भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत धारा 318 छल (Cheating) के अपराध को परिभाषित और दंड प्रदान करती है। यह धारा पुराने IPC की धारा 415, 417, 418 तथा 420 का स्थान लेती है और धोखे और फरेब से सम्बंधित अपराधों को अब नए, आधुनिक ढांचे में परिभाषित करती है।
1. धारा 318 में “छल” क्या है? (Definition of Cheating)
धारा 318 के अनुसार:
छल (Cheating)
जो कोई किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या यह सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को रख रखे या जानबूझकर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, उत्प्रेरित करता है कि वह ऐसा कोई कार्य करे, या करने का लोप करे, जिसे वह यदि उसे प्रत्येक प्रकार प्रवंचित न किया गया होता तो, न करता, या करने का लोप न करता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, ख्याति सम्बन्धी या साम्पत्तिक नुकसान या अपहानि कारित होती है, या कारित होनी सम्भाव्य है, वह छल करता है, यह कहा जाता है।
व्याख्या :- तथ्यों का बेईमानी से छिपाना इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत प्रवंचना है।
उदाहरण :- (क) जिशान सिविल सेवा में होने का मिथ्या अपदेश करके जानबूझकर योगेंद्र से प्रवंचना करता है, और इस प्रकार बेईमानी से योगेंद्र को उत्प्रेरित करता है कि वह उसे उधार पर माल ले लेने दे, जिसका मूल्य चुकाने का उसका इरादा नहीं है। जिशान छल करता है।
(ख) रशीद एक वस्तु पर कूटकृत चिह्न बनाकर जिशान से साशय प्रवंचना करके उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु किसी प्रसिद्ध विनिर्माता द्वारा बनाई गई है, और इस प्रकार उस वस्तु, का क्रय करने और उसका मूल्य चुकाने के लिए जिशान को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। रशीद छल करता है।
(ग) दाऊद, रशीद को किसी वस्तु का, नकली सैम्पल दिखलाकर रशीद से जानबूझकर प्रवंचना करके, उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु उस सैम्पल के अनुरूप है, और तद्वारा उस वस्तु को खरीदने और उसका मूल्य चुकाने के लिए रशीद को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। दाऊद छल करता है।
(घ) आमिर किसी वस्तु का मूल्य देने में ऐसी कोठी पर हुण्डी करके, जहां आमिर का कोई धन जमा नहीं है, और जिसके द्वारा आमिर को हुण्डी का अनादर किए जाने की प्रत्याशा है, आशय से दाऊद की प्रवंचना करता है, और तद्वारा बेईमानी से दाऊद को उत्प्रेरित करता है कि वह वस्तु परिदत्त कर दे जिसका मूल्य चुकाने का उसका आशय नहीं है। आमिर छल करता है।
(ङ) जावेद ऐसे नगों को, जिनको वह जानता है कि वे हीरे नहीं हैं, हीरों के रूप में गिरवी रख कर आमिर से जानबूझकर प्रवंचना करता है, और तद्वारा धन उधार देने के लिए आमिर को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। जावेद छल करता है।
(च) सोहन जानबूझकर प्रवंचना करके जावेद को यह विश्वास कराता है कि सोहन को जो धन जावेद उधार देगा उसे वह चुका देगा, और तद्वारा बेईमानी से जावेद को उत्प्रेरित करता है कि वह उसे धन उधार दे दे, जबकि सोहन का आशय उस धन को चुकाने का नहीं है। सोहन छल करता है।
(छ) गुलाब सिंह, सोहन से जानबूझकर प्रवंचना करके यह विश्वास दिलाता है कि गुलाब सिंह का इरादा सोहन को नील के पौधों का एक निश्चित परिमाण परिदत्त करने का है, जिसको परिदत्त करने का उसका आशय नहीं है, और तद्वारा ऐसे परिदान के विश्वास पर अग्रिम धन देने के लिए सोहन को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। गुलाब सिंह छल करता है। यदि गुलाब सिंह धन अभिप्राप्त करते समय नील परिदत्त करने का आशय रखता हो, और उसके पश्चात् अपनी संविदा भंग कर दे और वह उसे परिदत्त न करे, तो वह छल नहीं करता है, किन्तु संविदा भंग करने के लिए केवल सिविल कार्यवाही के दायित्व के अधीन है। ने सोहन के साथ की गई
(ज) मोहन जानबूझकर प्रवंचना करके गुलाब सिंह को यह विश्वास दिलाता है कि मोहन ने संविदा के अपने भाग का पालन कर दिया है, जबकि उसका पालन उसने नहीं किया है, और तद्वारा गुलाब सिंह को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह धन दे। मोहन छल करता है।
(झ) राम जी , जिशान को एक सम्पदा बेचता है और हस्तान्तरित करता है। राम जी यह जानते हुए कि ऐसे विक्रय के परिणामस्वरूप उस संपत्ति पर उसका कोई अधिकार नहीं है, जिशान को किए गए पूर्व विक्रय और हस्तान्तरण के तथ्य को प्रकट न करते हुए उसे मोहन के हाथ बेच देता है या बन्धक रख देता है, और मोहन से विक्रय या वन्धक धन प्राप्त कर लेता है। राम जी छल करता है।
(2) जो कोई छल करेगा, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(3) जो कोई इस ज्ञान के साथ छल करेगा कि यह सम्भाव्य है कि वह तद्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुंचाए, जिसका हित उस संव्यवहार में जिससे वह छल सम्बन्धित है, संरक्षित रखने के लिए वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा द्वारा, आबद्ध था, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(4) जो कोई छल करेगा, और तद्वारा उस व्यक्ति को, जिसे प्रवंचित किया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करेगा कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या किसी भी मूल्यवान प्रतिभूति को, या किसी चीज को, जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित है, और जो मूल्यवान प्रतिभूति में सम्परिवर्तित किए जाने योग्य है, पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे, या नष्ट कर दे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
यह परिभाषा धोखे की तीन मुख्य बातें बताती है:
धोखा / Deception — झूठ, तथ्य छिपाना या कपटपूर्ण व्यवहार।
प्रेरणा / Inducement — व्यक्ति को ऐसा करने के लिए मजबूर करना जो वह सामान्यतः नहीं करता।
हानि / Harm — भय, मानसिक कष्ट, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान होना।
इसका सीधा मतलब यह है कि ** केवल झूठ बोलना ही धोखा नहीं है**, बल्कि वह झूठ जो किसी को नुकसान पहुँचाता है, या जो किसी के निर्णय को बदलने के लिए प्रेरित करता है, वह छल माना जाता है।
2. छल के महत्वपूर्ण तत्व (Essential Ingredients)
धारा 318 के अंतर्गत किसी भी कृत्य को छल मानने के लिए निम्नलिखित चार मुख्य तत्व (ingredients) मौजूद होना चाहिए:
2.1. धोखे की मौजूदगी
कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को जानबूझकर गलत जानकारी देता है, तथ्यों को छुपाता है या मिथ्या वादा करता है।
उदाहरण: कोई व्यक्ति अपने व्यवसाय की सफलता की झूठी कहानी बनाकर निवेशकों से पैसे लेता है।
2.2. प्रेरणा (Inducement)
धोखे के कारण पीड़ित व्यक्ति को किसी वस्तु/संपत्ति को सौंपने या कोई कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उदाहरण: नकली प्रमाण पत्र दिखाकर व्यक्ति से उधार लेना।
2.3. परिणाम में हानि
जो व्यक्ति धोखे का शिकार हुआ, उसे किसी प्रकार का हानि या नुकसान हुआ या होने की संभावना थी।
उदाहरण: नकली उत्पाद खरीदने पर धन हानि।
2.4. परिणाम का संभावित नुकसान
यह जरूरी नहीं कि वास्तविक हानि हुई हो, केवल संभाव्य हानि भी काफी मान्य है।
उदाहरण: फर्जी जमीन से जुड़ा वादा — भले ही सौदा रद्द हुआ, संभाव्य हानि मान्य मानी जाएगी।
3. धारा 318 के उदाहरण
धारा 318 में कई उदाहरण (illustrations) भी दिए गए हैं जो वास्तविक जीवन की स्थितियों को दर्शाते हैं:
उदाहरण (Illustration) 1
एक व्यक्ति A, यह दावा करता है कि वह सिविल सेवा में है और Z को क्रेडिट पर माल देता है, जिसे वह वापस नहीं करना चाहता। यह छल है।
उदाहरण 2
कोई व्यक्ति नकली निर्माता का मार्क लगाकर उत्पाद बेचता है, जिससे खरीदार को धोखा होता है।
उदाहरण 3
किसी व्यक्ति से बिना उसकी जानकारी के संपत्ति के पेपर्स पर हस्ताक्षर कर लेना और उनका गलत उपयोग करना।
4. धारा 318 के तहत दंड (Punishment)
धारा 318 में दंड का प्रावधान कई अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित है:
4.1. सामान्य छल (General Cheating)
यदि कोई व्यक्ति सामान्यतः किसी को धोखे में डालकर संपत्ति दिलाता है, तो उसे जेल या जुर्माना दोनों दंड मिल सकते हैं।
4.2. विशेष स्थिति में छल (Cheating with Special Duty)
यदि विशेष कर्तव्य या भरोसे की स्थिति में किया गया धोखा है, तो सजा अधिक गंभीर होती है।
4.3. मूल्यवान सुरक्षा के साथ छल (Cheating Involving Valuable Security)
कोई व्यक्ति धोखे से किसी मूल्यवान दस्तावेज़ को बनाने, बदलने या नष्ट करने में प्रेरित करे, तो उसे 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। यह IPC की पुरानी धारा 420 जैसा ही माना जाता है।
5. वास्तविक जीवन के केस और प्रैक्टिकल महत्व
हाल के मामलों में, पुलिस ने फर्जी दस्तावेज़ जमा करने और धोखे से जमानत दिलाने के लिए गिरोह के खिलाफ BNS की धारा 318(2) और 318(4) समेत कई धाराओं में FIR दर्ज की है, जो यह दर्शाता है कि अब कोर्ट में भी इसे गंभीरता से लिया जाता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
BNS की धारा 318 धोखे और छल से संबंधित अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति किसी को धोखे में रखकर लाभ न उठा सके, और यदि ऐसा होता है तो उसे कानूनी दंड देना सुनिश्चित किया जाए।
धोखा केवल झूठ नहीं है, बल्कि वह धोखा है जिससे किसी व्यक्ति को हानि पहुँचती है, और इसी जुड़ाव के कारण यह एक गंभीर आपराधिक प्रावधान बनता है
7. सजा — DETAILED PUNISHMENT
उपधारा (2):- सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
उपधारा (3):- सजा:- 5 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
उपधारा (4):- सजा:- दण्ड-7 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
8. 📊 BNS धारा 318 – छल (Cheating) की तालिका
| क्रम | बिंदु | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | धारा का विषय | छल (Cheating) — धोखे के आधार पर किसी को नुकसान पहुँचाना या लाभ लेना। |
| 2 | परिभाषा (Sub-section 1) | किसी को धोखा देकर उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करना जो वह नहीं करता, जिससे उसका शरीर/मन/प्रतिष्ठा/संपत्ति को हानि हो। |
| 3 | स्पष्टीकरण | तथ्य छिपाना धोखे (deception) में शामिल होता है। |
| 4 | उदाहरण (Illustrations) | सरकारी अधिकारी होने का झूठ, नकली सामान बेचना, झूठी प्रतिज्ञा से उधार लेना आदि। |
| 5 | साधारण दंड (Sub-section 2) | जेल: अधिकतम 3 वर्ष या जुर्माना या दोनों। |
| 6 | गंभीर दंड (Sub-section 3) | अगर धोखे से किसी ऐसे व्यक्ति को नुकसान हो जिसे व्यक्ति को कानून/अनुबंध से बचाना था — जेल: अधिकतम 5 वर्ष या जुर्माना या दोनों। |
| 7 | सबसे गंभीर दंड (Sub-section 4) | मूल्यवान सुरक्षा से धोखा देना — जेल: अधिकतम 7 वर्ष साथ में जुर्माना। |
| 8 | लाभ/हानि की प्रकृति | धोखे के कारण किसी की संपत्ति, प्रतिष्ठा, शरीर या मन को हानि हो सकती है। |
| 9 | उपयोग/लागू क्षेत्र | ऐसे मामलों में जहाँ धोखे से लेन-देन, संपत्ति हस्तांतरण या किसी कार्रवाई में प्रेरणा मिली। |
| 10 | प्रमुख ध्यान | केवल झूठ (जैसे भावनात्मक संबंध) तब अपराध नहीं, जब तक संपत्ति/लाभ/हानि न हो। |
| (IPC) की धारा 415, 417, 418, 420 को (BNS) की धारा 318 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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