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BNS धारा 311: मौत या गंभीर चोट के प्रयास के साथ लूट/डकैती का अपराध

BNS धारा 311: मौत या गंभीर चोट के प्रयास के साथ लूट/डकैती का अपराध
काल्पनिक चित्र 

धारा 311 – मृत्यु / घोर उपहति के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती (BNS 2023)


📌 परिचय

धारा 311 भारतीय आपराधिक कानून Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) के अध्धाय 17 (Offences against Property) में शामिल एक गंभीर अपराध है। यह धारा उन कृत्यों को दंडित करती है जहाँ लूट (Robbery) या डकैती (Dacoity) के समय अपराधी घातक हथियार का प्रयोग करता है, किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचाता है, या मृत्यु/घोर चोट पहुँचाने का प्रयास करता है। 


मुख्य बात:

➡️ लूट या डकैती का हिंसात्मक रूप, जिसमें मृत्‍यु या गंभीर चोट का प्रयत्न शामिल है, इसे इस धारा के तहत दंडनीय माना गया है। 


📒 पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):- 


( मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती )


"यदि लूट या डकैती करते समय अपराधी किसी घातक आयुध का उपयोग करेगा, या किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा, या किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने या उसे घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह कारावास, जिससे ऐसा अपराधी दण्डित किया जाएगा, सात वर्ष से कम का नहीं होगा।"

इसका अर्थ है कि दोषी को कम से कम सात वर्षों की कारावास कि सज़ा प्राप्त होगी, जिसे कोर्ट परिस्थितियों के हिसाब से और बढ़ा भी सकती है।



 सजा:- 7 वर्ष से अनधिक के लिए कारावास

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।



🧠 कानूनी तत्व (Elements of Offence)

धारा 311 के अपराध को सिद्ध करने के लिए निम्न तत्वों का होना आवश्यक है:

● लूट (Robbery) या डकैती (Dacoity) का होना।

● लूट: किसी की संपत्ति को बल, धमकी या हिंसा से जबरन लेना।

● डकैती: पाँच या अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से लूट करना। 

● अपराधी द्वारा घातक हथियार (Deadly Weapon) का उपयोग या प्रदर्शन।

● घातक हथियार का मतलब गोली, चाकू, लाठियाँ आदि, जो इंसान को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। 

● किसी व्यक्ति को घोर उपहति (Grievous Hurt) का कारण बनाना।

● जैसे गंभीर चोटें, हड्डी टूटना, अंग नष्ट होना आदि। 

मृत्यु या गंभीर चोट पहुँचाने का प्रयत्न (Attempt to cause death/grievous hurt) किया गया हो, भले ही वह सफल ना हुआ हो।



⚖️ सजा और दंड

धारा 311 के अंतर्गत मिलने वाली दंड की प्रमुख विशेषताएँ:

✅ न्यूनतम सजा

दोषी को कम से कम 7 वर्ष की कारावास सजा दी जाएगी।

यह सजा कम से कम है, अर्थात् अदालत परिस्थिति अनुसार ज़्यादा भी बढ़ाकर कर सकती है। 



🛑 अजमानतीय अपराध / (Non-Bailable) Offence

इस अपराध में बेल (जमानत) अधिकार स्वतः नहीं मिलता — यानी दोषी को जमानत अदालत के निर्णय पर निर्भर होती है।  


🚓 संज्ञेय (Cognizable) Offence

पुलिस बिना वॉरंट के भी गिरफ्तारी कर सकती है। 



🧑‍⚖️ ट्रायल कोर्ट

यह मामला आमतौर पर Session Court में सुलझाया जाता है क्योंकि यह एक गंभीर अपराध है। 

💰 जुर्माना (Fine) संभव

कोर्ट आवश्यकतानुसार दोषी को जुर्माना भी लगा सकती है। 



📊 धारा 311 – BNS (Robbery / Dacoity with Attempt to Cause Death or Grievous Hurt) – तालिका


मुख्य भूमिका (Heading)विवरण (Details)
धारा संख्याSection 311 – Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
अपराध का नाम (Offence)Robbery, or Dacoity, with attempt to cause death or grievous hurt
कहां लागू होती हैजब लूट या डकैती के समय अपराधी जानलेवा हथियार का प्रयोग करे, गंभीर चोट पहुँचाए, या मृत्यु/घोर चोट पहुँचाने का प्रयास करे
मुख्य तत्व (Key Ingredients)1. लूट या डकैती का होना2. घातक हथियार का उपयोग3. किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचाना4. मृत्यु/घोर चोट का प्रयत्न होना
दंड (Punishment)कम से कम 7 वर्ष की कारावास (Minimum imprisonment not less than 7 years) 
जुर्माना (Fine)आवश्यकता पड़ने पर फाइन भी लग सकता है (Court may impose fine where applicable) 
बेलेबल / नॉन-बेलेबलNon-bailable offence (आम तौर पर गैर-जमानती) 
संज्ञेय / गैर-संज्ञेयCognizable offence (पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है) 
त्रायल कोर्ट (Trial Court)Session Court में ट्राय किया जाता है (गंभीर अपराध होने के कारण) 
घातक हथियार (Deadly weapon)कोई भी हथियार जो जान को गंभीर चोट पहुँचाने में सक्षम है (जैसे पिस्तौल, चाकू आदि)
Grievous Hurt की परिभाषागंभीर चोट जो व्यक्ति को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है (BNS के सामान्य कानूनी अर्थ के अनुसार)
IPC तुलनात्मक धाराएँBNS 311 ≈ IPC Section 397 (Robbery or Dacoity with attempt to cause death or grievous hurt) 



📘 उदाहरण (Illustrations)

यहाँ कुछ काल्पनिक परिदृश्य हैं जो समझाते हैं कि धारा 311 कैसे लागू होती है:

👉 उदाहरण 1 – घातक हथियार के साथ बैंक लूट

सोहन-  बैंक लूटने की कोशिश करता है और वहाँ वह सुरक्षा गार्ड पर पिस्तौल तान देता है, और गोली चला देता है, जिससे गार्ड गंभीर रूप से घायल होता है।

➡️ यह घटना धारा 311 के अंतर्गत आती है। 


👉 उदाहरण 2 – डकैती में मृत्यु का प्रयत्न

जावेद-  और उसके साथी घर में डकैती करने जाते हैं और जावेद- उस घर के मालिक को चाकू मारने की कोशिश करता है, परन्तु मालिक बच जाता है।

➡️ मृत्यु के प्रयत्न के बावजूद यह धारा 311 के अंतर्गत दंडनीय है। 


📚 क्या ‘प्रयत्न’ शामिल है?

हाँ - धारा 311 न सिर्फ वास्तविक मौत/चोट के लिए बल्कि प्रयास (attempt) के लिए भी पूरी तरह लागू होती है।
यह अच्छा उदाहरण है कि यदि कोई नाकाम रहता है लेकिन मृत्यु/घोर चोट का इरादा दिखाता है, तो आरोपी दोषी होगा। 


⚠️ IPC से तुलना

BNS 311 मूलतः IPC की धारा 397 का नया रूप है।
IPC 397 भी robbery/dacoity के साथ मृत्यु/घोर उपहति के प्रयत्न/प्रयास के मामले में दोषियों के लिए समान दंड प्रदान करता था। 


🧩 कानूनी और सामाजिक महत्व

1. गंभीरता को दर्शाता है – यह धारा अपराध की गंभीरता को समझती है और जो दोषी हिंसा या मृत्यु की धमकी देते हैं, उनके खिलाफ कठोर दंड सुनिश्चित करती है।

2. सामाजिक सुरक्षा – अत्यधिक हिंसक अपराधों पर कड़ी सज़ा देकर समाज को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।

3. डिटेरेंस (Deterrence) – संभावित अपराधियों को गंभीर परिणामों से डराती है।


🧠 निष्कर्ष

धारा 311 BNS एक बलपूर्वक और खतरनाक अपराध को बयान करती है — वह है लूट या डकैती के दौरान जानलेवा हिंसा या गंभीर चोट के प्रयत्न/प्रयास

यह अपराध कम से कम 7 वर्ष की कारावास सज़ा के साथ आता है और क़ानूनी तौर पर बेहद गंभीर माना जाता है।

किसी भी प्रकार की हिंसा या गंभीर/खतरनाक चोट की धमकी के साथ अपराध करना न केवल मानवीय दृष्टि से गलत है, बल्कि यह क़ानून के तहत काफी गंभीर दंड का कारण भी बनता है। 




अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है


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