📌 BNS धारा 314 — संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), 2023 के अंतर्गत धारा 314 एक महत्वपूर्ण आपराधिक प्रावधान है, जो चल संपत्ति (movable property) के बेईमानी से दुर्विनियोग को दंडनीय अपराध मानती है। इसे आम बोलचाल में “संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग” कहा जाता है।
📒 पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):-
( संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग )
जो कोई बेईमानी से किसी जंगम संपत्ति का दुर्विनियोग करेगा या उसको अपने उपयोग के लिए संपरिवर्तित कर लेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, दण्डित किया जाएगा।
उदाहरण :- (क) रमेश, मोहन की संपत्ति को उस समय जबकि रमेश उस संपत्ति को लेता है, यह विश्वास रखते हुए कि वह संपत्ति उसी की है, मोहन के कब्जे में से सद्भावपूर्वक लेता है। रमेश, चोरी का दोषी नहीं है। किन्तु यदि रमेश अपनी भूल मालूम होने के पश्चात् उस संपत्ति का बेईमानी से अपने लिए विनियोग कर लेता है, तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
(ख) राजेश, जो रमेश का मित्र है, रमेश की अनुपस्थिति में रमेश के पुस्तकालय में जाता है और रमेश की अभिव्यक्त सम्मति के बिना एक पुस्तक ले जाता है। यहां, यदि राजेश का यह विचार था कि पढ़ने के प्रयोजन के लिए पुस्तक लेने की उसको रमेश की विवक्षित सम्मति प्राप्त है, तो राजेश ने चोरी नहीं की है। किन्तु यदि राजेश बाद में उस पुस्तक को अपने फायदे के लिए बेच देता है, तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
(ग) सोहन और राजेश एक घोड़े के संयुक्त स्वामी हैं। सोहन उस घोड़े को उपयोग में लाने के आशय से राजेश के कब्जे में से उसे ले जाता है। यहां, सोहन को उस घोड़े को उपयोग में लाने का अधिकार है, इसलिए वह उसका बेईमानी से दुर्विनियोग नहीं है। किन्तु यदि सोहन उस घोड़े को बेच देता है, और सम्पूर्ण आगम का अपने लिए विनियोग कर लेता है, तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
व्याख्या :- 1. केवल कुछ समय के लिए बेईमानी से दुर्विनियोग करना इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत दुर्विनियोग है।
उदाहरण :- राज को सोहन का एक सरकारी वचनपत्र मिलता है, जिस पर निरंक पृष्ठांकन है। राज, यह जानते हुए कि यह वचन-पत्र सोहन का है, उसे ऋण के लिए प्रतिभूति के रूप में बैंककारं के पास इस आशय से गिरवी रख देता है कि वह भविष्य में उसे सोहन को प्रत्यावर्तित कर देगा। राज ने इस धारा के अधीन अपराध किया है।
व्याख्या :- 2. जिस व्यक्ति को ऐसी संपत्ति पड़ी मिल जाती है, जो किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में नहीं है और वह उसके स्वामी के लिए लिए उसको उसको संरक्षित रखने या उसके स्वामी को उसे प्रत्यावर्तित करने के प्रयोजन से ऐसी संपत्ति को लेता है, वह न तो बेईमानी से उसे लेता है और न बेईमानी से उसका दुर्विनियोग करता है, और किसी अपराध का दोषी नहीं है, किन्तु वह ऊपर परिभाषित अपराध का दोषी है, यदि वह उसके स्वामी को जानते हुए या खोज निकालने के साधन रखते हुए अथवा उसके स्वामी को खोज निकालने और सूचना देने के युक्तियुक्त साधन उपयोग में लाने और उसके स्वामी को उसकी मांग करने को समर्थ करने के लिए उस संपत्ति को युक्तियुक्त समय तक रखे रखने के पूर्व उसको अपने लिए विनियोजित कर लेता है।
ऐसी दशा में युक्तियुक्त साधन क्या है, या युक्तियुक्त समय क्या है, यह तथ्य का प्रश्न है।
यह आवश्यक नहीं है कि पाने वाला यह जानता हो कि संपत्ति का स्वामी कौन है या यह कि कोई विशिष्ट व्यक्ति उसका स्वामी है। यह पर्याप्त है कि उसको विनियोजित करते समय उसे यह विश्वास नहीं है कि वह उसकी अपनी संपत्ति है, या सद्भावपूर्वक यह विश्वास है कि उसका असली स्वामी नहीं मिल सकता।
उदाहरण :- (क) बबलू को राजमार्ग पर एक रुपया पड़ा मिलता है। यह न जानते हुए कि वह रुपया किसका है बबलू उस रुपए को उठा लेता है। यहां बबलू ने इस धारा में परिभाषित अपराध नहीं किया है।
(ख) सरफराज को सड़क पर एक चिट्टी पडी मिलती है, जिसमें एक बैंक नोट है। उस चिट्ठी में दिए हुए निदेश और विषय-वस्तु से उसे ज्ञात हो जाता है कि वह नोट किसका है। वह उस नोट का विनियोग कर लेता है। वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
(ग) वाहक-देय एक चेक सरफराज को पड़ा मिलता है। वह उस व्यक्ति के सम्बन्ध में जिसका चेक खोया है, कोई अनुमान नहीं लगा सकता, किन्तु उस चेक पर उस व्यक्ति का नाम लिखा है, जिसने वह चेक लिखा है। सरफराज यह जानता है कि वह व्यक्ति सरफराज को उस व्यक्ति का पता बता सकता है जिसके पक्ष में वह चेक लिखा गया था, सरफराज उसके स्वामी को खोजने का प्रयत्न किए बिना उस चेक का विनियोग कर लेता है। वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
(घ) बबलू देखता है कि सरफराज की थैली, जिसमें धन है, सरफराज से गिर गई है। बबलू वह थैली सरफराज को प्रत्यावर्तित करने के आशय से उठा लेता है। किन्तु तत्पश्चात् उसे अपने उपयोग के लिए विनियोजित कर लेता है। बबलू ने इस धारा के अधीन अपराध किया है।
(ङ) मोहन को एक थैली, जिसमें धन है, पड़ी मिलती है। वह नहीं जानता है कि वह किसकी है। उसके पश्चात् उसे यह पता चल जाता है कि वह बबलू की है, और वह उसे अपने उपयोग के लिए विनियुक्त कर लेता है। मोहन इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
(च) मोहन को एक मूल्यवान अंगूठी पड़ी मिलती है। वह नहीं जानता है कि वह किसकी है। मोहन उसके स्वामी को खोज निकालने का प्रयत्न किए बिना उसे तुरन्त बेच देता है। मोहन इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।
📌 धारा 314 का मूल अर्थ
धारा 314 के अनुसार:
“कोई भी व्यक्ति जो किसी दूसरे व्यक्ति की चल संपत्ति को बेईमानी से लेता है या उसे अपने उपयोग के लिए लेता है या उसके रूपांतरण (convert) करता है, वह आपराधिक रूप से दोषी माना जाएगा।”
यह धारा केवल चल संपत्ति यानी ऐसी संपत्ति पर लागू होती है जिसे स्थानांतरित या ले जाया जा सकता है — जैसे नकद, सामान, कीमती वस्तुएं, उपकरण आदि। अचल संपत्ति (जैसे भूमि, इमारतें) सीधे इस धारा के दायरे में नहीं आतीं।
📌 मुख्य तत्व (Essential Ingredients) — धारा 314
एक आपराधिक मामला इस धारा के अंतर्गत तभी बन सकता है जब निम्न तत्व (ingredients) सिद्ध हों:
✔️ 1. चल संपत्ति का होना
धारा केवल उन मामलों में लागू होगी जहाँ संपत्ति चल और भौतिक हो।
✔️ 2. बेईमानी (Dishonesty)
सबसे महत्वपूर्ण तत्व है बेईमानी — यानी व्यक्ति ने जानबूझकर किसी दूसरे के स्वार्थ को नुकसान पहुँचाने और स्वयं लाभ पाने के इरादे से संपत्ति को अपने स्वामित्व में लिया हो।
✔️ 3. स्वामित्व का बिना अनुमति ले लेना
संपत्ति का उपयोग या अधिग्रहण करने के लिए उसके असली मालिक की अनुमति नहीं होना चाहिए। अगर अनुमति हो तो यह धारा लागू नहीं होती।
✔️ 4. स्वयं के उपयोग के लिए लेना/रूपांतरण करना
धारा यह भी कहती है कि अगर व्यक्ति उस संपत्ति को स्वयं के लाभ के लिए उपयोग करता है या रूपांतरित करता है, तो वह दोषी होता है।
📌 धारा 314 की सजा (Punishment)
धारा 314 के तहत दोषी पाए जाने पर:
सजा:- कारावास से, जिसकी अवधि 6 मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो 2 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नहीं है।
यह सजा अदालत के विवेक और मामले की परिस्थितियों के आधार पर तय होती है।
📌 स्पष्टीकरण (Explanations) — बेईमानी का विस्तार
📍 Explanation-1: अस्थायी बेईमानी भी अपराध
धारा स्पष्ट करती है कि अस्थायी रूप से संपत्ति का बेईमानी से उपयोग भी अपराध के दायरे में आता है। इसका मतलब है कि सिर्फ स्थायी रूप से नहीं, बल्कि किसी के संपत्ति का अस्थायी उपयोग भी यदि बेईमान है तो यह अपराध है।
📍 Explanation-2: खोई संपत्ति की जिम्मेदारी
अगर कोई व्यक्ति किसी अनजान व्यक्ति की खोई हुई संपत्ति पाता है और उसे सुरक्षित रखने या वापस करने का प्रयास करता है, तो यह अपराध नहीं है।
लेकिन अगर उस व्यक्ति को:
✔️ मालिक पता है,
✔ या वह मालिक पता लगाने के साधन जानता है,
✔ या उसने पर्याप्त समय तक मालिक को खोजने का प्रयास नहीं किया
तो वह guilty माना जाएगा।
📌 स्पष्टीकरण के उदाहरण (Illustrations)
📌 उदाहरण 1: पहले सही फिर बेईमानी
जावेद गलती से सरफराज का सामान ले लेता है, पहले वह सोचता है यह उसका है।
लेकिन बाद में जब जावेद को पता चलता है कि यह सरफराज का है और फिर भी वह इसे बेच देता है या अपने उपयोग में ले लेता है — तो यह धारा 314 का अपराध है।
📌 उदाहरण 2: बिना अनुमति ले जाना
सरफराज, बबलू के घर से बिना अनुमति कोई किताब निकाल लेता है और बाद में बेच देता है — यह भी इस धारा के अंतर्गत आता है।
📌 धारा 314 और अन्य अपराधों के साथ तुलना
🟦 IPC 403 (Misappropriation of Property)
धारा 314 BNS मूलतः IPC 403 का ही नया रूप है। दोनों का उद्देश्य वही है — संपत्ति का बेईमानी से उपयोग दंडनीय बनाना।
🟨 Criminal Breach of Trust (धारा 316 BNS / 405 IPC)
इससे अलग यह होता है क्योंकि Criminal Breach of Trust में संपत्ति विश्वास के आधार पर दी गई होती है, जैसे बैंक में पैसे, कंपनी की प्रॉपर्टी आदि।
जहाँकि धारा 314 में कोई भी निकाल-ले लिए हुए वस्तु को बेईमानी से उपयोग में लेना अपराध है, भले ही वह पहले स्वेच्छा से नहीं दी गई हो।
🟨 Criminal Breach of Trust (धारा 316 BNS / 405 IPC)
इससे अलग यह होता है क्योंकि Criminal Breach of Trust में संपत्ति विश्वास के आधार पर दी गई होती है, जैसे बैंक में पैसे, कंपनी की प्रॉपर्टी आदि।
जहाँकि धारा 314 में कोई भी निकाल-ले लिए हुए वस्तु को बेईमानी से उपयोग में लेना अपराध है, भले ही वह पहले स्वेच्छा से नहीं दी गई हो।
📌 व्यावहारिक उदाहरण (Practical Examples)
➡️ खोई हुई बाइक
अगर कोई व्यक्ति बाइक पाता है और असली मालिक को जानकर भी उसे अपने लिए रख लेता है, तो धारा 314 के अंतर्गत अपराध है। Testbook
➡️ गलती से आए पैसे
अगर किसी के बैंक खाते में गलती से पैसे आ जाते हैं और वह उसे वापस करने की बजाय खर्च कर देता है, तो यह भी बेईमानी से दुर्विनियोग हो सकता है।
📌 धारा 314 का सामाजिक महत्त्व
धारा 314 यह सुनिश्चित करती है कि:
🛡️ प्रत्येक व्यक्ति की संपत्ति की रक्षा हो।
🛡️ बेईमानी और अनुचित लाभ से रोक लगे।
🛡️ खोई हुई चीजों को सही मालिक तक वापस लाने की
प्रेरणा बढ़े।
📌 निष्कर्ष
🔹 धारा 314 BNS उन लोगों के खिलाफ है जो बेईमानी से किसी दूसरे की संपत्ति को अपने उपयोग के लिए ले लेते हैं या उसे अपने लिए रूपांतरित कर लेते हैं।
🔹 इसमें केवल चल संपत्ति शामिल है।
🔹 सजा में जेल (6 महीने से 2 साल) और जुर्माना हो सकता
है।
🔹 अस्थायी दुर्विनियोग भी अपराध माना जाता है।
🔹 खोई संपत्ति के मामले में मालिक को खोजने का प्रयत्न
जरुरी है।
📊 BNS धारा 314 – तालिका (Summary Table)
| शीर्षक (Title) | विवरण (Description) |
|---|---|
| धारा संख्या | BNS धारा 314 |
| देश/कानून | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 |
| अपराध का नाम | संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग (Dishonest misappropriation of property) |
| लागू होने वाली संपत्ति | केवल चल संपत्ति (movable property) |
| मुख्य तत्व (Elements) | किसी की movables property को बेईमान तरीके से लेना या अपने उपयोग के लिए बदलना |
| दोषी मानसिकता (Mens rea) | बेईमानी / धोखाधड़ी का इरादा होना ज़रूरी है |
| दंड (Punishment) | न्यूनतम 6 महीने से अधिकतम 2 साल तक की जेल और जुर्माना |
| उदाहरण (Illustration) | किसी की वस्तु गलती से ले ली → बाद में पता चलने के बाद भी रख लिया → अपराध माना जाएगा |
| खोई संपत्ति का नियम | कोई खोई हुई चीज पाई → अगर सही मालिक पता लगा कर नहीं लौटाई → अपराध माना जाता है ( |
| BNS vs IPC | यह धारा IPC की धारा 403 (Dishonest misappropriation of property) का नया रूप है |
(IPC) की धारा 403 को (BNS) की धारा 314 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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