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BNS धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | परिभाषा, सजा और उदाहरण 2026

BNS धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | परिभाषा, सजा और उदाहरण 2026
काल्पनिक चित्र 

BNS की धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | विस्तृत और सरल व्याख्या

भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 317 उन अपराधों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति चुराई हुई संपत्ति को प्राप्त, रखना, छिपाना या उसके साथ अनुचित व्यवहार करता है। यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की समान धारा 410/414 से मिलती-जुलती है, लेकिन अब नई संरचना और जुर्माना/सजा के प्रावधानों के साथ आधुनिक रूप में है।

यह लेख हर कोण से समझाएगा कि धारा 317 क्या है, क्या अपराध माना जाता है, किसे दोषी ठहराया जाता है, सजा कितनी है, और इसका उद्देश्य क्या है। लक्ष्य है कि आप पूर्ण जानकारी के साथ-साथ उदाहरणों के माध्यम से इसे समझें।


1. धारा 317 – मूल परिभाषा

BNS धारा 317 में कहा गया है कि:


( चुराई हुई संपत्ति )


(1) वह संपत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा, या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा या छल द्वारा अन्तरित किया गया है, और वह संपत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है चुराई हुई "संपत्ति" कहलाती है, चाहे वह अन्तरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर। किन्तु यदि ऐसी संपत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुंच जाती है, जो उसके कब्जे के लिए वैध रूप से हकदार है, तो वह चुराई हुई संपत्ति नहीं रह जाती।

(2) जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा, या रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया कारावास से, जिसको अवधि तीन वर्ष तक की जाएगा।


(3) जो कोई ऐसी चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखे रखेगा, जिसके कब्जे के विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डकैती द्वारा अन्तरित की गई है, या किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डाकुओं की टोली का है या रहा है, ऐसी संपत्ति, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई है, बेईमानी से प्राप्त करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी, दायी होगा।

(4) जो कोई ऐसी संपत्ति, जिसके सम्बन्ध में, वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, अभ्यासतः प्राप्त करेगा, या अभ्यासतः उसमें व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक को हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी, दायी होगा।


(5) जो कोई ऐसी संपत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, वह दोनों में से से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

📌 मुख्य बात:

चोरी-छल-गबन से मिली संपत्ति ही बुनियादी रूप से “स्टोलन प्रॉपर्टी” मानी जाती है।



2. “चुराई हुई संपत्ति” किसे कहते हैं?

धारा में “चुराई हुई संपत्ति” को समझना सबसे जरूरी है। इसे निम्न रूप से समझा जा सकता है:

✔ वह संपत्ति जो चोरी, लूट, जबरन वसूली, धोखाधड़ी आदि के कारण एक व्यक्ति से दूसरे के पास गई हो।
✔ वह संपत्ति जो गबन (criminal misappropriation) या विश्वासभंग के कारण अवैध रूप से हस्तांतरित हो चुकी है।
✔ अगर संपत्ति बाद में उसके कानूनी मालिक के पास वापस आती है, तो वह “चोरी की संपत्ति” नहीं मानी जाती।

उदाहरण –
अगर किसी का मोबाइल चोरी हो जाता है और वह चोरी का मोबाइल किसी तस्कर से खरीद लिया जाता है, तो वह मोबाइल “चोरी की संपत्ति” है। अगर वह मालिक को वापस मिल जाता है, तो फिर वह चोरी की संपत्ति नहीं रहेगी।



3.1. उप-धारा (2): चोरी की संपत्ति प्राप्त/रखने वाला

✔ अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर चोरी की संपत्ति प्राप्त या रखता है, और उसे पता है या उसे शक करने की वजह है कि वह चुराई हुई है, तो यह अपराध है।


📌 सजा: 3 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों।

उदाहरण:
राम जानता है कि साइकिल चोरी की है, फिर भी वह उसे खरीद लेता है। यह धारा 317(2) का अपराध है।


3.2. उप-धारा (3): डकैती से चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करना

✔ यदि कोई व्यक्ति डकैती से आई चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त करता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से लेता है जिसे डकैत समझता है, तो यह गंभीर अपराध बनता है।


📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।

उदाहरण:
एक व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों से आया है फिर भी लेता/बेचता है — यह गंभीर अपराध माना जाएगा।


3.2. उप-धारा (3): डकैती से चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करना

✔ यदि कोई व्यक्ति डकैती से आई चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त करता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से लेता है जिसे डकैत समझता है, तो यह गंभीर अपराध बनता है।


📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।

उदाहरण:
एक व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों से आया है फिर भी लेता/बेचता है — यह गंभीर अपराध माना जाएगा।


3.3. उप-धारा (4): Habitual अपराधी

✔ अगर कोई व्यक्ति लगातार या आवर्ती रूप से चोरी की संपत्ति प्राप्त करता है या उसके साथ व्यापार करता है, तो इसे और भी गंभीर माना गया है।


📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।


3.4. उप-धारा (5): चोरी की संपत्ति छिपाना/डिस्पोज करना

✔ अगर कोई जानबूझकर चुराई हुई संपत्ति को छिपाता, नष्ट करता, बेचते हैं, इसे भी अपराध माना गया है।


📌 सजा: 3 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों।



4. BNS धारा 317 का उद्देश्य

धारा 317 का मूल उद्देश्य यह है:

🔹 चोरी-छल-डकैती जैसी अवैध संपत्ति की “काला बाजार” मांग को कम करना।
🔹 लोगों को यह रोकना कि वे चोरी गई वस्तुएँ खरीदें या रखें।
🔹 संपत्ति के मालिकों का हक सुरक्षित रखना।
🔹 संगठित अपराधों को नियंत्रित करना।


सरल शब्दों में: ताकि चोरी-छल-गबन से मिली संपत्ति जल्दी से जल्दी वैध मालिक तक वापस पहुँच सके, और जिन्हें इसका दुरुपयोग करते हैं उन्हें कड़ी सजा मिले।



5. धारा 317 जाने-अनजाने में लागू नहीं होती

महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति ने बिना किसी जानकारी के, यानी बिना यह जाने कि संपत्ति चोरी की है वह उसे प्राप्त किया हो, तो यह धारा तुरंत लागू नहीं होगी। अपराध तभी माना जाता है जब व्यक्ति ने जानबूझकर या शक करने के बावजूद संपत्ति को रखा या लिया हो।


उदाहरण:
अगर कोई व्यक्ति गलती से चोरी हुई वस्तु ले लेता है, और उसे कोई पहचान-चिन्ह या सूचना नहीं मिलती कि यह चोरी हुई है, तब अपराध सिद्ध नहीं होगा।



6. BNS धारा 317 और IPC की तुलना

धारा 317 BNS को आप IPC के Sections 410, 411, 414 से जोड़कर देख सकते हैं, क्योंकि पुराने IPC में भी इसी तरह की चोरी/स्टोलन प्रॉपर्टी से संबंधित धाराएँ मौजूद थीं। BNS में इसे और अधिक स्पष्ट, श्रेणीबद्ध और आधुनिक सजा संरचना के साथ रखा गया है।



7. केस/उदाहरणों से समझें

🌟 उदाहरण 1 – साधारण “चोरी की संपत्ति”

मोबाइल चोरी होने के बाद किसी व्यक्ति ने बेहद सस्ते में यह मोबाइल खरीद लिया। उसे साफ़ तौर पर पता था कि यह चोरी की लग रही है। यह धारा 317(2) के अंतर्गत आता है।


🌟 उदाहरण 2 – डकैती से चोरी का माल

अगर कोई व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों द्वारा चोरी किया गया था और फिर भी उसे बेचने में मदद करता है – तो यह 317(3) का गंभीर अपराध है।


🌟 उदाहरण 3 – लगातार चोरी की वस्तुओं के साथ व्यापार

व्यक्ति बार-बार चोरी की संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो यह 317(4) के अंतर्गत आएगा और इसे गंभीर अपराध माना जाता है।


दंड और सजा :- 

उपधारा (2):- सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनों

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।


उपधारा (3):- सजा:- आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।


उपधारा (4):- सजा:- आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।


उपधारा (5):- सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों- 

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।



8. निष्कर्ष – क्यों जाननी चाहिए यह धारा

धारा 317 का ज्ञान सभी नागरिकों, दुकानदारों, खरीदारों, लॉ/जुडिशियल छात्रों, वकीलों और पुलिस कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:


📌 यह चोरी-गबन से जुड़ी संपत्ति को रोकने का मजबूत ढांचा देता है।
📌 इसे जानने से व्यक्ति अवांछित कानूनी परिणामों से बच सकता है।
📌 यह समझना आवश्यक है कि साधारण-सा चोरापन नज़र आने वाली चीज़ भी सजा का कारण बन सकती है।



📌 BNS धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | सारांश तालिका

धारा/उप-धाराविवरणमुख्य तत्वसंभावित सजा
317 मुख्य धाराचुराई हुई संपत्ति से जुड़ा अपराधचोरी/लूट/गबन/धोखाधड़ी से प्राप्त संपत्ति
317(2)चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त/रखनाव्यक्ति को पता हो कि सामान चोरी की है3 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों
317(3)डकैती से प्राप्त चोरी की संपत्तिजानबूझकर डकैतों से आई चीज़ प्राप्त करना10 साल तक कड़ी सजा या आजीवन
317(4)अक्सर चोरी की संपत्ति के साथ व्यवहारबार-बार चोरी की चीज़ खरीदना/बेचना10 साल तक जेल या आजीवन
317(5)चोरी की संपत्ति को छिपाना/नष्ट करनाचोरी की वस्तु को छुपाना/बेंचना3 साल तक जेल या जुर्माना



(IPC) की धारा 410, 411, 412, 413, 414 को (BNS) की धारा 317 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है



अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है



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