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BNS धारा 313 क्या है? लुटेरों की टोली का सदस्य होने पर सजा | पूर्ण गाइड

BNS धारा 313 क्या है? लुटेरों की टोली का सदस्य होने पर सजा | पूर्ण गाइड
काल्पनिक चित्र 


बीएनएस धारा 313: लुटेरों, चोरी-डकैती की टोली का सदस्य होने पर सजा – एक विस्तृत मार्गदर्शक


आज के समाज में, चोरी, डकैती और लूटपाट जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियाँ न केवल आम नागरिकों में डर पैदा करती हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इसलिए, भारत सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (2023) के तहत कड़े प्रावधान बनाकर इन अपराधों से निपटने के लिए कानून को मजबूत किया है। ऐसा ही एक प्रावधान धारा 313 है, जिसका मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों के उन सदस्यों को दंडित करना है जो आदतन चोरी या डकैती जैसे अपराधों में शामिल होते हैं।


पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):- 


( लुटेरों आदि की टोली का होने के लिए दण्ड )

जो कोई ऐसे व्यक्तियों को टोली का होगा, जो अभ्यासतः चोरी या लूट करने से सहयुक्त हो और वह टोली डाकुओं की टोली न हो, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।


📌 धारा 313 – मूल अर्थ

धारा 313 का शीर्षक है:
“Punishment for belonging to gang of robbers, etc.” यानी लुटेरों, चोरी-डकैती करने वाली टोली का सदस्य होने पर दंड।

इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसे गैंग या ग्रुप का सदस्य है जो नियमित रूप से चोरी या डकैती जैसे अपराध करता है, तो उस व्यक्ति को इस सेक्शन के तहत सज़ा मिल सकती है, भले ही उसने खुद चोरी या डकैती में सीधे तौर पर हिस्सा न लिया हो।

सीधे शब्दों में:
👉 यदि आप एक ऐसे समूह में हैं जो लगातार चोरी या लूट करता है, तो आप भी अपराधी माने जाएंगे, भले आप खुद चार्जशीट अपराध न कर रहे हों। 


धारा 313 का उद्देश्य — क्यों यह प्रावधान आवश्यक है?

धारा 313 को समझने के लिए हमें इसके पीछे के उद्देश्य को भी देखना जरूरी है:

1️⃣ संगठित अपराध नियंत्रण

आमतौर पर चोरी, लूट या डकैती अकेले व्यक्ति द्वारा नहीं होती, बल्कि यह गिरोहबद्ध रूप से की जाती है। ऐसे में सिर्फ उस व्यक्ति को दंडित करना पर्याप्त नहीं होता जो हथियार चलाता है या मुख्य अपराध करता है। गिरोह के सभी सदस्यों की भागीदारी को रोकना आवश्यक है ताकि संगठित अपराध कम हो सके।   

2️⃣ गिरोह का निराकरण

धारा 313 का मकसद ऐसे गैंग्स को अपराध होने से पहले ही खत्म करना है – न कि अपराध होने के बाद सिर्फ सज़ा देना। यह गैंग मेंबरशिप को सज़ा देने लायक बनाकर गैंग से जुड़े अपराधों की जड़ को खत्म करने की कोशिश करती है।

3️⃣ समान दंड का प्रावधान

कानून यह मानता है कि गिरोह के सभी सदस्य चाहे मुख्य अपराधी हों या सहायक, सभी समूह अपराध का समर्थन करते हैं। इसलिए समान दण्ड देना आवश्यक है।


धारा 313 का विस्तृत प्रावधान

धारा 313 BNS के अनुसार:

✔️ किसे लागू होती है?
व्यक्ति को जो किसी गिरोह का सदस्य है और वह गिरोह आदतन चोरी या लूट करता है, बशर्ते गिरोह डकैतों का गिरोह न हो। 

✔️ डकैती का शामिल न होना क्यों?
डकैती (dacoity) को कानून में अलग वर्ग में रखा गया है, जिसमें पाँच या अधिक लोग शामिल होते हैं। इसलिए BNS में इसे अलग प्रावधानों द्वारा नियंत्रित किया गया है और सफ़ाई से कहा गया है कि धारा 313 केवल थीफ्ट / रॉबरी जैसे गिरोहों पर लागू होगी। 

✔️ क्या यह गिरोह का मुख्य अपराध होना चाहिए?
नहीं। केवल गिरोह का सदस्य होना ही पर्याप्त है, भले ही आप मुख्य अपराधी न हों। अगर पुलिस और अदालत यह साबित कर दे कि गिरोह आदतन चोरी या लूट करता है और आप उसके सदस्य हैं, तो आप दंडनीय होंगे। 


धारा 313 की सजा – कितनी कठोर?

धारा 313 के अंतर्गत:

 सजा:- 7 वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- अजमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।

इसका मतलब है कि कोर्ट के पास दोषी पाए जाने पर सात साल तक की कड़ी कैद और जुर्माना दोनों लगाने की शक्ति है। यह दंड संहिता के गंभीर प्रावधानों में से एक है, जिसे सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।


धारा 313 का प्रभाव और कानूनी निहितार्थ

📍 गिरोह के सदस्य को भी दंडनीय ठहराना
सिर्फ मुख्य अपराधी ही नहीं, बल्कि सहायक, योजनाकार, सदस्य सभी को यह दंड व्यवस्था लक्षित करती है। अगर कोई व्यक्ति गिरोह के लिए सूचना लाता है, योजना बनाता है, संसाधन जुटाता है या सिर्फ गिरोह का सदस्य है, तो वह भी इस प्रावधान के तहत अपराधी माना जाता है। 

📍 संगठित गिरोह पर रोक
धारा 313 का मुख्य उद्देश्य ही यह है कि गिरोहों की ज़मीन से जड़ काटनी है। इसके अर्थ में यह कानून केवल व्यक्तिगत अपराधों को दंडित करने से आगे बढ़कर संगठित आपराधिक समूहों पर प्रभावी दंड लगाता है। 

📍 गवाह और साक्ष्य
धारा 313 की सज़ा देने के लिए अदालत को यह प्रमाणित करना ज़रूरी है कि गिरोह आदतन चोरी/रॉबरी करता था और अभियुक्त उसका सदस्य था। सिर्फ दावा करने वाले बयान पर्याप्त नहीं होते; साक्ष्य और सबूत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 


धारा 313 vs IPC में समान प्रावधान

पुराने Indian Penal Code (IPC) में भी इसी तरह की धाराएँ थीं (जैसे IPC Section 401) जो गिरोह में शामिल होने पर दंड देती थीं। BNS में इसे नया स्वरूप दिया गया है और शीर्षक बदल दिया गया है। जैसे IPC में “थीफ्ट/चोरी” शब्द था, वहीं BNS में इसे “रॉबर्स” के रूप में प्रस्तुत किया गया है, पर मूल भावना वही है – *गिरोहात्मक आपराधिकता पर सख्ती से दंड देना 



निष्कर्ष (Conclusion)

BNS की धारा 313 एक ज़रूरी कानूनी प्रावधान है जिसका मकसद संगठित अपराध पर लगाम लगाना और चोरी या डकैती जैसे बार-बार होने वाले अपराधों में शामिल गैंग के सभी सदस्यों को सज़ा देना है। इसमें न सिर्फ मुख्य अपराधियों बल्कि उनके साथियों और सदस्यों के लिए भी कड़ी सज़ा का प्रावधान है। कोर्ट के सामने यह साबित करना ज़रूरी है कि गैंग ने आदतन अपराध किए और आरोपी उस गैंग का सदस्य था। इसका मकसद समाज से अपराध और गैंग की गतिविधियों की आदत को खत्म करना है ताकि पूरा समुदाय सुरक्षित महसूस करे



📊 धारा 313 BNS — Quick Summary Table (तालिका)


शीर्षक (Field)विवरण (Details)
धारा संख्या313 – Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
क़ानून का नामPunishment for belonging to gang of robbers, etc. (लुटेरों की टोली का सदस्य होने पर सजा)
क्या प्रावधान है?कोई भी व्यक्ति जो ऐसे गिरोह का सदस्य है जो आदतन चोरी या लूट करता है (डकैती नहीं), उस पर सज़ा लागू होगी।
मूल कथन (Short Code)“Whoever belongs to any gang of persons associated in habitually committing theft or robbery … shall be punished…”
सज़ा (Punishment)कठोर कारावास (Rigorous imprisonment) – अधिकतम 7 वर्ष तक और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
त्याग-योग्यता (Applicability)गिरोह डकैती के लिए नहीं; केवल चोरी/लूट-टाइम अपराध के लिए लागू।
डेटा स्रोत (Source)Bare Act/Multiple legal references (सारांश आधारित)।
उद्देश्य (Purpose)गिरोह के सभी सदस्यों को दंडनीय ठहराना ताकि संगठित अपराध पर रोक लगे।
IPC से तुलनाIPC में लगभग समान धाराएँ थीं लेकिन BNS में wording/terms को modern तरीके से पेश किया गया है।





अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

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