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BSA 2023 की धारा 2(1)(a) में न्यायालय की परिभाषा क्या है?

जानिए BSA 2023 की धारा 2(1)(a) में “न्यायालय” की परिभाषा क्या है, इसका कानूनी अर्थ, महत्व और पुराने Evidence Act से अंतर आसान हिंदी भाषा में।
काल्पनिक चित्र 

पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):- 


2. परिभाषाएं. - (1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) "न्यायालय" शब्द के अन्तर्गत सभी न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट तथा मध्यस्थों के सिवाय साक्ष्य लेने के लिए वैध रूप से प्राधिकृत सभी व्यक्ति आते हैं;


BSA 2023 की धारा 2(1)(a) “न्यायालय” की परिभाषा क्या है? – आसान भाषा में सम्पूर्ण जानकारी


भारत में लागू नया कानून Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह लागू किया गया है। इस नए कानून में धारा 2 के अंतर्गत विभिन्न कानूनी शब्दों की परिभाषाएं दी गई हैं। इन्हीं में से धारा 2(1)(a) “न्यायालय” अर्थात “Court” की परिभाषा बताती है। यह परिभाषा न्यायिक प्रक्रिया को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

धारा 2(1)(a) के अनुसार “न्यायालय” में सभी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट तथा वे सभी व्यक्ति शामिल होते हैं जिन्हें विधि द्वारा साक्ष्य लेने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इसमें मध्यस्थ (Arbitrator) शामिल नहीं होते। अर्थात यदि किसी व्यक्ति या प्राधिकरण को कानून द्वारा गवाही या साक्ष्य रिकॉर्ड करने का अधिकार दिया गया है, तो वह इस धारा के अंतर्गत न्यायालय माना जाएगा। 

इस परिभाषा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पारंपरिक अदालतें ही नहीं, बल्कि वे सभी वैधानिक प्राधिकरण भी न्यायालय की श्रेणी में आएं जो साक्ष्य ग्रहण करने की शक्ति रखते हैं। उदाहरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायालय, पारिवारिक न्यायालय तथा कुछ विशेष अधिकरण ऐसे निकाय हो सकते हैं जिन्हें साक्ष्य लेने का अधिकार प्राप्त हो। 

हालांकि इस धारा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि Arbitrator अर्थात मध्यस्थ को न्यायालय नहीं माना जाएगा। इसका कारण यह है कि मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद निवारण प्रक्रिया है, जो सामान्य न्यायिक प्रक्रिया से अलग होती है। इसलिए मध्यस्थ को न्यायालय की शक्तियां प्राप्त नहीं होतीं। 

BSA 2023 की यह परिभाषा पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की परिभाषा से काफी हद तक मिलती-जुलती है, लेकिन नए कानून में डिजिटल एवं आधुनिक न्यायिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक दृष्टिकोण अपनाया गया है। आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाओं के कारण न्यायालय की भूमिका पहले से अधिक विस्तृत हो गई है। 

यदि किसी मुकदमे में कोई प्राधिकारी कानूनी रूप से गवाही रिकॉर्ड करता है, तो उसके समक्ष दिए गए बयान साक्ष्य के रूप में मान्य हो सकते हैं। यही कारण है कि धारा 2(1)(a) न्यायिक प्रक्रिया की नींव मानी जाती है। कानून के विद्यार्थी, अधिवक्ता तथा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह धारा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो BSA 2023 की धारा 2(1)(a) यह बताती है कि “न्यायालय” केवल अदालत की इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि हर वह वैधानिक संस्था या अधिकारी जो कानून के अनुसार साक्ष्य लेने का अधिकार रखता है, न्यायालय की श्रेणी में आता है। यही परिभाषा न्यायिक कार्यवाही को वैधानिक आधार प्रदान करती है।


(IEA) की धारा 3,Para 1 को (BSA) की धारा 2(1)A में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है




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