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BNS धारा 297 | अनधिकृत लॉटरी कार्यालय रखना – कानूनी सरल व्याख्या

BNS धारा 297 | अनधिकृत लॉटरी कार्यालय रखना – कानूनी सरल व्याख्या
काल्पनिक चित्र 

पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text) :- 

(लाटरी कार्यालय रखना)

 (1) जो कोई ऐसी कोई लाटरी, जो न तो राज्य लाटरी हो और न तत्सम्बन्धित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत लाटरी हो, निकालने के प्रयोजन के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(2) जो कोई ऐसी लाटरी में किसी टिकट, लाट, संख्यांक या आकृति को निकालने से सम्बन्धित या लागू होने वाली किसी घटना या परिस्थिति पर किसी व्यक्ति के फायदे के लिए किसी राशि को देने की, या किसी माल के परिदान को, या किसी बात को करने की, या किसी बात से प्रविरत रहने की कोई प्रस्थापना प्रकाशित करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।


BNS धारा 297 — Keeping Lottery Office (लॉटरी कार्यालय रखना) :- 

पूर्ण विस्तृत लेख |


1. परिचय (Introduction) :- 

भारत ने 2024 में पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) को बदलकर नई भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, BNS) लागू की। इसके तहत कई पुराने अपराधों को नए नामों, नई धारा संख्याओं और नए दंड प्रावधानों के साथ फिर से परिभाषित किया गया है।
BNS धारा 297 “लॉटरी कार्यालय रखना” से संबंधित है — यानी अनधिकृत लॉटरी के संचालन और इससे जुड़े विज्ञापनों पर नियंत्रण। 


2. कानूनी पाठ (Legal Text) – धारा 297 BNS :- 

(1)
जो कोई भी ऐसी लॉटरी के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखता है जो राज्य लॉटरी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत लॉटरी नहीं है,
उसे छह महीने तक के कारावास, जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

(2)
जो कोई व्यक्ति ऐसी लॉटरी से जुड़े किसी आयोजन या परिणाम के आधार पर किसी व्यक्ति को पैसा, वस्तु, लाभ देने या किसी कार्य को करने/न करने का प्रस्ताव प्रकाशित करता है,
उसे ₹5,000 तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

3. धारा 297 का उद्देश्य (Purpose of Section 297) :- 

धारा 297 का मुख्य उद्देश्य है :- 

✅ अनधिकृत लॉटरी (Unauthorized Lottery) से बचाव — केवल राज्य द्वारा अधिकृत लॉटरी ही कानूनी रूप से संचालित हो सकती है।
✅ जुआ/धोखाधड़ी को रोका जाना — अवैध लॉटरी सामाजिक और आर्थिक नुकसान कर सकती है।
✅ जनता की सुरक्षा — गलत अपेक्षाएं और आर्थिक नुकसान से आम लोगों को बचाना।
✅ परिचालन की पारदर्शिता — केवल वैध लॉटरी प्रणाली को अनुमति देना। 

4. अनधिकृत (आउटसाइड) लॉटरी क्या होती है? :- 

किसी लॉटरी को अनधिकृत तब माना जाता है जब:

🔹 वह राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त नहीं है।
🔹 वह किसी गैर-कानूनी समूह या व्यापार द्वारा चलाई जाती है।
🔹 वह ऑनलाइन या ऑफलाइन रूप से बिना मंजूरी के संचालित हो। 

इन सबको BNS धारा 297 के तहत अपराध माना जाता है।


5. धारा 297 के दोनों भागों की व्याख्या (Explanation) :- 

(A) धारा 297(1): लॉटरी कार्यालय रखना :- 

यह भाग उन लोगों को लक्षित करता है जो:- 

📍 खुद कोई लॉटरी कार्यालय या स्थल चलाते हैं
📍 लॉटरी टिकट बेचते हैं
📍 किसी अनधिकृत लॉटरी का संचालन करते हैं

यदि कोई व्यक्ति बिना सरकारी अनुमति के ऐसा करता है, तो उसे उच्चतम 6 महीने तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। 

(B) धारा 297(2): प्रचार और प्रस्ताव प्रकाशित करना :- 

इस भाग का सम्बन्ध उन लोगों से है जो:- 

📌 इंटरनेट/सोशल मीडिया/प्रिंट में अवैध लॉटरी को बढ़ावा देते हैं
📌 लॉटरी के बारे में पुरस्कार/लाभ का विज्ञापन प्रकाशित करते हैं
📌 लोगों को आर्थिक रूप से आकर्षित करते हैं

इन स्थितियों में दोषी व्यक्ति को ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 


6. उदाहरण (Illustrations) :- 

उदाहरण 1 – गैर-कानूनी कार्यालय चलाना - 

रवि ने अपने शहर में एक लॉटरी कार्यालय खोल रखा है जहाँ वह टिकट बेचता है और विजेताओं को नगद पुरस्कार देता है।
यदि इस लॉटरी को राज्य सरकार ने अधिकृत नहीं किया है, तो रवि BNS धारा 297(1) के तहत दोषी माना जाएगा और दंड का सामना करेगा। 

उदाहरण 2 – अवैध लॉटरी का प्रचार - 

प्रिया एक फेसबुक पेज चलाती है और वहाँ वह पुरस्कार देने वाली एक गैर-कानूनी लॉटरी का विज्ञापन देती है।
यह BNS धारा 297(2) के अंतर्गत आता है और उसे जुर्माना का सामना करना पड़ सकता है।


7. ऑनलाइन लॉटरी और BNS 297 :- 

धारा 297 केवल केवल भौतिक कार्यालय पर लागू नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर अनधिकृत लॉटरी के लिए कार्यालय रखता है या विज्ञापन करता है, तो यह भी इसी धारा के अंतर्गत दंडनीय है। 

8. दंड और निहितार्थ (Punishment & Implications) :- 

◆ उपधारा (1):- सजा:- दण्ड-6 मास के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों 

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।

◆ उपधारा (2):- सजा:- 5,000 रुपए का जुर्माना

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।

धारा 297 का उद्देश्य सख्ती से अवैध जुए और वित्तीय शोषण को रोकना है और यह सार्वजनिक हित में बनाया गया है


9. धारा 297 के फायदे (Benefits of the Law) :- 

🔹 लोगों को अवैध जुआ से सुरक्षित रखना
🔹 आर्थिक शोषण और ठगी से बचाव
🔹 कानूनी लॉटरी संचालन को बढ़ावा देना
🔹 डिजिटल और ऑफलाइन दोनों क्षेत्रों में नियंत्रण | 


10. FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :- 

Q1: क्या सभी लॉटरी अवैध हैं?
Ans :- 👉 नहीं। केवल राज्य सरकार द्वारा अधिकृत लॉटरी ही कानूनी हैं। 

Q2: क्या ऑनलाइन लॉटरी पर भी यह लागू होती है?
Ans :- 👉 हाँ, अगर वह अधिकृत नहीं है तो BNS धारा 297 लागू होगी। 

Q3: क्या पहली बार अपराध पर जेल भी हो सकती है?
Ans :- 👉 हाँ, अधिकारी 6 महीने तक की सजा तक दे सकते हैं। 


11. निष्कर्ष (Conclusion) :- 

BNS धारा 297 भारत में अनधिकृत लॉटरी संचालन और उससे जुड़े प्रचार को नियंत्रित करने वाला प्रमुख प्रावधान है। यह कानून न केवल अवैध जुए को रोकता है बल्कि आम जनता को भी आर्थिक शोषण से बचाने के लिए है।
यदि आप लॉटरी से जुड़ा कोई व्यवसाय या प्रचार कर रहे हैं, तो हमेशा राज्य सरकार की अनुमति ले लेना सुरक्षित और कानूनी होता है।

(IPC) की धारा 294A को (BNS) की धारा 297 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

(IPC) की धारा 294A को (BNS) की धारा 297 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

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