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BNS की धारा 309 क्या है? | लूट की परिभाषा, सजा, जमानत व कानूनी विश्लेषण

BNS की धारा 309 क्या है? | लूट की परिभाषा, सजा, जमानत व कानूनी विश्लेषण
काल्पनिक चित्र 


BNS की धारा 309 – लूट का अपराध एवं विभिन्न प्रकार की सजा


📕 प्रस्तावना

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) भारत की नई आपराधिक कानून संहिता है, जिसने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) का स्थान लिया है। BNS का उद्देश्य अपराधों की स्पष्ट परिभाषा, अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा और पीड़ितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इसी क्रम में BNS की धारा 309 को लूट (Robbery) जैसे गंभीर और हिंसक अपराध के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। यह धारा केवल लूट की परिभाषा नहीं देती, बल्कि लूट की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रकार की सजाओं का भी प्रावधान करती है।


🔴 पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):- 


 लूट /Robbery

(1) सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है।

(2) चोरी "लूट" है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा या किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उपहति या उसको सदोष अवरोध या तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल सदोष अवरोध का भय कारित करता है या कारित करने का प्रयत्न करता है।

(3) उद्दापन "लूट" है, यदि अपराधी वह उद्दापन करते समय भय में डाले गए व्यक्ति की उपस्थिति में है, और उस व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की तत्काल मृत्यु या तत्काल उपहति या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर वह उद्दापन करता है और इस प्रकार भय में डालकर इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को उद्दापन की जाने वाली चीज उसी समय और वहां ही परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है।

व्याख्या :- अपराधी का उपस्थित होना कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति को तत्काल मृत्यु के, तत्काल उपहति के, या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालने के लिए पर्याप्त रूप से निकट हो।

उदाहरण :- (क) गोविंद, कल्लू को दबोच लेता है, और कल्लू के कपड़े में से कल्लू का धन और आभूषण कल्लू की सम्मति के बिना कपटपूर्वक निकाल लेता है। यहां, गोविंद ने चोरी की है और वह चोरी करने के लिए स्वेच्छया कल्लू का सदोष अवरोध कारित करता है। इसलिए गोविंद ने लूट की है।

(ख) जगदीश, गोविंद को राजमार्ग पर मिलता है, एक पिस्तौल दिखलाता है और गोविंद की थैली मांगता है। परिणामस्वरूप गोविंद अपनी थैली दे देता है। यहां, जगदीश ने गोविंद को तत्काल उपहति का भय दिखलाकर थैली उद्दापित की है और उद्दापन करते समय वह उसकी उपस्थिति में है। अतः जगदीश ने लूट की है।

(ग) राजू राजमार्ग पर जगदीश और जगदीश के बालक से मिलता है। राजू उस बालक को पकड़ लेता है और यह धमकी देता है कि यदि जगदीश उसको अपनी थैली नहीं परिदत्त कर देता, तो वह उस बालक को कगार से नीचे फेंक देगा। परिणामस्वरूप जगदीश अपनी थैली परिदत्त कर देता है। यहां, राजू ने जगदीश को यह भय कारित करके कि वह उस बालक को, जो वहां उपस्थित है, तत्काल उपहति करेगा, जगदीश से उसकी थैली उद्दापित की है। इसलिए राजू ने जगदीश को लूटा है।

(घ) सोहन, श्याम से यह कहकर, संपत्ति अभिप्राप्त करता है कि "तुम्हारा बालक मेरी टोली के हाथों में है, यदि तुम हमारे पास दस हजार रुपया नहीं भेज दोगे, तो वह मार डाला जाएगा।" यह उद्दापन है, और इसी रूप में दण्डनीय है, किन्तु यह लूट नहीं है, जब तक कि श्याम को उसके बालक की तत्काल मृत्यु के भय में न डाला जाए।

(4) जो कोई लूट करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाए, तो कारावास चौदह वर्ष तक का हो सकेगा।

(5) जो कोई लूट करने का प्रयत्न करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

(6) यदि कोई व्यक्ति लूट करने में या लूट का प्रयत्न करने में स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, तो ऐसा व्यक्ति और जो कोई अन्य व्यक्ति ऐसी लूट करने में, या लूट का प्रयत्न करने में संयुक्त तौर पर संपृक्त होगा, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक को हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।



✍️ लूट का अर्थ (Meaning of Robbery under BNS)

जब कोई व्यक्ति चोरी या जबरन वसूली करते समय या उसके प्रयास में—

• मृत्यु का भय उत्पन्न करता है,

• किसी को चोट पहुँचाता है या चोट का भय दिखाता है,

• किसी व्यक्ति को अवरोध में डालता है,
तो वह अपराध लूट कहलाता है।

• लूट में हिंसा और भय का तत्व अनिवार्य होता है, यही इसे साधारण चोरी से अलग बनाता है।



🧑‍✈️ पुलिस कार्यवाही की प्रक्रिया

•FIR दर्ज

•आरोपी की गिरफ्तारी

•जांच और साक्ष्य संकलन

•चार्जशीट

•न्यायालय में विचारण



🔴 क्या BNS की धारा 309 संज्ञेय अपराध है?

✔️ हाँ, लूट एक संज्ञेय अपराध है।
पुलिस बिना न्यायालय की अनुमति के FIR दर्ज कर सकती है और गिरफ्तारी कर सकती है।



⚖️ सजा का सार (तालिका)

परिस्थितिसजा
सामान्य लूट10 वर्ष तक
रात्रि में लूट14 वर्ष तक
हाईवे पर लूट14 वर्ष तक
मृत्यु/गंभीर चोटआजीवन कारावास
हथियार से लूटकठोर कारावास + जुर्माना



💠 चोरी, लूट और डकैती में अंतर

लूट: एक व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध

डकैती: पाँच या अधिक व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से की गई लूट

अपराधविशेषता
चोरीबिना हिंसा
लूटहिंसा या भय के साथ
डकैतीपाँच या अधिक व्यक्तियों द्वारा लूट



🛞 BNS की धारा 309 का उद्देश्य

•आम नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा

•हिंसक अपराधों पर कठोर नियंत्रण

•सार्वजनिक स्थानों पर भयमुक्त वातावरण

•अपराध के अनुसार अनुपातिक सजा



⚓ BNS की धारा 309 में सजा के प्रकार

BNS की धारा 309 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें एक समान सजा नहीं, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार अलग सजा का प्रावधान है।

उपधारा :- (4) भाग - (1) -  सजा:- 10 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।



उपधारा :- (4) भाग - (2) -  सजा:- 14 वर्ष के लिए कठोर कारावास

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।



उपधारा :- (5) सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।



उपधारा :- (6) सजा:- आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।



🌍 BNS की धारा 309 में सजा के प्रकार

1️⃣ सामान्य लूट की सजा

यदि कोई व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में लूट करता है, अर्थात—

बिना विशेष स्थान या समय के,

साधारण हिंसा या भय के साथ,

सजा:

कठोर कारावास 10 वर्ष तक

जुर्माना भी लगाया जा सकता है

👉 यह धारा 309 के अंतर्गत आधारभूत (Base Punishment) है।



2️⃣ सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच की गई लूट

यदि लूट—

रात के समय (सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले) की गई हो,

सजा:

कठोर कारावास 14 वर्ष तक

जुर्माना

👉 रात्रि में अपराध होने से समाज में अधिक भय फैलता है, इसलिए सजा बढ़ाई गई है।



3️⃣ राजमार्ग या सार्वजनिक मार्ग पर की गई लूट

यदि लूट—

किसी हाईवे, सड़क या सार्वजनिक मार्ग पर की गई हो,

सजा:

कठोर कारावास 14 वर्ष तक

जुर्माना

👉 यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा के लिए यह प्रावधान किया गया है।



4️⃣ लूट के दौरान गंभीर चोट या मृत्यु

यदि लूट करते समय—

किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, या

गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाई जाती है,

सजा:

आजीवन कारावास,
या

कठोर कारावास (दीर्घ अवधि)

जुर्माना

👉 यह लूट की सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है।



5️⃣ हथियार के प्रयोग से की गई लूट

यदि लूट—

चाकू, बंदूक, या किसी अन्य घातक हथियार के प्रयोग से की गई हो,

सजा:

कठोर कारावास (अधिक अवधि)

भारी जुर्माना

👉 हथियार का प्रयोग अपराध को और भी खतरनाक बना देता है।



🙎 अपराध की प्रकृति

✔️ संज्ञेय अपराध

❌ गैर-जमानती

❌ असमझौता योग्य

✔️ सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय



🛂 उदाहरण द्वारा समझना

उदाहरण 1

दिन में चाकू दिखाकर मोबाइल छीनना → सामान्य लूट

उदाहरण 2

रात में बस यात्रियों से लूट → 14 वर्ष तक सजा

उदाहरण 3

लूट के दौरान व्यक्ति की मृत्यु → आजीवन कारावास



🧑‍✈️ केस लॉ शैली उदाहरण (Facts–Issue–Held)


Facts:
आरोपी ने रात में हाईवे पर ट्रक चालक को पीटकर पैसे और वाहन छीन लिया।

Issue:
क्या यह सामान्य लूट है?

Held:
न्यायालय ने माना कि यह रात्रि + राजमार्ग पर लूट है, इसलिए धारा 309 के तहत 14 वर्ष तक कठोर कारावास लागू होगा।



✒️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या बिना हथियार लूट हो सकती है?
उत्तर: हाँ, यदि हिंसा या मृत्यु का भय है।

प्रश्न 2: क्या लूट जमानती अपराध है?
उत्तर: नहीं, यह गैर-जमानती अपराध है।

प्रश्न 3: क्या लूट में समझौता हो सकता है?
उत्तर: नहीं, यह असमझौता योग्य अपराध है।

प्रश्न 4: क्या हर लूट में 14 साल की सजा होती है?
उत्तर: नहीं, केवल विशेष परिस्थितियों में।


🔷 निष्कर्ष

BNS की धारा 309 लूट जैसे गंभीर अपराध को नियंत्रित करने के लिए एक सशक्त कानूनी प्रावधान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अपराध की गंभीरता, स्थान, समय और तरीके के अनुसार अलग-अलग सजाएँ निर्धारित की गई हैं। इससे कानून अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनता है।




अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है













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