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BNS धारा 304 क्या है? | Snatching (छीना-झपटी) का पूरा गाइड

BNS धारा 304 क्या है? | Snatching (छीना-झपटी) का पूरा गाइड
काल्पनिक चित्र 

BNS की धारा 304 — Snatching (झपटमारी) का पूर्ण विश्लेषण :-

भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के अंतर्गत धारा 304 एक महत्वपूर्ण आपराधिक प्रावधान है, जो छीन-झपट या ‘Snatching’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है। यह धारा संपत्ति के खिलाफ की जाने वाली हिंसात्मक छीनताई कार्रवाई को कानून द्वारा सजा-योग्य अपराध मानती है। इस लेख में हम धारा 304 का पूर्ण अर्थ, उद्देश्य, तत्व, दंड, उदाहरण और व्यावहारिक प्रभाव समझेंगे

📕 पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):- 

 
{ झपटमारी / snatching }

(1) चोरी "झपटमारी" है यदि चोरी करने के लिए अपराधी अचानक या शीघ्रता से या बलपूर्वक किसी व्यक्ति से या उसके कब्जे से किसी जंगम संपत्ति को अधिग्रहण कर लेता है या प्राप्त कर लेता है या छीन लेता है या ले लेता है।

(2) जो कोई झपटमारी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी दायी होगा।

1. BNS धारा 304 — कानूनी परिभाषा :-

BNS धारा 304 के तहत:

(1) चोरी तभी झपटमारी (snatching) मानी जाती है जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से तेजी से, अचानक या बलपूर्वक उसकी चल संपत्ति (movable property) को जबरदस्ती लेता है।

(2) इस अपराध को करने वाला व्यक्ति तीन वर्ष तक की कैद और जुर्माना दोनों के लिए दंडनीय होगा। 

संक्षेप में, BNS धारा 304 यह निर्धारित करती है कि दूसरे व्यक्ति से तेज़ी से या बलपूर्वक संपत्ति को छीनना एक स्वतंत्र अपराध है, न कि केवल चोरी या डकैती का एक हिस्सा।


2. ‘छीन-झपट’ और ‘चोरी’ में अंतर :- 

BNS धारा 304 के तहत ‘छीन-झपट’ (snatching) को चोरी (theft) से अलग माना गया है क्योंकि:

👉 चोरी में संपत्ति गुप्त रूप से ले ली जाती है।

👉 झपटमारी में संपत्ति जबरदस्ती और अचानक रूप से छीन ली जाती है, चाहे वह सड़क पर, भीड़ में या किसी के हाथ से।
यह अंतर कानून के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब छीनने जैसे व्यवहार के लिए सुस्पष्ट प्रावधान मौजूद है, जिससे पुलिस और न्यायालय के लिए आरोप लगाना आसान होता है। 


3. क्यों BNS में यह धारा जरूरी हुई? :-

पहले IPC में झपटमारी (snatching) के लिए कोई विशेष धारा नहीं थी। पुलिस ने अक्सर ऐसे मामलों में चोरी या लूट के तहत मामला दर्ज किया, जिससे आरोपी बरी हो जाते थे या दंड विकल्प अनुकूल नहीं था। 

उदाहरण के लिए:

• सड़क पर किसी का मोबाइल या पर्स ज़बरदस्ती छीन लिया गया।

• भीड़ में किसी के हाथ से कोई मूल्यवान वस्तु अचानक निकाल लिया गया।

• ऐसे मामलों में अब BNS 304 स्पष्ट रूप से अपराध को परिभाषित करती है जिससे पीड़ितों को न्याय दिलाना आसान होगा। 

4. क्या यह अपराध गैर-जमानती है? :- 

BNS 304 के अंतर्गत झपटमारी नॉन-बेलियेबल (गैर-जमानती) अपराध मानी जाती है। इसका मतलब है कि आरोपी को अदालत की अनुमति के बिना जमानत प्राप्त नहीं हो सकती है; न्यायालय की विवेकाधीन अनुमति आवश्यक होती है। 


5. दंड और सजा :- 

धारा 304 के तहत दोषी पाए जाने पर:

सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नही किया जा सकता हैं।

यह दंड समय-समय पर पुलिस, न्यायालय और कानूनविदों द्वारा अधिक प्रभावी संदर्भों में उपयोग किया जाता है, जिससे अदालत के समक्ष साक्ष्य के आधार पर सजा तय की जाती है।


6. अपराध की तत्वों की व्याख्या :- 

एक ‘झपटमारी’ अपराध स्थापित होने के लिए निम्न तत्वों का होना जरूरी है:

a) किसी व्यक्ति की चल संपत्ति
यह धन, मोबाइल, पर्स, घड़ी आदि कोई भी हलचल योग्य वस्तु हो सकती है।

b) अचानक या बलपूर्वक लेना
संपत्ति का अचानक हाथ से छीनना, ज़बरदस्ती लेना या खींच कर ले जाना चाहिए।

c) किसी व्यक्ति के स्वामित्व में होना
जिस व्यक्ति से यह वस्तु छीनी गई है, वह उसका वास्तविक उपयोगकर्ता या मालिक होना चाहिए।

जब ये तीन तत्व मौजूद हों, तभी कानूनी तौर पर धारा 304 लागू होती है।


7. अपराध के उदाहरण :- 

प्रकरण 1: सड़क पर मोबाइल छीनना
रात के समय सड़क पर चल रहा व्यक्ति, जब किसी शख्स द्वारा अचानक उसका मोबाइल फोन सेड़ा जाता है, तो यह झपटमारी के अंतर्गत आएगा।

प्रकरण 2: भीड़ में पर्स छीनना
भीड़-भाड़ वाली जगह पर किसी के पर्स को ज़बरदस्ती छीनना भी धारा 304 की श्रेणी में आएगा।

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि इस अपराध के लिए ‘गोमती चोरी’ के समान परिस्थितियाँ नहीं चाहिए; वस्तु का बलपूर्वक पलायन ही पर्याप्त है।


8. पुलिस और न्यायालय में प्रक्रिया :- 

• जब कोई व्यक्ति BNS 304 के अंतर्गत आरोपित होता है:

• पुलिस जांच शुरू होती है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, गवाह के बयान और वस्तु का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो जाता है।

• आरोपी को गिरफ़्तार किया जा सकता है, क्योंकि यह एक कॉग्निज़ेबल मामला है।

न्यायालय में सबूतों के आधार पर मुकदमा चलेगा, और यदि सजा पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को सज़ा और जुर्माना दोनों सुनाया जा सकता है। 

9. BNS के तहत बदलाव की तुलना IPC से :- 

पुराने आईपीसी के तहत झपटमारी को विशेष रूप से परिभाषित नहीं किया गया था, और ऐसे मामलों में अक्सर चोरी या डकैती की धारा लगाई जाती थी। BNS ने इसे स्वतंत्र अपराध के रूप में स्थापित किया है, ताकि झपटमारी के लिए स्पष्ट दंड हो और पीड़ित को न्याय मिले। 

10. निष्कर्ष/ सारांश:- 

BNS की धारा 304 ने भारतीय आपराधिक कानून में एक बड़ा बदलाव किया है। अब छीन-झपट जैसी घटनाओं को स्पष्ट रूप से एक दंडनीय अपराध के रूप में मान्यता दी जाती है। यह न केवल सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में भी अधिक प्रभावी बनता है। इस धारा का उद्देश्य यह है कि हर व्यक्ति की सम्पत्ति की सुरक्षा हो, और जो भी इसे बलपूर्वक छीनता है, वह कानून के कठोर दंड के लिए उत्तरदायी हो।


(IPC) में यह धारा पहले नही थी (BNS) में यह धारा 304 नई जोड़ी गई है |

(IPC) में यह धारा पहले नही थी (BNS) में यह धारा 304 नई जोड़ी गई है | 


अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है











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