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BNS की धारा 302: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का अपराध | सजा, उदाहरण और कानूनी व्याख्या

BNS की धारा 302: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का अपराध | सजा, उदाहरण और कानूनी व्याख्या
काल्पनिक चित्र 



धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना – पूर्ण जानकारी


📍 क्या सभी को पता है कि 302 अब हत्या नहीं है?

बहुत से लोगों और कई पुराने लेखों में अभी भी BNS की धारा 302 को “हत्या” समझा जाता है — यह गलत है।
अधिकतर नवीन और आधिकारिक व्याख्याएँ स्पष्ट करती हैं कि क्या बदल गया है और नया कानूनी क्रम क्या है। 


📌 BNS की धारा 302 — सही अर्थ, व्याख्या, और कानूनी जानकारी (2026) :- 

मुख्य बात:- 
👉 BNS (भारतीय न्याय संहिता) में धारा 302 अब “हत्या (Murder)” नहीं है। BNS में murder/हत्या की धाराएँ अलग नंबर पर हैं।

📌 BNS में मर्डर/हत्या के अपराध की धारा 103 है।

📌 BNS की धारा 302 का अर्थ पूरी तरह अलग है।


🔷 भूमिका (Introduction) :- 

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह लेकर आपराधिक कानून को आधुनिक रूप दिया है। समाज में शांति, सौहार्द और धार्मिक सह-अस्तित्व बनाए रखने के उद्देश्य से BNS में कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं।

BNS की धारा 302 इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण धारा है, जो किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझकर शब्द, संकेत या कृत्य करने से संबंधित अपराध को परिभाषित करती है।


∆धारा 302 का मूल भाषा में प्रावधान (Bare Act Text) :- 

 ( किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि )

जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।


🔷 BNS की धारा 302 क्या है? :- 

BNS की धारा 302 के अनुसार:

यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर (विमर्शित आशय से)
किसी अन्य व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से शब्द उच्चारित करता है, संकेत करता है, दृश्य प्रस्तुत करता है या कोई कृत्य करता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत अपराधी माना जाएगा।

सरल शब्दों में —
👉 जानबूझकर किसी धर्म, आस्था या धार्मिक विश्वास का अपमान करना = धारा 302 BNS


🔷 “विमर्शित आशय” का कानूनी अर्थ :- 

इस धारा में विमर्शित आशय (Deliberate Intention) सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।

इसका अर्थ है:

● अपराध अनजाने में नहीं हुआ हो

● आरोपी का स्पष्ट उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना हो

● शब्द या कृत्य सोच-समझकर किया गया हो

● यदि आशय सिद्ध नहीं होता, तो धारा 302 लागू नहीं होगी।


📍 1. BNS धारा 302 — क्या है? :- 

BNS की धारा 302 हत्या या किसी का जान ले लेना का अपराध नहीं है। दरअसल, इस धारा में अपराध धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित आपराधिक कृत्यों को कवर किया जाता है।

💡 सरल शब्दों में — धारा 302 BNS वह अपराध परिभाषित करती है जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर धार्मिक भावनाओं (religious feelings) को ठेस पहुँचाने के लिए शब्द, संकेत या व्यवहार करता है, जिससे किसी व्यक्ति के धार्मिक भावनाओं को आहत किया जाए। 

उदाहरण:- 
➡️ किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वासों को जानबूझकर ठेस पहुँचाने वाले शब्द बोलना।

➡️ किसी धार्मिक समारोह में अपमानजनक व्यवहार करना।

➡️ धार्मिक प्रतीक / वस्तु को जानबूझकर अपमानित करना। 

✍️ ध्यान दें: यह अपराध हत्या, अपहरण, या बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों से बिल्कुल अलग है — यह धार्मिक भावनाओं के प्रति जानबूझकर अपमान के मामले तक सीमित है। 


🔷 धारा 302 के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients) :- 

धारा 302 लागू होने के लिए निम्न तत्वों का होना आवश्यक है:

● शब्द, संकेत, दृश्य या कृत्य का प्रयोग

● धार्मिक भावनाओं से संबंधित विषय

● किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचना

● विमर्शित एवं जानबूझकर किया गया कृत्य

● इन सभी का प्रमाण होना आवश्यक है।


📍 BNS में हत्या के प्रावधान का सार (धारा 101-103) :- 

BNS के तहत हत्या के अपराध और सजा के लिए प्रमुख धाराएँ :- 

🟥 धारा 101 — Murder (हत्या) की परिभाषा

🟦 धारा 102 — Culpable homicide not amounting to murder

🟩 धारा 103 — Punishment for Murder (जहाँ मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकता है) 

📌 ध्यान दें:- 
यहाँ धारा 103 BNS के तहत हत्या को दंडित किया जाता है — IPC के पुराने ढांचे की तरह। 


📍 क्यों हुआ बदलाव? — IPC से BNS तक :- 

पूर्व Indian Penal Code (IPC) 1860 में धारा 302 हत्या को निर्दिष्ट करती थी।
लेकिन भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023/ के लागू होने के बाद:

✅ IPC धारा 302 हत्या के अपराध का स्थान BNS धारा 103 ने ले लिया है।

✅ BNS धारा 302 हत्या नहीं है — यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने के अपराध में आता है।  

👉 यह नया क्रम नए भारतीय औपचारिक कानूनों के तहत लागू हुआ है ताकि पुराने IPC के खंडों को आधुनिक रूप में व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके।


🔷 :-  धारा 302 के अंतर्गत आने वाले कृत्य :- 

निम्नलिखित कार्य धारा 302 के अंतर्गत आ सकते हैं:

● किसी धर्म के विरुद्ध अपमानजनक शब्द बोलना

● धार्मिक प्रतीकों का जानबूझकर अपमान करना

● सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाली पोस्ट

● धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी

● धार्मिक सभा या अनुष्ठान में अपमानजनक व्यवहार


🔷 क्या हर आलोचना अपराध है? :-

❌ नहीं

निम्न स्थितियों में धारा 302 लागू नहीं होती:

◆ शैक्षणिक या ऐतिहासिक चर्चा

◆ सद्भावना में की गई आलोचना

◆ अनजाने में कही गई बात

◆ बिना आपराधिक आशय का कथन

👉 अपराध तभी बनेगा जब आशय जानबूझकर हो।


🔷 धारा 302 के अंतर्गत सजा (Punishment) :- 

BNS की धारा 302 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर:

 सजा:- 1 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता किया जा सकता हैं।

सजा का निर्धारण अपराध की गंभीरता और प्रभाव के आधार पर किया जाता है।


🔷 क्या धारा 302 जमानती है? :- 

■ यह अपराध सामान्यतः जमानती होता है

■ पुलिस मामले की प्रकृति के अनुसार कार्यवाही करती है

■ अदालत परिस्थितियों को देखकर जमानत देती है


🔷 धारा 302 का उद्देश्य :- 

इस धारा का मुख्य उद्देश्य है:

★ धार्मिक सौहार्द बनाए रखना

★ समाज में शांति और सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना

★ धार्मिक घृणा और वैमनस्य को रोकना

★ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी में संतुलन


🔷 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) :- 

Q1.❓ क्या सोशल मीडिया पोस्ट पर धारा 302 लग सकती है?
Ans :- हाँ, यदि पोस्ट जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती है।

Q2.❓ क्या माफी से केस खत्म हो सकता है?
Ans :- यह कोर्ट और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

Q3.❓ क्या यह संज्ञेय अपराध है?
Ans :- परिस्थितियों के अनुसार हो सकता है।


📌 संक्षेप में उत्तर :- 

✔️ BNS धारा 302 हत्या का प्रावधान नहीं है।
✔️ यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने के अपराध से संबंधित है। 
✔️ हत्या/मर्डर का प्रावधान BNS में धारा 103 में है।  
✔️ पुराने IPC के 302 को अब BNS में नया क्रम/धारा 103 ने लिया है।


🔷 निष्कर्ष (Conclusion)/ सारांश :- 

BNS की धारा 302 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले जानबूझकर किए गए कृत्यों को रोकने के लिए बनाई गई है। यह धारा समाज में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन दूसरों की आस्था का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।


(IPC) की धारा 298 को (BNS) की धारा 302 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

(IPC) की धारा 298 को (BNS) की धारा 302 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है




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