⚖️ BNS की धारा 336 – कूटरचना (Forgery) का सम्पूर्ण कानूनी विश्लेषण
🔶 प्रस्तावना
नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में दस्तावेज़ों से जुड़े अपराधों को स्पष्ट और सख़्त रूप में परिभाषित किया गया है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण अपराध है कूटरचना (Forgery), जिसे BNS की धारा 336 के अंतर्गत रखा गया है।
आज के डिजिटल युग में फर्जी दस्तावेज़, नकली हस्ताक्षर, झूठे प्रमाण-पत्र और जाली रिकॉर्ड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, इसलिए यह धारा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
🔶 कूटरचना (Forgery) क्या है?
कूटरचना का अर्थ है –
किसी व्यक्ति को धोखा देने या नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को झूठा बनाना, बदलना या तैयार करना।
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा दस्तावेज़ बनाता है जो असली प्रतीत हो, लेकिन वास्तव में झूठा हो, तो वह कूटरचना का अपराध करता है।
🔶 BNS धारा 336 की कानूनी परिभाषा
धारा 336 BNS के अनुसार –
( कूटरचना )
(1) जो कोई किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग को इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाए, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति संपत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा करे या इस आशय से रचता है कि कपट करे, या कपट किया जा सके, वह कूटरचना करता है।
(2) जो कोई कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(3) जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख, जिसकी कूटरचना की जाती है, छल के प्रयोजन से उपयोग में लाई जाएगी, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी, दायी होगा।
(4) जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख, जिसकी कूटरचना की जाती है, किसी पक्षकार की ख्याति की अपहानि करेगी, या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
🔶 कूटरचना के आवश्यक तत्व
धारा 336 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:
1️⃣ झूठा दस्तावेज़ या रिकॉर्ड
नकली दस्तावेज़
बदला हुआ दस्तावेज़
बिना अधिकार हस्ताक्षर
फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
2️⃣ आपराधिक आशय (Mens Rea)
धोखा देने का इरादा
नुकसान पहुँचाने की मंशा
अवैध लाभ प्राप्त करने का उद्देश्य
3️⃣ उपयोग या प्रयोग की संभावना
दस्तावेज़ का प्रयोग किया गया हो या
भविष्य में प्रयोग किए जाने की संभावना हो
🔶 कूटरचना के सामान्य उदाहरण
✔️ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनवाना
✔️ नकली मार्कशीट या डिग्री तैयार करना
✔️ किसी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर करना
✔️ जमीन के काग़ज़ात में हेरफेर
✔️ फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाना
✔️ डिजिटल सिग्नेचर की नकल करना
कूटरचना का दण्ड (Punishment)
BNS धारा 336 के अंतर्गत:
उपधारा (2):- सजा:- 2 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।
उपधारा (3):- सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।
उपधारा (4):- सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।
यदि कूटरचना किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जैसे वसीयत, कोर्ट रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, सरकारी प्रमाण-पत्र से संबंधित हो, तो दण्ड और अधिक कठोर हो सकता है (अलग-अलग उपधाराओं में)।
🔶 कूटरचना और धोखाधड़ी में अंतर
| बिंदु | कूटरचना | धोखाधड़ी |
|---|---|---|
| आधार | झूठा दस्तावेज़ | झूठी बात या छल |
| मुख्य तत्व | फर्जी लेखन | विश्वासघात |
| धारा | BNS 336 | BNS 316/318 |
🔶 क्या कूटरचना संज्ञेय अपराध है?
✔️ हाँ, अधिकांश मामलों में कूटरचना संज्ञेय अपराध होती है
✔️ पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तारी कर सकती है
✔️ गंभीर मामलों में यह गैर-जमानती भी हो सकती है
🔶 कोर्ट में कूटरचना की प्रक्रिया
1️⃣ शिकायत / FIR दर्ज
2️⃣ पुलिस जाँच
3️⃣ फॉरेंसिक जाँच (हस्ताक्षर, दस्तावेज़)
4️⃣ चार्जशीट दाख़िल
5️⃣ ट्रायल
6️⃣ साक्ष्य और गवाह
7️⃣ अंतिम निर्णय
🔶 बचाव (Defence) के महत्वपूर्ण आधार
🔻दस्तावेज़ असली होना
🔻आपराधिक आशय का अभाव
🔻जाली होने का ज्ञान न होना
🔻फॉरेंसिक रिपोर्ट में संदेह
🔻गलत तरीके से फँसाया जाना
🔶 BNS में धारा 336 का महत्व
✔️ डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण
✔️ फर्जीवाड़े की रोकथाम
✔️ न्यायिक प्रक्रिया की शुद्धता
✔️ आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा
🔶 निष्कर्ष
BNS की धारा 336 कूटरचना जैसे गंभीर अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है। यह धारा न केवल कागज़ी दस्तावेज़ों बल्कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी सुरक्षा प्रदान करती है।
आज के समय में यह धारा न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है और समाज में ईमानदारी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
(IPC) की धारा 463, 465, 468, 469 को (BNS) की धारा 336 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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