पष्ट या अप्रत्यक्ष हो सकती है
2. नुकसान का संकेत
यह नुकसान हो सकता है:
▪️जान या शरीर को
▪️संपत्ति को
▪️सामाजिक प्रतिष्ठा को
3. डर पैदा करने का उद्देश्य
केवल गुस्से में कही बात हर बार अपराध नहीं होती
4. दबाव या मजबूरी
किसी को उसके अधिकार से रोकना या गलत काम के लिए मजबूर करना
सरल उदाहरण (Real Life Example)
मान लीजिए—
कोई व्यक्ति कहता है:
“अगर तुमने कोर्ट में गवाही दी तो मैं तुम्हें जान से मार दूँगा।”
👉 यह स्पष्ट रूप से धारा 351 के अंतर्गत अपराध है, क्योंकि इसमें डर पैदा करके कार्य रोकने की कोशिश की गई है।
धारा 351 के अंतर्गत सजा (Punishment)
इस धारा में सजा धमकी की गंभीरता पर निर्भर करती है:
🔹 सामान्य मामला
उपधारा (2): सजा:- 2 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
🔹 गंभीर धमकी (जैसे हत्या, आग, गंभीर चोट)
उपधारा (3): सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
🔹 गुप्त धमकी (Anonymous Threat)
उपधारा (4): सजा:- धारा 351 (1) के अधीन दंड के अतिरिक्त, 2 वर्ष के लिए कारावास
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।
IPC और BNS में अंतर
पहले यह अपराध IPC की धारा 503/506 में आता था, लेकिन अब इसे BNS धारा 351 में शामिल किया गया है।
👉 BNS में इसे अधिक स्पष्ट और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, खासकर डिजिटल और ऑनलाइन धमकियों को ध्यान में रखते हुए।
ऑनलाइन और डिजिटल अपराध में उपयोग
आज के समय में धारा 351 इन मामलों में भी लागू होती है:
▪️व्हाट्सएप पर धमकी
▪️सोशल मीडिया पर डराना
▪️कॉल करके ब्लैकमेल करना
▪️ऑनलाइन ट्रोलिंग या धमकी
👉 अगर इनका उद्देश्य डर पैदा करना है, तो यह अपराध बनता है।
कोर्ट किन बातों पर ध्यान देती है?
अदालत आमतौर पर यह देखती है—
▪️क्या धमकी वास्तविक और गंभीर थी
▪️क्या पीड़ित व्यक्ति वास्तव में डर गया
▪️क्या आरोपी का उद्देश्य दबाव बनाना था
👉 केवल गाली देना हमेशा इस धारा में नहीं आता
सामान्य गलतफहमियाँ
❌ हर धमकी अपराध नहीं होती
✔ केवल वही जो डर पैदा करे
❌ मजाक में कही गई बात
✔ अगर उससे डर पैदा हो जाए, तो अपराध बन सकता है
पीड़ित व्यक्ति क्या करे?
यदि कोई आपको धमकी देता है, तो—
▪️सबूत सुरक्षित रखें (Call, Chat, Recording)
▪️तुरंत पुलिस में शिकायत करें
▪️गंभीर मामले में FIR दर्ज कराएं
▪️साइबर अपराध हो तो Cyber Cell में जाएँ
निष्कर्ष
BNS धारा 351 समाज में भय और दबाव को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी हथियार है। यह व्यक्ति को उसके अधिकारों के साथ जीने की सुरक्षा देता है।
आज के डिजिटल दौर में इसका महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि अब धमकी केवल सामने से नहीं बल्कि ऑनलाइन भी दी जा रही है।
👉 इसलिए हर नागरिक को इस धारा की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वह अपने अधिकारों की रक्षा कर सके और कानून का सही उपयोग कर सके।
(IPC) की धारा 503, 506, 507 को (BNS) की धारा 350 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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