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BNS की धारा 308 (उद्दापन) क्या है? सजा, उदाहरण और कानूनी विश्लेषण

BNS की धारा 308 (उद्दापन) क्या है? सजा, उदाहरण और कानूनी विश्लेषण
काल्पनिक चित्र 

BNS की धारा 308 (उद्दापन) – परिभाषा, तत्व, सजा, उदाहरण, केस लॉ और FAQs -

1️⃣ भूमिका :- 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) ने आपराधिक कानूनों को आधुनिक सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप पुनर्गठित किया है। इस संहिता में संपत्ति के विरुद्ध अपराधों को स्पष्ट, सरल और प्रभावी ढंग से परिभाषित किया गया है। BNS की धारा 308 विशेष रूप से “उद्दापन (Extortion)” से संबंधित है। यह धारा उन स्थितियों को कवर करती है, जहां किसी व्यक्ति को भय में डालकर उससे संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा प्राप्त की जाती है।

आज के डिजिटल युग में ब्लैकमेलिंग, धमकी, डराकर पैसे या संपत्ति लेना आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए BNS की धारा 308 एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है।



2️⃣ धारा 308 का पूरा टेक्स्ट (Bare Act)


“उद्दापन (Extortion)” 


(1) जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के भय में जानबूझकर डालता है, और तद्वारा इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज, जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके, किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करता है, वह "उद्दापन" करता है।

उदाहरण :- (क) जगदीश यह धमकी देता है कि यदि सोहन ने उसको धन नहीं दिया, तो वह सोहन के बारे में मानहानिकारक अपमानलेख प्रकाशित करेगा। अपने को धन देने के लिए वह इस प्रकार सोहन को उत्प्रेरित करता है। जगदीश ने उद्दापन किया है।

(ख) राजू, जगदीश को यह धमकी देता है कि यदि राजू को कुछ धन देने के सम्बन्ध में अपने आपको आबद्ध करने वाला एक वचन-पत्र हस्ताक्षरित करके राजू को परिदत्त नहीं कर देता, तो वह जगदीश के बालक को सदोष परिरोध में रखेगा। जगदीश वचन-पत्र हस्ताक्षरित करके राजू को परिदत्त कर देता है। राजू ने उद्दापन किया है।

(ग) श्याम यह धमकी देता है कि यदि मोहन, राजू को कुछ उपज परिदत्त कराने के लिए शास्तियुक्त बन्धपत्र हस्ताक्षरित नहीं करेगा और राजू को न देगा, तो वह मोहन के खेत को जोत डालने के लिए लठैत भेज देगा और तद्द्वारा मोहन को वह बन्ध-पत्र हस्ताक्षरित करने के लिए और परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है। श्याम ने उद्दापन किया है।

(घ) राजू, श्याम को घोर उपहति करने के भय में डालकर बेईमानी से श्याम को उत्प्रेरित करता है कि वह एक कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर दे या अपनी मुद्रा लगा दे और उसे राजू को परिदत्त कर दे। श्याम उस कागज पर हस्ताक्षर करके उसे राजू को परिदत्त कर देता है। यहां, इस प्रकार हस्ताक्षरित कागज मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, इसलिए राजू ने उद्दापन किया है।

(ङ) सोहन, राजू को किसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति के माध्यम से यह संदेश भेजकर धमकी देता है कि "तुम्हारा बच्चा मेरे कब्जे में है और उसे मार दिया जाएगा यदि तुम मुझे एक लाख रुपए नहीं देते हो।" सोहन इस प्रकार राजू को उसे पैसे देने के लिए उत्प्रेरित करता है। सोहन ने "उद्दापन" किया है।

(2) जो कोई उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(3) जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को किसी क्षति के पहुंचाने के भय में डालेगा या भय में डालने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(4) जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालेगा या भय में डालने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

(5) जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

(6) जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को, स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने का भय दिखलाएगा या यह भय दिखलाने का प्रयत्न करेगा कि उसने ऐसा अपराध किया है या करने का प्रयत्न किया है, जो मृत्यु से या आजीवन कारावास से, या दस वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

(7) जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने के भय में डालकर कि उसने कोई ऐसा अपराध किया है, या करने का प्रयत्न किया है, जो मृत्यु से या आजीवन कारावास से या ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय है, अथवा यह कि उसने किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा अपराध करने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न किया है, उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।



3️⃣ धारा 308 BNS क्या है? (उद्दापन की परिभाषा) -

BNS की धारा 308 के अनुसार—

यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को किसी प्रकार की हानि (चोट, मानहानि, संपत्ति की हानि आदि) के भय में डालकर, बेईमानी से उससे कोई संपत्ति, धन या मूल्यवान सुरक्षा दिलवाता है, तो वह उद्दापन (Extortion) का अपराध करता है।

सरल शब्दों में, डर दिखाकर या धमकी देकर कुछ प्राप्त करना ही उद्दापन है।



 4️⃣ उद्दापन के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients of Extortion) - 

किसी भी कार्य को BNS की धारा 308 के अंतर्गत अपराध सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है—

1. भय उत्पन्न करना
अपराधी द्वारा पीड़ित के मन में किसी प्रकार की हानि का डर पैदा किया जाना चाहिए, जैसे—

• शारीरिक चोट का भय

• संपत्ति के नुकसान का भय

• मानहानि या सामाजिक बदनामी का भय

2. भय के कारण सहमति
पीड़ित व्यक्ति उसी डर के कारण संपत्ति देने या हस्तांतरित करने के लिए सहमत होता है।

3. बेईमानी की मंशा
अपराधी की मंशा बेईमान (Dishonest Intention) होनी चाहिए।

4. संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा
• डर के परिणामस्वरूप—

• धन

• चल/अचल संपत्ति

•दस्तावेज़ या मूल्यवान सुरक्षा अपराधी को प्राप्त होती है।



5️⃣ उद्दापन और चोरी में अंतर - 

बिंदुउद्दापन (Extortion)चोरी (Theft)
सहमतिभय के कारण दी गई सहमति होती हैसहमति बिल्कुल नहीं होती
तरीकाधमकी/डर दिखाकरगुप्त या बलपूर्वक उठा लेना
भय/दबावअनिवार्य तत्वआवश्यक नहीं
पीड़ित की भूमिकाडर के कारण स्वयं देता हैपीड़ित को पता भी नहीं हो सकता
अपराध का स्वरूपमानसिक दबाव प्रमुखशारीरिक/गुप्त कृत्य प्रमुख



6️⃣ उद्दापन के उदाहरण (Illustrations) - 

उदाहरण 1
मोहन, राजू को धमकी देता है कि यदि उसने ₹50,000 नहीं दिए तो वह उसके निजी फोटो सोशल मीडिया पर डाल देगा। डर के कारण राजू पैसे दे देता है। यह उद्दापन है।

उदाहरण 2
एक व्यक्ति किसी व्यापारी को धमकाता है कि यदि उसने हर महीने वसूली रकम नहीं दी तो उसकी दुकान को नुकसान पहुँचाया जाएगा। व्यापारी डर कर पैसा देता है। यह धारा 308 के अंतर्गत अपराध है।



7️⃣ डिजिटल युग में उद्दापन - 

आजकल उद्दापन केवल आमने-सामने नहीं बल्कि—

• सोशल मीडिया ब्लैकमेल

• कॉल रिकॉर्डिंग से धमकी

• फर्जी मुकदमे की धमकी

• साइबर एक्सटॉर्शन

के रूप में भी सामने आ रहा है। ऐसे सभी मामलों में यदि भय दिखाकर लाभ प्राप्त किया गया है, तो BNS धारा 308 लागू होती है।



8️⃣ सजा का प्रावधान (Punishment under BNS Section 308) - 

BNS की धारा 308 के अंतर्गत—

उपधारा :- (2) सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


उपधारा :- (3) सजा:- 2 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय 

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


उपधारा :- (4) सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


उपधारा :- (5) सजा:- 10 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


उपधारा :- (6) सजा:- 10 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


उपधारा :- (7) सजा:- 10 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।


सजा की अवधि अपराध की प्रकृति, भय की गंभीरता और प्राप्त संपत्ति के मूल्य पर निर्भर करती है।

⚖️ यदि उद्दापन के दौरान मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी गई हो, तो कठोर दंड का प्रावधान लागू हो सकता है।



9️⃣ क्या उद्दापन संज्ञेय और जमानती अपराध है? - 

संज्ञेय अपराध – पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है

जमानत – मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है

विचारणीय – सामान्यतः प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा



🔟 उद्दापन में प्रयुक्त “हानि” का अर्थ - 

BNS में “हानि” का अर्थ केवल शारीरिक नुकसान नहीं है, बल्कि—

• आर्थिक नुकसान

• सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस

• मानसिक उत्पीड़न

• कानूनी परेशानी की धमकी

भी इसके अंतर्गत आती है।



1️⃣1️⃣ केस लॉ उदाहरण (Case Law Illustration) -

तथ्य (Facts)
अभियुक्त ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने पैसा नहीं दिया तो वह उसके खिलाफ झूठा केस दर्ज कराएगा।

मुद्दा (Issue)
क्या झूठे मुकदमे में फसाने की धमकी उद्दापन मानी जाएगी?

निर्णय (Held)
कोर्ट ने माना कि कानूनी परेशानी का डर भी “हानि” है, अतः यह कृत्य उद्दापन (BNS 308) के अंतर्गत आता है।



1️⃣2️⃣ उद्दापन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु - 

• डर वास्तविक होना आवश्यक नहीं, पीड़ित के मन में डर होना काफी है

• धमकी मौखिक, लिखित या डिजिटल किसी भी रूप में हो सकती है

• संपत्ति तुरंत मिलना आवश्यक नहीं, भविष्य में दिलवाने की सहमति भी पर्याप्त है



1️⃣3️⃣ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) - 

Q1. BNS की धारा 308 किससे संबंधित है?
Ans :- 👉 यह उद्दापन (Extortion) से संबंधित है।

Q2. क्या ब्लैकमेलिंग उद्दापन है?
Ans :- 👉 हां, यदि ब्लैकमेलिंग द्वारा डराकर लाभ लिया गया है।

Q3. क्या धमकी लिखित होना जरूरी है?
Ans :- 👉 नहीं, मौखिक धमकी भी पर्याप्त है।

Q4. क्या सोशल मीडिया पर धमकी भी धारा 308 में आएगी?
Ans :- 👉 हां, साइबर एक्सटॉर्शन भी इसके अंतर्गत आता है।

Q5. उद्दापन और डकैती में अंतर क्या है?
Ans :- 👉 उद्दापन में भय दिखाकर सहमति ली जाती है, जबकि डकैती में बल प्रयोग होता है।



1️⃣4️⃣ निष्कर्ष (Conclusion) - 

BNS की धारा 308 (उद्दापन) समाज में बढ़ते ब्लैकमेल, धमकी और जबरन वसूली जैसे अपराधों पर नियंत्रण के लिए एक सशक्त कानूनी प्रावधान है। यह न केवल पीड़ित के अधिकारों की रक्षा करता है बल्कि अपराधियों के लिए कठोर संदेश भी देता है। आज के डिजिटल और सामाजिक परिवेश में इस धारा की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।



अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है





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