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BNS धारा 312: घातक हथियार से सुसज्जित होकर डकैती या लूट के प्रयास की सजा |

BNS धारा 312: घातक हथियार से सुसज्जित होकर डकैती या लूट के प्रयास की सजा |
काल्पनिक चित्र 

BNS धारा 312 – विस्तृत व्याख्या (Attempt to Commit Robbery or Dacoity when Armed with Deadly Weapon)


परिचय

भारत में, 1 जुलाई, 2024 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह ले ली। BNS में IPC की कई पुरानी धाराओं को बदले हुए रूप में शामिल किया गया है। इसी संदर्भ में, BNS की धारा 312 संपत्ति के खिलाफ अपराधों से संबंधित है। BNS की धारा 312 लूट या डकैती की कोशिश के दौरान जानलेवा हथियार रखने पर सज़ा का प्रावधान करती है। यह कानून समाज में हिंसा और हथियारों से होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कड़ी सज़ा देता है।


पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):- 

( घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न )

यदि लूट या डकैती करने का प्रयत्न करते समय, अपराधी किसी घातक आयुध से सज्जित होगा, तो वह कारावास, जिससे ऐसा अपराधी दण्डित किया जाएगा, सात वर्ष से कम का नहीं होगा।



BNS धारा 312 स्पष्ट रूप से कहती है:

"अगर, लूट या चोरी की कोशिश के दौरान, अपराधी के पास कोई जानलेवा हथियार होता है, तो उसे कम से कम सात (7) साल की जेल की सज़ा दी जाएगी।"

इसका मतलब है कि यह धारा तब लागू होगी जब कोई व्यक्ति लूट या डकैती जैसा गंभीर अपराध करने की कोशिश करता है, और उस समय उसके पास कोई जानलेवा हथियार होता है।


“घातक हथियार” का अर्थ क्या है?

धारा 312 में उल्लिखित “घातक हथियार” को सरल शब्दों में समझें तो:

✔ ऐसे उपकरण या वस्तुएँ, जिनसे मृत्यु या गंभीर चोट पहुंच सकती है।

✔ उदाहरण: बंदूक, बन्दूक जैसे आग्नेयास्त्र, तेज धार वाले चाकू, धारदार हथियार, भारी घरेलू उपकरण आदि।

✔ यहाँ तक कि कुछ परिस्थितियों में भारी लकड़ी या डंडा भी यदि गंभीर चोट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो उसे घातक हथियार माना जा सकता है।

ध्यान दें कि सभी हथियारों को जानलेवा नहीं माना जाता है। उदाहरण के लिए, एक छोटा चाकू या घर का कोई औजार तभी जानलेवा हथियार माना जाएगा, जब उसका इस्तेमाल गंभीर चोट पहुंचाने या जान लेने के इरादे से किया जाए।



धारा 312 का उद्देश्य (Purpose)

BNS 312 का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

✔ लोग हथियार लेकर अपराध करने का सोच भी न करें या

✔ यदि कोई करना चाहे, तो उसके खिलाफ कठोर सजा उपलब्ध हो जिससे भय पैदा हो।

यह सेक्शन खास तौर पर उन अपराधियों पर लागू होता है जो हत्या या गंभीर चोट की धमकी देकर प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करने की कोशिश करते हैं।

इसका मकसद सिर्फ़ प्रॉपर्टी की रक्षा करना नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक शांति को मज़बूत करना भी है।



धारा 312 का दायरा (Scope & Applicability)

🔸धारा 312 तब लागू होती है जब:

🔸लूट या डकैती का प्रयास किया जा रहा हो।

🔸अपराधी के पास उस समय कोई घातक हथियार मौजूद हो।

🔸अपराधी ने वह हथियार उपयोग करने का इरादा दिखाया हो, या वह ऐसी परिस्थितियों में मौजूद हो कि उसका उपयोग हो सकता है। 

अगर कोई व्यक्ति सिर्फ़ हथियार लेकर जा रहा है, लेकिन उसने लूट या डकैती की कोशिश नहीं की है, तो यह सेक्शन सीधे लागू नहीं होगा। हालांकि, कानून की दूसरी संबंधित धाराओं के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



उपयोग के उदाहरण (Illustrations)

उदाहरण 1: बैंक लूट का प्रयास

▪️राम बैंक लूटने के लिए बंदूक लेकर अंदर जाता है, पर पुलिस आने पर वह भाग जाता है।

इस स्थिति में धारा 312 के तहत राम को अभियुक्त किया जा सकता है क्योंकि वह लूट का प्रयास करते समय घातक हथियार से सुसज्जित था। 

उदाहरण 2: बाजार में डकैती की कोशिश

▪️श्याम बाजार में बड़े चाकू के साथ डकैती की कोशिश करता है। पुलिस पहुंचने से पहले वह भाग जाता है।

यहाँ भी धारा 312 लागू हो सकती है। 

◾उदाहरण 3: हथियार तो है लेकिन इरादा नहीं

▪️यदि व्यक्ति ने हथियार रखा है पर वह केवल हिटलर की प्रतिमा चुराने के लिए वहां गया, लेकिन डकैती का प्रयास न किया, तब धारा 312 स्वयं में लागू नहीं होगी। लेकिन अन्य संबंधित धाराओं में कार्यवाही हो सकती है।



सजा (Punishment) 

धारा 312 के अनुसार:

 सजा:- 7 वर्ष से अनधिक के लिए कारावास

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।

यह सजा न्याय प्रणाली का डर प्रभाव (deterrence) बनाती है ताकि हथियार से लैस अपराधी अपराध करने से पहले फिर से सोचे।


धारा 312 और IPC के बीच तुलना

🔻BNS लागू होने से पहले IPC के तहत सम्पत्ति और हथियार आधारित अपराधों के लिए संबंधित IPC धारा 398 प्रयुक्त होती थी।

🔻नई BNS धारा 312 को अधिक स्पष्ट और आधुनिक भाषा में लिखा गया है, लेकिन मूल उद्देश्य IPC 398 से मिलता-जुलता है। 



कायदे और निष्कर्ष (Legal Significance)

BNS धारा 312 का महत्व इस प्रकार से समझा जा सकता है:

1. सामाजिक सुरक्षा: हथियारबंद अपराध की रोकथाम में मदद करता है।

2. दंड की स्पष्टता: न्यूनतम सजा की आवश्यकता स्पष्ट करती है कि अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा।

3. न्यायिक विवेक: अत्यधिक हिंसात्मक परिस्थितियों में न्यायालय कठोर सजा दे सकता है।

4. कानूनी ढांचा: यह सेक्शन समाज में संपत्ति और इंसानी सुरक्षा की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।



धारा 312 से बचाव (Legal Defence)

अगर किसी व्यक्ति पर सेक्शन 312 के तहत आरोप लगाया जाता है, तो कुछ संभावित बचाव ये हो सकते हैं:

✔ वह लूट या डकैती का प्रयास नहीं कर रहा था।

✔ उसके पास हथियार नैतिक या वैध उद्देश्य से था।

✔ अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी का इरादा अपराध करने का था।

इन सभी पॉइंट्स पर फोकस करके मज़बूत बचाव तर्क दिए जा सकते हैं, लेकिन यह कानूनी सलाह नहीं है। सटीक सलाह के लिए, किसी योग्य वकील से सलाह लें।



📜 BNS धारा 312 – तालिका (SEO-Friendly)


शीर्षकविवरण
धारा संख्याBNS 312
धारा का शीर्षकAttempt to commit robbery or dacoity when armed with deadly weapon (घातक हथियार से लैस होकर डकैती/लूट का प्रयास)
कानूनBharatiya Nyaya Sanhita, 2023
अध्यायChapter 17 – Offences Against Property (संपत्ति के खिलाफ अपराध)
मुख्य प्रावधानयदि लूट/डकैती करने का प्रयास करते समय अपराधी किसी घातक हथियार से लैस है, तो उसे कम-से-कम 7 साल का कारावास मिलेगा। 
न्यायिक श्रेणीCognizable (संज्ञेय), Non-Bailable (अजमानती), Triable by Court of Session (सत्र न्यायालय) 
न्यूनतम सजा7 वर्ष से कम नहीं imprisonment 
अतिरिक्त दंडCourt द्वारा Fine लग सकता है 
बैल की स्थितिअजमानती (नॉन-बैलेबल) 
उद्देश्य / महत्वहथियार के साथ अपराध के प्रयास को रोकना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना 
IPC तुलनाBNS 312 का IPC में समकक्ष Provision IPC Sec.398 है (Attempt to commit robbery/dacoity armed) 



निष्कर्ष

BNS की धारा 312 एक सख्त, स्पष्ट और दंडात्मक प्रावधान है जिसका मकसद हथियारों से किए गए अपराधों को रोकना है। यह समाज की सुरक्षा और न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

अगर कोई व्यक्ति खतरनाक हथियार से डकैती या लूटपाट की कोशिश करता है, तो इस धारा के तहत उसे कम से कम 7 साल की जेल की सज़ा मिलना तय है।



अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

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