📜 BNS धारा 300 – Disturbing Religious Assembly (धार्मिक सभा में विघ्न डालना) :-
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023), जिसे संक्षेप में BNS कहा जाता है, भारत में IPC (Indian Penal Code) का प्रतिस्थापन करने वाली नई क्रिमिनल कोड प्रणाली है। BNS का उद्देश्य कानून को आधुनिक, स्पष्ट और भारत-विशेष बनाना है। BNS की कई धाराएँ पहले से विपरीत IPC धारा 296 आदि का स्थान लेती हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण प्रावधान धारा 300 है।
🔯 धारा 300 का मूल भाषा में प्रावधान (Bare Act Text) :-
( धार्मिक जमाव में विघ्न करना )
जो कोई धार्मिक उपासना या धार्मिक संस्कारों में वैध रूप से लगे हुए किसी जमाव में स्वेच्छया विघ्न कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
🔎 धारा 300 का उद्देश्य — धार्मिक सभाओं का संरक्षण :-
धारा 300 का मूल उद्देश्य है — किसी भी धार्मिक सभा, पूजा, अनुष्ठान या धर्म-सम्बन्धी कार्यक्रम के शांतिपूर्वक संचालन को बाधित या विघ्नित करना रोकना। आइए इसे बारी-बारी से समझते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता (Fundamental Right) भारत के संविधान में मान्य है, और हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार पूजा-अनुष्ठान करने का अधिकार है। धारा 300 इसका संरक्षण करती है कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर किसी धार्मिक सभा में बाधा न डाले।
🧠 “Voluntarily causes disturbance” का अर्थ :-
धारा 300 में कहा गया है कि “voluntarily causes disturbance” — यानी व्यक्ति जानबूझकर इच्छा से विघ्न उत्पन्न करे। इसका अर्थ:
🔹 व्यक्ति की क्रिया जानबूझकर होनी चाहिए
🔹 वह धार्मिक सभा को बाधित करने के इरादे से की गई हो
🔹 अथवा ऐसी शोर-शराबा या व्यवधान उत्पन्न करना जिससे पूजा-अनुष्ठान प्रभावित हो
अर्थात् कोई भी आकस्मिक या अनजाने में हुआ व्यवधान (जैसे जोर से फोन बज जाना) इसमें नहीं आता, जब तक स्पष्ट रूप से “इच्छा से” विघ्न उत्पन्न नहीं हुआ हो।
📍 “Religious Assembly” यानी धार्मिक सभा क्या है? :-
धार्मिक सभा का विस्तार बहुत व्यापक है:
📌 मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च में पूजा या आरती
📌 धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, इकट्ठा
📌 धार्मिक परेड या जुलूस
📌 कानूनन वैध धार्मिक कार्यक्रम
ये सभी धार्मिक सभा में आते हैं यदि वे शांतिपूर्वक और वैध रूप से आयोजित हो रहे हों। किसी भी ऐसी सभा को बाधित करना धारा 300 के अंतर्गत अपराध है।
📌 उदाहरण: धारा 300 के तहत अपराध :-
🔹 उदाहरण 1:
एक व्यक्ति मंदिर पूजा के दौरान तेज आवाज में माइक पर गाली-गलौज करता है, जिससे भक्तगण शांतिपूर्वक पूजा नहीं कर पाते।
🔹 उदाहरण 2:
धार्मिक जुलूस के मार्ग में जानबूझकर खड़े होकर रुकावट डालना।
🔹 उदाहरण 3:
एक पूजा स्थल के भीतर जानबूझकर शोर-शराबा उत्पन्न करना जिससे अनुष्ठान बाधित हो।
इन सभी स्थितियों में धारा 300 के तहत मामला बन सकता है।
⚖️ धारा 300 का दंड और प्रयोजन :-
सजा:- 1 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य:
✅ धार्मिक समारोहों में बाधा डालने वालों को एक न्यायिक चेतावनी देना
✅ धार्मिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण पूजा-अनुष्ठान का संरक्षण
✅ सामाजिक और सांप्रदायिक समरसता बनाए रखना
धर्मनिरपेक्ष भारत जैसे विविध समाज में यह कानून शांति और सामंजस्य को बनाए रखने में सहायक होता है।
📌 धारा 300 — अन्य संबंधित धाराओं से तुलना :-
धारा 300 अकेली नहीं है — BNS के अध्याय 16 में कई धाराएँ हैं जो धार्मिक अपराधों को परिभाषित करती हैं:
🔹 धारा 298 — पूजा-स्थलों को नुकसान पहुँचाना
🔹 धारा 299 — धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना
🔹 धारा 301 — समाधि स्थल या अंतिम संस्कार समारोह में अड़चन डालना
🔹 धारा 302 — किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को विशिष्ट रूप से चोट पहुँचाना
इन धाराओं में से धारा 300 विशेष रूप से “धार्मिक सभा में व्यवधान” को कवर करती है।
🔍 क्या धारा 300 केवल भीड़-भाड़ वाली सभाओं पर लागू होती है? :-
धारा 300 केवल बड़ी सभाओं पर ही लागू नहीं होती। यह छोटे-से-छोटे वैध धार्मिक कार्यक्रम पर भी लागू होती है अगर कोई उस कार्यक्रम को गंभीर रूप से बाधित करता है। इसका श्रेणीकरण धार्मिक सभा की प्राकृतिक महत्ता और प्रभाव के आधार पर होता है।
🧑⚖️ धारा 300 के तहत मुकदमा कैसे बनता है? :-
धारा 300 के तहत आरोपी के खिलाफ पहला कदम FIR दर्ज करना है। यदि पुलिस किसी व्यक्ति को धार्मिक सभा को बाधित करते हुए पाती है या शिकायत मिलती है, तो FIR दर्ज कर जांच की जाएगी। जांच के बाद अभियोजन पक्ष सबूत प्रस्तुत करेगा और न्यायालय निर्णय देगा।
यह सार्वजनिक अनुशासन बनाए रखने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का एक साधन है।
🧑⚖️ धारा 300 के तहत FIR / केस कैसे दर्ज होता है? :-
📍 1. घटना के होने पर शिकायत (Complaint) दर्ज करें
➤ यदि आपको लगता है कि किसी ने जानबूझकर पूजा या धार्मिक सभा को रोका या बाधित किया है →
सबसे पहले निकटतम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएँ।
इसमें घटना का समय, स्थान, शामिल लोगों का विवरण और गवाहों के नाम शामिल करें।
📍 2. FIR में क्या लिखें?
FIR में आमतौर पर यह चीजें शामिल होती हैं:
✔️ धारा 300 BNS (Disturbing Religious Assembly)
✔️ घटना का पूरा विवरण (क्या, कहाँ, कब, कैसे हुआ)
✔️ अगर लाउडशोर / धक्का-मुक्की हुआ — उसका विवरण
✔️ गवाह (अगर कोई मौजूद है)
✔️ किसी भी प्रकार का वीडियो/फोटो सबूत
(ध्यान रखें कि FIR केवल वास्तविक और सटीक जानकारी पर ही दर्ज होनी चाहिए।)
📍 3. अगला क्या होता है?
➤ FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच जारी रखेगी।
➤ पुलिस आरोपियों से पूछताछ करेगी और सबूत जमा करेगी।
➤ जांच पूरी होने के बाद पुलिस प्रोशीक्यूशन रिपोर्ट कोर्ट में भेजती है।
➤ कोर्ट में सुनवाई के बाद फैसला आता है।
अगर पुलिस FIR लिखने में रोकती है → आप SP (Superintendent of Police) के पास भी शिकायत कर सकते हैं या न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकते हैं।
📌 निष्कर्ष :-
BNS धारा 300 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो भारत की धर्म-निरपेक्षता और शांतिपूर्ण धार्मिक अभ्यास को मजबूती से सुरक्षित रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी धर्मों के अनुयायी बिना व्यवधान के पूजा-अनुष्ठान कर सकें।
धारा 300 के तहत:
✔️ केवल जानबूझकर उत्पन्न की गई व्यवधान को दंडित किया जाता है
✔️ किसी भी धार्मिक कार्यक्रम या सभा को बाधित करना अपराध है
✔️ सजा में 1 वर्ष जेल, जुर्माना, या दोनों शामिल हो सकते हैं
धर्मनिरपेक्ष भारत में यह प्रावधान सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता के मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(IPC) की धारा 296 को (BNS) की धारा 300 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

