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🟢 BNS धारा 354: दैवी अप्रसाद के भय से कराया गया कार्य – विस्तृत जानकारी
भारत में नया आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) कई ऐसे अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है जो समाज में अंधविश्वास और धोखाधड़ी से जुड़े होते हैं। BNS की धारा 354 विशेष रूप से उन मामलों पर लागू होती है, जहां किसी व्यक्ति को यह विश्वास दिलाकर कि यदि वह कोई कार्य नहीं करेगा तो उसे “दैवी अप्रसाद” यानी ईश्वर का कोप झेलना पड़ेगा, उससे कोई कार्य करवाया जाता है।
यह धारा समाज में फैले अंधविश्वास, धोखाधड़ी और मानसिक शोषण को रोकने के लिए बनाई गई है।
धारा 354 का मूल भाषा में प्रावधान (Bare Act Text):-
व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा, कराया गया कार्य
जो कोई किसी व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके, या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करके, कि यदि वह उस बात को न करेगा, जिसे उससे कराना अपराधी का उद्देश्य हो, या यदि वह उस बात को करेगा जिसका उससे लोप कराना अपराधी का उद्देश्य हो, तो वह या कोई व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, अपराधी के किसी कार्य से दैवी अप्रसाद का भाजन हो जाएगा, या बना दिया जाएगा, स्वेच्छया उस व्यक्ति से कोई ऐसी बात करवाएगा या करवाने का प्रयत्न करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या किसी ऐसी बात के करने का लोप करवाएगा या करवाने का प्रयत्न करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
उदाहरण:- (क) गोविंद, यह विश्वास कराने के आशय से मोहित के द्वार पर धरना देता है कि इस प्रकार धरना देने से वह मोहित को दैवी अप्रसाद का भाजन बना रहा है। गोविंद ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) मोहित, मुंशी को धमकी देता है कि यदि मुंशी अमुक कार्य नहीं करेगा, तो मोहित अपने बच्चों में से किसी एक का वध ऐसी परिस्थितियों में कर डालेगा जिससे ऐसे वध करने के परिणामस्वरूप यह विश्वास किया जाए, कि मुंशी दैवी अप्रसाद का भाजन बना दिया गया है। मोहित, ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
🔶 धारा 354 का अर्थ (Meaning of Section 354 BNS)
BNS की धारा 354 के अनुसार:
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास दिलाता है कि यदि वह कोई विशेष कार्य नहीं करेगा तो उसे ईश्वर या किसी दैवी शक्ति का कोप झेलना पड़ेगा, और इस भय के कारण वह व्यक्ति कोई कार्य करता है — तो यह एक अपराध माना जाएगा।
अर्थात, यह कानून उन लोगों के खिलाफ है जो धार्मिक या दैवी शक्तियों का डर दिखाकर दूसरों को अपने अनुसार काम करने के लिए मजबूर करते हैं।
🔶 इस धारा के मुख्य तत्व (Essential Ingredients)
इस अपराध को सिद्ध करने के लिए निम्न तत्व आवश्यक हैं:
◾भय उत्पन्न करना – आरोपी व्यक्ति पीड़ित के मन में दैवी अप्रसाद का डर पैदा करता है
◾विश्वास दिलाना – पीड़ित को यकीन दिलाया जाता है कि नुकसान ईश्वर द्वारा होगा
◾कार्य करवाना – इस डर के कारण पीड़ित कोई कार्य करता है
◾धोखाधड़ी या गलत उद्देश्य – आरोपी का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ या नुकसान पहुँचाना होता है
🔶 उदाहरण (Examples)
✔️ उदाहरण 1:
कोई व्यक्ति कहता है कि “यदि तुम मुझे पैसे नहीं दोगे, तो तुम्हारे परिवार पर देवी-देवता का श्राप लगेगा।”
➡️ यदि इस डर से व्यक्ति पैसे दे देता है, तो यह धारा 354 के अंतर्गत अपराध है।
✔️ उदाहरण 2:
कोई तथाकथित “तांत्रिक” कहता है कि “अगर तुम यह पूजा नहीं कराओगे, तो तुम्हें बड़ी बीमारी हो जाएगी।”
➡️ इस डर से पूजा करवाना और पैसे लेना अपराध है।
🔶 सजा (Punishment under BNS Section 354)
इस धारा के तहत:
सजा:- 1 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
(न्यायालय परिस्थिति के अनुसार सजा तय करता है)
🔶 IPC से संबंध (Relation with Old IPC)
यह प्रावधान पहले IPC (भारतीय दंड संहिता) में भी मौजूद था, जिसे अब BNS में शामिल कर और स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य समाज में अंधविश्वास आधारित अपराधों को रोकना है।
🔶 इस कानून का उद्देश्य (Objective of the Law)
इस धारा का मुख्य उद्देश्य है:
🔸लोगों को अंधविश्वास से बचाना
🔸धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग रोकना
🔸समाज में धोखाधड़ी और मानसिक शोषण खत्म करना
🔸कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना
🔶 महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु
▪️यह अपराध मानसिक दबाव (Mental Coercion) से जुड़ा होता है
▪️इसमें शारीरिक बल का प्रयोग जरूरी नहीं है
▪️केवल भय और विश्वास के आधार पर कार्य करवाना ही पर्याप्त है
▪️पीड़ित का विश्वास करना आवश्यक तत्व है
🔶 बचाव (Defense)
🔶 समाज पर प्रभाव (Impact on Society)
धारा 354 समाज में फैले कई खतरनाक प्रथाओं को रोकने में मदद करती है, जैसे:
🔺झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी
🔺धार्मिक डर दिखाकर पैसे ऐंठना
🔺कमजोर और अशिक्षित लोगों का शोषण
🔺यह कानून लोगों को जागरूक बनाता है कि वे ऐसे झूठे दावों से सावधान रहें।
🔶 निष्कर्ष (Conclusion)
BNS धारा 354 एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो लोगों को अंधविश्वास और धार्मिक भय के नाम पर होने वाले शोषण से बचाता है। यदि कोई व्यक्ति दैवी अप्रसाद का डर दिखाकर आपसे कोई कार्य करवाता है, तो यह एक दंडनीय अपराध है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस कानून की जानकारी होना जरूरी है ताकि वे खुद को और दूसरों को ऐसे अपराधों से बचा सकें।
(IPC) की धारा 508 को (BNS) की धारा 354 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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