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BNS की धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | विस्तृत और सरल व्याख्या
भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 317 उन अपराधों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति चुराई हुई संपत्ति को प्राप्त, रखना, छिपाना या उसके साथ अनुचित व्यवहार करता है। यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की समान धारा 410/414 से मिलती-जुलती है, लेकिन अब नई संरचना और जुर्माना/सजा के प्रावधानों के साथ आधुनिक रूप में है।
यह लेख हर कोण से समझाएगा कि धारा 317 क्या है, क्या अपराध माना जाता है, किसे दोषी ठहराया जाता है, सजा कितनी है, और इसका उद्देश्य क्या है। लक्ष्य है कि आप पूर्ण जानकारी के साथ-साथ उदाहरणों के माध्यम से इसे समझें।
1. धारा 317 – मूल परिभाषा
BNS धारा 317 में कहा गया है कि:
( चुराई हुई संपत्ति )
चोरी-छल-गबन से मिली संपत्ति ही बुनियादी रूप से “स्टोलन प्रॉपर्टी” मानी जाती है।
2. “चुराई हुई संपत्ति” किसे कहते हैं?
धारा में “चुराई हुई संपत्ति” को समझना सबसे जरूरी है। इसे निम्न रूप से समझा जा सकता है:
✔ वह संपत्ति जो चोरी, लूट, जबरन वसूली, धोखाधड़ी आदि के कारण एक व्यक्ति से दूसरे के पास गई हो।
✔ वह संपत्ति जो गबन (criminal misappropriation) या विश्वासभंग के कारण अवैध रूप से हस्तांतरित हो चुकी है।
✔ अगर संपत्ति बाद में उसके कानूनी मालिक के पास वापस आती है, तो वह “चोरी की संपत्ति” नहीं मानी जाती।
उदाहरण –
अगर किसी का मोबाइल चोरी हो जाता है और वह चोरी का मोबाइल किसी तस्कर से खरीद लिया जाता है, तो वह मोबाइल “चोरी की संपत्ति” है। अगर वह मालिक को वापस मिल जाता है, तो फिर वह चोरी की संपत्ति नहीं रहेगी।
3.1. उप-धारा (2): चोरी की संपत्ति प्राप्त/रखने वाला
✔ अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर चोरी की संपत्ति प्राप्त या रखता है, और उसे पता है या उसे शक करने की वजह है कि वह चुराई हुई है, तो यह अपराध है।
📌 सजा: 3 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों।
उदाहरण:
राम जानता है कि साइकिल चोरी की है, फिर भी वह उसे खरीद लेता है। यह धारा 317(2) का अपराध है।
3.2. उप-धारा (3): डकैती से चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करना
✔ यदि कोई व्यक्ति डकैती से आई चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त करता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से लेता है जिसे डकैत समझता है, तो यह गंभीर अपराध बनता है।
📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।
उदाहरण:
एक व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों से आया है फिर भी लेता/बेचता है — यह गंभीर अपराध माना जाएगा।
3.2. उप-धारा (3): डकैती से चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करना
✔ यदि कोई व्यक्ति डकैती से आई चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त करता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से लेता है जिसे डकैत समझता है, तो यह गंभीर अपराध बनता है।
📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।
उदाहरण:
एक व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों से आया है फिर भी लेता/बेचता है — यह गंभीर अपराध माना जाएगा।
3.3. उप-धारा (4): Habitual अपराधी
✔ अगर कोई व्यक्ति लगातार या आवर्ती रूप से चोरी की संपत्ति प्राप्त करता है या उसके साथ व्यापार करता है, तो इसे और भी गंभीर माना गया है।
📌 सजा: आजीवन कारावास या 10 साल तक की कड़ी सजा + जुर्माना।
3.4. उप-धारा (5): चोरी की संपत्ति छिपाना/डिस्पोज करना
✔ अगर कोई जानबूझकर चुराई हुई संपत्ति को छिपाता, नष्ट करता, बेचते हैं, इसे भी अपराध माना गया है।
📌 सजा: 3 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों।
4. BNS धारा 317 का उद्देश्य
धारा 317 का मूल उद्देश्य यह है:
🔹 चोरी-छल-डकैती जैसी अवैध संपत्ति की “काला बाजार” मांग को कम करना।
🔹 लोगों को यह रोकना कि वे चोरी गई वस्तुएँ खरीदें या रखें।
🔹 संपत्ति के मालिकों का हक सुरक्षित रखना।
🔹 संगठित अपराधों को नियंत्रित करना।
सरल शब्दों में: ताकि चोरी-छल-गबन से मिली संपत्ति जल्दी से जल्दी वैध मालिक तक वापस पहुँच सके, और जिन्हें इसका दुरुपयोग करते हैं उन्हें कड़ी सजा मिले।
5. धारा 317 जाने-अनजाने में लागू नहीं होती
महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति ने बिना किसी जानकारी के, यानी बिना यह जाने कि संपत्ति चोरी की है वह उसे प्राप्त किया हो, तो यह धारा तुरंत लागू नहीं होगी। अपराध तभी माना जाता है जब व्यक्ति ने जानबूझकर या शक करने के बावजूद संपत्ति को रखा या लिया हो।
उदाहरण:
अगर कोई व्यक्ति गलती से चोरी हुई वस्तु ले लेता है, और उसे कोई पहचान-चिन्ह या सूचना नहीं मिलती कि यह चोरी हुई है, तब अपराध सिद्ध नहीं होगा।
6. BNS धारा 317 और IPC की तुलना
धारा 317 BNS को आप IPC के Sections 410, 411, 414 से जोड़कर देख सकते हैं, क्योंकि पुराने IPC में भी इसी तरह की चोरी/स्टोलन प्रॉपर्टी से संबंधित धाराएँ मौजूद थीं। BNS में इसे और अधिक स्पष्ट, श्रेणीबद्ध और आधुनिक सजा संरचना के साथ रखा गया है।
7. केस/उदाहरणों से समझें
🌟 उदाहरण 1 – साधारण “चोरी की संपत्ति”
मोबाइल चोरी होने के बाद किसी व्यक्ति ने बेहद सस्ते में यह मोबाइल खरीद लिया। उसे साफ़ तौर पर पता था कि यह चोरी की लग रही है। यह धारा 317(2) के अंतर्गत आता है।
🌟 उदाहरण 2 – डकैती से चोरी का माल
अगर कोई व्यक्ति जानता है कि सामान डकैतों द्वारा चोरी किया गया था और फिर भी उसे बेचने में मदद करता है – तो यह 317(3) का गंभीर अपराध है।
🌟 उदाहरण 3 – लगातार चोरी की वस्तुओं के साथ व्यापार
व्यक्ति बार-बार चोरी की संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो यह 317(4) के अंतर्गत आएगा और इसे गंभीर अपराध माना जाता है।
8. निष्कर्ष – क्यों जाननी चाहिए यह धारा
धारा 317 का ज्ञान सभी नागरिकों, दुकानदारों, खरीदारों, लॉ/जुडिशियल छात्रों, वकीलों और पुलिस कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
📌 यह चोरी-गबन से जुड़ी संपत्ति को रोकने का मजबूत ढांचा देता है।
📌 इसे जानने से व्यक्ति अवांछित कानूनी परिणामों से बच सकता है।
📌 यह समझना आवश्यक है कि साधारण-सा चोरापन नज़र आने वाली चीज़ भी सजा का कारण बन सकती है।
📌 BNS धारा 317 – चुराई हुई संपत्ति | सारांश तालिका
| धारा/उप-धारा | विवरण | मुख्य तत्व | संभावित सजा |
|---|---|---|---|
| 317 मुख्य धारा | चुराई हुई संपत्ति से जुड़ा अपराध | चोरी/लूट/गबन/धोखाधड़ी से प्राप्त संपत्ति | — |
| 317(2) | चोरी की संपत्ति जानबूझकर प्राप्त/रखना | व्यक्ति को पता हो कि सामान चोरी की है | 3 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों |
| 317(3) | डकैती से प्राप्त चोरी की संपत्ति | जानबूझकर डकैतों से आई चीज़ प्राप्त करना | 10 साल तक कड़ी सजा या आजीवन |
| 317(4) | अक्सर चोरी की संपत्ति के साथ व्यवहार | बार-बार चोरी की चीज़ खरीदना/बेचना | 10 साल तक जेल या आजीवन |
| 317(5) | चोरी की संपत्ति को छिपाना/नष्ट करना | चोरी की वस्तु को छुपाना/बेंचना | 3 साल तक जेल या जुर्माना |
| (IPC) की धारा 410, 411, 412, 413, 414 को (BNS) की धारा 317 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |

