🔴 BNS 2023 की धारा 306: लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में संपत्ति की चोरी – पूर्ण कानूनी लेख
🔷 प्रस्तावना:-
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS 2023) के अंतर्गत धारा 306 एक विशेष प्रकार की चोरी से संबंधित है। यह धारा उन मामलों को कंट्रोल करती है जहाँ लिपिक (Clerk) या सेवक (Servant) अपने स्वामी या मालिक के कब्जे में मौजूद संपत्ति की चोरी करता है। यह अपराध सामान्य चोरी से अधिक गंभीर माना जाता है क्योंकि इसमें विश्वास (Trust) का दुरुपयोग शामिल होता है।
🛑 पूरे आर्टिकल का मूल प्रावधान (Bare Act Text) :-
( लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में संपत्ति की चोरी )
जो कोई लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक की हैसियत में नियोजित होते हुए, अपने मालिक या नियोक्ता के कब्जे की किसी संपत्ति की चोरी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
🔵 BNS 2023 की धारा 306 क्या है? :-
BNS की धारा 306 के अनुसार, यदि कोई लिपिक या सेवक, जो अपने स्वामी या मालिक की सेवा में है, और जिसे उसके कार्य के कारण स्वामी की संपत्ति तक पहुँच प्राप्त है, उस संपत्ति की चोरी करता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत दंडनीय अपराध करता है।
यह सेक्शन उन स्थितियों पर लागू होता है जहाँ प्रॉपर्टी मालिक के कब्ज़े में होती है, लेकिन कोई नौकर या क्लर्क अपने काम की वजह से उस पर कंट्रोल या एक्सेस हासिल कर लेता है।
⚫ धारा 306 के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients) :-
धारा 306 के अंतर्गत अपराध सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:
🔸अभियुक्त का लिपिक या सेवक होना
🔸अभियुक्त का स्वामी या नियोक्ता की सेवा में होना
🔸संपत्ति का स्वामी के कब्जे में होना
🔸अभियुक्त को कार्य के कारण संपत्ति तक पहुँच प्राप्त होना
🔸संपत्ति की बेईमानी से चोरी किया जाना
अगर इनमें से कोई भी एलिमेंट मौजूद नहीं है, तो सेक्शन 306 लागू नहीं होगा।
🔴 लिपिक और सेवक का अर्थ :-
लिपिक (Clerk) वह व्यक्ति होता है जो कार्यालय, संस्था या व्यवसाय में लेखा, अभिलेख या प्रशासनिक कार्य करता है।
सेवक (Servant) वह व्यक्ति होता है जो किसी अन्य व्यक्ति के अधीन रहकर वेतन या पारिश्रमिक पर कार्य करता है, चाहे वह घरेलू सेवक हो या व्यावसायिक।
BNS 2023 में, इन शब्दों की व्याख्या व्यापक रखी गई है ताकि अपराधी तकनीकी आधार पर सज़ा से बच न सकें।
🔘 सामान्य चोरी और धारा 306 में अंतर :-
धारा 306 को सामान्य चोरी से अलग इसलिए माना गया है क्योंकि:
🔹इसमें विश्वास का उल्लंघन शामिल होता है
🔹सेवक या लिपिक को विशेष पहुँच प्राप्त होती है
🔹अपराध स्वामी की निर्भरता का दुरुपयोग करके किया जाता है
इसी वजह से इस अपराध के लिए कड़ी सज़ा तय की गई है।
🔴 सजा का प्रावधान :-
BNS 2023 की धारा 306 के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर:
सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता किया जा सकता हैं।
सज़ा अपराध की गंभीरता, चोरी की गई संपत्ति की कीमत और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
🔵 धारा 306: शमनीय या अशमनीय? :-
BNS की धारा 306 के अंतर्गत अपराध शमनीय (Compoundable) है।
अर्थात:
पक्षकारों के आपसी समझौते से मामला समाप्त नहीं किया जा सकता
न्यायालय की अनुमति से सामान्यतः समझौता स्वीकार किया जा सकता हैं।
यह अपराध कोर्ट की इजाज़त से पीड़ित व्यक्ति (चोरी की गई संपत्ति का मालिक) द्वारा समझौता करने योग्य है।
⚫ जमानत से संबंधित प्रावधान :-
धारा 306 के अंतर्गत अपराध:
◾सामान्यतः अजमानतीय प्रकृति का माना जाता है
◾जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है
◾अभियुक्त की भूमिका, साक्ष्य और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा जाता है
🔷 न्यायालयों का दृष्टिकोण :-
न्यायालयों ने यह स्पष्ट किया है कि:
🔺केवल सेवक होना पर्याप्त नहीं
🔺चोरी का स्पष्ट और ठोस प्रमाण होना आवश्यक है
🔺बेईमानी का आशय (Dishonest Intention) सिद्ध होना चाहिए
अगर शक का फायदा आरोपी को मिलता है, तो उसे बरी किया जा सकता है।
💠 धारा 306 का सामाजिक और व्यावसायिक महत्व :-
यह धारा:
🔻नियोक्ता और कर्मचारी के बीच विश्वास की रक्षा करती है
🔻कार्यस्थलों पर अनुशासन बनाए रखने में सहायक है
🔻सेवकों द्वारा की जाने वाली आर्थिक अनियमितताओं पर रोक लगाती है
🔻इससे व्यापार और संस्थानों में सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
🔳 Case Law शैली में उदाहरण (न्यायिक दृष्टांत) :-
🔹उदाहरण 1: कैशियर द्वारा नकद की चोरी
एक निजी कंपनी में कार्यरत कैशियर को प्रतिदिन नकद राशि संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में पाया गया कि उसने स्वामी के कब्जे में रखी गई नकद राशि में से कुछ रकम चुपचाप निकाल ली।
न्यायालय ने यह माना कि अभियुक्त एक सेवक था, उसे कार्य के कारण संपत्ति तक विशेष पहुँच प्राप्त थी और चोरी का कृत्य बेईमानी के आशय से किया गया। अतः यह मामला BNS 2023 की धारा 306 के अंतर्गत सिद्ध हुआ।
🔹उदाहरण 2: गोदाम प्रभारी द्वारा माल की चोरी
एक व्यापारी के गोदाम में नियुक्त प्रभारी ने स्टॉक रजिस्टर में हेराफेरी कर स्वामी के माल को बाहर बेच दिया।
न्यायालय ने कहा कि संपत्ति स्वामी के कब्जे में थी, किंतु सेवक ने अपने पद का दुरुपयोग कर चोरी की। यह सामान्य चोरी नहीं बल्कि विश्वास भंग के साथ चोरी है, इसलिए धारा 306 लागू की गई।
🔹उदाहरण 3: घरेलू सेवक द्वारा आभूषण चोरी
एक घरेलू सेवक को घर में कार्य करने के कारण अलमारी तक नियमित पहुँच थी। उसने अवसर पाकर स्वामी के आभूषण चुरा लिए।
न्यायालय ने माना कि सेवक को मिली सुविधा का दुरुपयोग हुआ है और चोरी सीधे स्वामी के कब्जे से हुई है। ऐसे में अपराध BNS धारा 306 के अंतर्गत आएगा।
🔹उदाहरण 4: आरोप सिद्ध न होने का मामला
एक कार्यालय सहायक पर आरोप लगाया गया कि उसने फाइल के साथ रखी राशि चुरा ली। किंतु अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर पाया कि चोरी वास्तव में उसी ने की या उसके पास उस समय राशि तक विशेष पहुँच थी।
न्यायालय ने संदेह का लाभ अभियुक्त को देते हुए कहा कि धारा 306 के आवश्यक तत्व सिद्ध नहीं हुए, इसलिए दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
🔷 निष्कर्ष :-
BNS 2023 की धारा 306 लिपिक या सेवक द्वारा की गई चोरी से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह धारा स्पष्ट रूप से बताती है कि सेवा के दौरान प्राप्त विश्वास का दुरुपयोग कर संपत्ति की चोरी करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
यह प्रावधान न केवल स्वामियों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि कार्यस्थलों पर ईमानदारी और जवाबदेही को भी बढ़ावा देता है।
(IPC) की धारा 381 को (BNS) की धारा 306 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

