✍️ धारा 310 (BNS) – डकैती (Dacoity): परिभाषा, तत्व, दंड और कानूनी विवेचना
भारत में नया आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) लागू हुआ है। इस संहिता की धारा 310 “डकैती” (Dacoity) को परिभाषित करती है और इसके अंतर्गत आपराधिक दंड, घटक और कानूनी प्रतिक्रिया का विस्तृत वर्णन करती है।
📕 पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):-
“डकैती” (Dacoity)
(1) जबकि पांच या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं या जहां कि वे व्यक्ति, जो संयुक्त होकर लूट करते हैं, या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित हैं और ऐसे लूट के किए जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते हैं, कुल मिलाकर पांच या अधिक हैं, तब प्रत्येक व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है, या उसका प्रयत्न करता है या उसमें मदद करता है, कहा जाता है कि वह "डकैती" करता है।
(2) जो कोई डकैती करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
(3) यदि ऐसे पांच या अधिक व्यक्तियों में से, जो संयुक्त होकर डकैती कर रहे हों, कोई एक व्यक्ति इस प्रकार डकैती करने में हत्या कर देगा, तो उन व्यक्तियों में से प्रत्येक व्यक्ति मृत्यु से, या आजीवन कारावास से, या कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
(4) जो कोई डकैती करने के लिए कोई तैयारी करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
(5) जो कोई डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित पांच या अधिक व्यक्तियों में से एक होगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
(6) जो कोई ऐसे व्यक्तियों की टोली का होगा जो, अभ्यासतः डकैती करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक को हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
1. डकैती – मूल परिभाषा
धारा 310 के अनुसार:
🔹 जब पांच या अधिक व्यक्ति मिलकर किसी चोरी (Robbery) को करते हैं या उसकी कोशिश करते हैं, तो यह “डकैती” कहलाता है।
🔹 इसमें वे आदमी भी शामिल होते हैं जो अपराध में सीधे मदद या साथ में उपस्थित होकर इसे सफल बनाने में सहायता करते हैं।
👇 साधारण शब्दों में:
4 लोग + 1 सहयोगी = डकैती
2 अपराधी + 3 उपस्थित सहयोगी = डकैती
क्योंकि कुल पांच या अधिक आदमी शामिल माने जाते हैं।
यानी सिर्फ क्राइम करने वालों की संख्या ही मायने नहीं रखती —
जो व्यक्ति अपराध को सफल बनाता है या सहायता करता है, वह भी डकैतियो की कुल संख्या में गिना जाता है।
2. 📊 धारा 310 BNS – डकैती: सजा की तालिका (Punishment Table)
| क्रमांक | प्रावधान (Offence) | सज़ा / दंड (Punishment) |
|---|---|---|
| 1 | डकैती करना (जब पाँच या अधिक व्यक्ति robbery में सहभागी हों) | आजीवन कारावास (Life Imprisonment) या 10 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माना |
| 2 | डकैती में हत्या होना (जब किसी ने murdering किया हो) | मृत्युदंड (Death Penalty) या आजीवन कारावास या 10 वर्ष से कम नहीं कठोर कारावास + जुर्माना |
| 3 | डकैती की तैयारी करना (Planning/Preparation) | 10 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माना |
| 4 | पाँच या अधिक लोग डकैती की नीयत से एकत्रित होना | 7 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माना |
| 5 | ऐसे गिरोह का सदस्य होना जो नियमित रूप से डकैती करता है | आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माना |
3. डकैती करने वाले व्यक्तियों के लिए दंड
हर एक उपधारा में दंड का प्रावधान है -
उपधारा :- (2) - सजा:- आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
उपधारा :- (3) - सजा:- मृत्यु, आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
उपधारा :- (4) सजा:- 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
उपधारा :- (5) सजा:- 7 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
उपधारा :- (6) सजा:- आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
4. डकैती और लूट/चोरी में फर्क
🔸 चोरी (Theft) — जब कोई व्यक्ति किसी दूसरी की संपत्ति चुपके से ले लेता है।
🔸 लूट (Robbery) — चोरी में जब व्यक्ति बल, धमकी, हिंसा या डरा-धमका कर संपत्ति लेता है।
🔸 डकैती (Dacoity) — लूट का वह रूप जिसमें कम से कम पाँच व्यक्ति एक साथ मिलकर लूट या चोरी का प्रयास करते हैं।
डकैती को इसलिए अलग माना जाता है क्योंकि यह समूह द्वारा संगठित अपराध होता है और इसके परिणाम अक्सर ज़्यादा खतरनाक और हिंसात्मक होते हैं।
5. धारा 310 के मुख्य तत्व
धारा 310 BNS को समझने के लिए इसके अलग-अलग हिस्सों (sub-sections) को विस्तार से देखें:
(i) डकैती का मूल सिद्धांत
👉 पाँच या अधिक व्यक्ति मिलकर robbery/लूट को अंजाम देते हैं
👉 या robbery में सहयोगी-मदद करने वाले लोग साथ-साथ गिने जाते हैं
👉 ऐसे सभी को “डकैती” के आरोपी माना जाता है
👉 अपराध स्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति दोषी माना जाता है
(ii) डकैती करने वाले व्यक्तियों के लिए दंड
🔹 कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment):
डकैती करने वाले को 10 साल तक का कठोर कारावास या आजीवन कारावास (Life Imprisonment) हो सकता है।
🔹 जुर्माना (Fine):
सजा के साथ आरोपी को जुर्माना भी देना आवश्यक होगा।
इस दंड का मकसद संगठित अपराधियों को कड़ा संदेश देना है कि बड़े-पैमाने पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना बिना बड़ी सज़ा के नहीं होगा।
(iii) डकैती में हत्या होने पर दंड
अगर डकैती करते समय मृत्यु (मर्डर) हो जाती है, तो:
🔸 प्रत्येक आरोपी को
✔ मृत्यु दंड (Death Penalty)
या
✔ आजीवन कारावास
या
✔ 10 वर्ष से कम नहीं की कठोर कारावास
और जुर्माना दिया जा सकता है।
यह बहुत कठोर दंड इसलिए है ताकि अपराधियों को हिंसा-युक्त आपराधिक घटनाओं से रोका जा सके।
(iv) डकैती हेतु तैयारी करने पर दंड
धारा 310 का एक बड़ा हिस्सा यह कहता है कि डकैती को अंजाम देने की तैयारी करना भी अपराध है।
👉 अगर कोई व्यक्ति डकैती के लिए
✔ हथियार खरीदता है
✔ योजना बनाता है
✔ अपराध स्थल की जाँच करता है
✔ कर्मचारियों पर हमला करने की तैयारी करता है
तो भी वह अपराध का सह-दोषी माना जाता है और उसे 10 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माने की सज़ा मिल सकती है।
यह प्रावधान “सक्रीय रोकथाम” (pre-crime prevention) का हिस्सा है ताकि अपराध का सोचना ही भारी दंड के साथ जुड़ा रहे।
(v) डकैती करने हेतु इकट्ठे होने पर दंड
अगर पाँच या अधिक लोग डकैती करने का इरादा लेकर कहीं एकत्रित होते हैं, तो भी वे दंडनीय हैं।
👉 ऐसे व्यक्ति को 7 वर्ष तक की कठोर कारावास + जुर्माना हो सकता है।
यह भाग यह जानता है कि अपराध का इरादा और तैयारी ही समाज में भय फैला सकती है, भले वह लूट न हुई हो।
(vi) गिरोह का सदस्य होने पर दंड
अगर कोई व्यक्ति ऐसे गिरोह (Gang) का हिस्सा है जो लगातार डकैती के लिए बनता है, तो:
🔹 उसे आजीवन कारावास
या
🔹 10 वर्ष तक कठोर कारावास + जुर्माना
की सज़ा मिल सकती है।
यह प्रावधान संगठित अपराधों के नियमित नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास करता है।
6. न्यायिक व्याख्या और उपयोग
🔹 धारा 310 BNS का उपयोग अदालत में डकैती के दोष और सजा दोनों निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
🔹 सभी आरोपियों को समूह के हिस्से के रूप में जवाबदेह माना जाता है, भले किसी ने सीधे ज़मीन पर हिंसा नहीं की हो।
🔹 सहयोग, तैयारी, योजना-बद्ध गतिविधियों को भी इस धारा के दायरे में लिया जाता है।
7. महत्वपूर्ण बिंदु (Key Takeaways)
📌 डकैती केवल चोरी/लूट नहीं — यह समूह द्वारा किया गया संगठित अपराध है।
📌 5 लोगों की उपस्थिति और सहयोग जरूरी है — तथ्य चाहे सीधे न भी दिखे।
📌 हत्या के साथ डकैती → सबसे सख्त दंड।
📌 तैयारी/गिरोह/सहयोग सभी ही दंडनीय।
📌 दोषी को आजीवन कारावास तक की सज़ा मिल सकती है।
8. डकैती की रोकथाम – समाज और पुलिस की भूमिका
डकैती जैसे संगठित अपराध का मुकाबला सिर्फ कानूनी दंड से नहीं होता। इसके लिए:
✔ पुलिस को बेहतर गश्त,
✔ सूचना नेटवर्क,
✔ सीसीटीवी निगरानी,
✔ सुरक्षा जागरूकता,
✔ गिरोह-रोधी अभियान
जैसी पहलों की आवश्यकता है।
🔎 समाज के हर सदस्य की जिम्मेदारी है कि वह संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दे।
9. संक्षिप्त व्याख्या
🔹 डकैती (दक्कैती) में सिर्फ चोरी/लूट नहीं — 5 या उससे अधिक लोगों का समूह, चाहे सीधे लूट में शामिल हों या मदद कर रहे हों, दंडनीय होता है।
🔹 हत्या के साथ डकैती सबसे गंभीर रूप है — जिसमें मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।
🔹 तैयारी/योजना बनाना तथा डकैती के उद्देश्य से इकट्ठा होना भी अपराध है और इसके लिए सज़ा दी जा सकती है।
🔹 गिरोहबद्ध रूप से डकैती करने वाले के लिए भी यही सजा होती है — जो समाज में संगठित अपराध को रोकने का प्रयास है।
10. अंतिम निष्कर्ष
धारा 310 BNS एक बहुत महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो डकैती जैसे संगठित, गंभीर और हिंसात्मक अपराध से निपटने के लिए बनाई गई है। यह न केवल अपराध करने वालों को सजा देती है बल्कि तैयारी, सहयोग और गिरोहबंदी को भी कड़ी सज़ा देती है।
अगर आप वकील, विधि-विद, छात्र या सामान्य नागरिक हैं, तो यह लेख आपको धारा 310 की गहराई से समझ देता है — परिभाषा से लेकर दंड तक, हर पहलू।
(IPC) की धारा 391, 395, 396, 399, 402 को (BNS) की धारा 310 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

