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BSA 2023 की धारा 1 क्या है? भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की प्रारंभिक जानकारी

(IEA) की धारा 1 को (BSA) की धारा 1 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है
काल्पनिक चित्र 


पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):- 


1. संक्षिप्त नाम, लागू होना और प्रारंभ. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 है।

(2) यह किसी न्यायालय में या उसके समक्ष सभी न्यायिक कार्यवाहियों, जिसके अंतर्गत सेना न्यायालय सम्मिलित है, को लागू होगा, किंतु न तो किसी न्यायालय या किसी अधिकारी के समक्ष पेश नहीं किए गए शपथ-पत्रों को न ही किसी मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाहियों को लागू होता है। करे। 

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत हैं


प्रस्तावना:- 

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 1 इस अधिनियम का प्रारंभिक भाग है, जिसमें अधिनियम का नाम, लागू क्षेत्र तथा प्रभावी होने की तिथि का उल्लेख किया गया है। किसी भी कानून की पहली धारा सामान्य रूप से उस अधिनियम की पहचान और उसके लागू होने की सीमा को स्पष्ट करती है। इसी प्रकार BSA 2023 की धारा 1 भी यह बताती है कि यह कानून किस नाम से जाना जाएगा और यह पूरे भारत में लागू होगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 पुराने Indian Evidence Act, 1872 का स्थान लेने वाला नया कानून है। इसका उद्देश्य न्यायालयों में साक्ष्यों से संबंधित प्रक्रिया को आधुनिक बनाना तथा डिजिटल युग के अनुसार साक्ष्यों को अधिक प्रभावी तरीके से स्वीकार करना है। धारा 1 इस अधिनियम की नींव मानी जाती है क्योंकि यही धारा कानून की पहचान तय करती है।

धारा 1 के अनुसार इस अधिनियम का नाम “भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023” होगा। यह अधिनियम पूरे भारत में लागू किया गया है। पहले कई पुराने कानूनों में जम्मू-कश्मीर या विशेष क्षेत्रों को लेकर अलग व्यवस्था होती थी, लेकिन नए कानून में पूरे भारत को समान रूप से शामिल किया गया है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहती है।

इसके अतिरिक्त धारा 1 यह भी स्पष्ट करती है कि यह अधिनियम सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद प्रभावी होगा। जब कोई नया कानून बनाया जाता है, तब उसे लागू करने की तिथि सरकार अलग से निर्धारित करती है। उसी तिथि से न्यायालयों में इस अधिनियम के प्रावधान लागू माने जाते हैं।

BSA 2023 का मुख्य उद्देश्य न्याय व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, ईमेल, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य बन चुके हैं। पुराने कानून में इन विषयों पर सीमित व्यवस्था थी, इसलिए नए अधिनियम को लागू किया गया। हालांकि धारा 1 सीधे साक्ष्य के प्रकारों की चर्चा नहीं करती, लेकिन यह पूरे अधिनियम को लागू करने का आधार प्रदान करती है।

कानूनी दृष्टि से धारा 1 का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि किसी भी मुकदमे में यह जानना आवश्यक होता है कि कौन सा कानून लागू है। जब नया अधिनियम लागू हो जाता है, तब न्यायालय उसी के अनुसार साक्ष्यों का परीक्षण करता है। इसलिए धारा 1 यह सुनिश्चित करती है कि BSA 2023 पूरे देश में एक समान रूप से प्रभावी रहे।

सरल शब्दों में कहा जाए तो BSA 2023 की धारा 1 अधिनियम का परिचयात्मक प्रावधान है। इसमें कानून का नाम, उसका विस्तार और लागू होने की स्थिति बताई गई है। यह धारा छोटी अवश्य है, लेकिन पूरे अधिनियम की वैधानिक पहचान इसी से शुरू होती है। कानून पढ़ने वाले विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और सामान्य नागरिकों के लिए धारा 1 को समझना आवश्यक है क्योंकि यही अधिनियम की शुरुआत और उसकी कानूनी स्थिति को स्पष्ट करती है


(IEA) की धारा 1 को (BSA) की धारा 1 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

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अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है








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