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BNS धारा 319: प्रतिरूपण द्वारा छल – अर्थ, उदाहरण, सजा और कानूनी व्याख्या

BNS धारा 319: प्रतिरूपण द्वारा छल – अर्थ, उदाहरण, सजा और कानूनी व्याख्या
काल्पनिक चित्र 

BNS की धारा 319 — प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by Personation) : विस्तृत और सरल विवरण


भारत में भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के तहत धारा 319 को “प्रतिरूपण द्वारा छल” यानी Cheating by Personation के रूप में परिभाषित किया गया है। यह कानून उन अपराधों को रोकने और दंडित करने के लिए बनाया गया है जहाँ कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का नाम, पहचान या पहचान-दस्तावेज का गलत तरीके से उपयोग करके दूसरों को धोखे में डालता है और उन्हें आर्थिक या अन्य रूप से हानि पहुँचाता है।

धारा 319 में छली की परिभाषा (Cheating by Personation)


धारा 319 के अनुसार:


प्रतिरूपण द्वारा छल


(1) कोई व्यक्ति "प्रतिरूपण द्वारा छल करता है", है", यह तब कहा जाता है, जब वह यह अपदेश करके कि वह कोई अन्य व्यक्ति है, या एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के रूप में जानते हुए प्रतिस्थापित करके, या यह व्यपदिष्ट करके कि वह या कोई अन्य व्यक्ति, कोई ऐसा व्यक्ति है, जो वस्तुतः उससे या अन्य व्यक्ति से भिन्न है, छल करता है।

व्याख्या :- यह अपराध हो जाता है चाहे वह व्यक्ति जिसका प्रतिरूपण किया गया है, वास्तविक व्यक्ति हो या काल्पनिक।

उदाहरण :- (क) सानू, उसी नाम का अमुक धनवान बैंकर है इस अपदेश द्वारा छल करता है। सानू प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।

(ख) जॉन, जिसकी मृत्यु हो चुकी है, होने का अपदेश करने द्वारा सोहन छल करता है। सोहन प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।

(2) जो कोई प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।


📌 मुख्य बात: यह अपराध तब पूरा होता है चाहे वह व्यक्ति वास्तविक हो या काल्पनिक हो — कानून में दोनों को शामिल किया गया है। 


धारा 319 का मतलब क्या है?


धारा 319 के अनुसार, व्यक्ति छल करके तब दोषी होता है जब वह जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनकर या किसी के स्थान पर खुद को दिखा कर किसी को धोखा देता है। इसे personation या प्रतिरूपण कहा जाता है। 

मुख्य बिंदु — प्रतिरूपण:

✔️ कोई व्यक्ति दूसरे की पहचान बनकर काम करता है

✔️ जानबूझकर किसी का नाम, पहचान या पहचान-दस्तावेज का गलत इस्तेमाल करता है

✔️ उद्देश्य होता है किसी व्यक्ति को धोखा देना या लाभ उठाना

✔️ प्रतिरूपण वास्तविक व्यक्ति हो या काल्पनिक व्यक्ति — दोनों के लिए कानून लागू होता है 


धारा 319 के अंतर्गत धोखा देने के उदाहरण


धारा 319 के तहत अपराध को समझने के लिए निम्नलिखित उदाहरण बेहद उपयोगी हैं: 

उदाहरण 1 — बैंक फ्रॉड:

एक व्यक्ति खुद को किसी बड़े बैंक के अधिकारी के रूप में पेश करता है और लोगों से उनके बैंक खाते से पैसा निकालवाने या निवेश करवाने का धोखा देता है। उसे जब्त कर लिया जाता है क्योंकि उसने धोखे से पहचान का गलत इस्तेमाल किया। 

उदाहरण 2 — मृत व्यक्ति का नाम इस्तेमाल:

कोई व्यक्ति किसी मृत व्यक्ति के नाम से जीवन बीमा का दावा जमा करता है और पैसे हड़प लेता है — यह भी प्रतिरूपण वाली धोखाधड़ी के अंतर्गत आता है। 

उदाहरण 3 — फर्जी ऑनलाइन पहचान:

किसी सोशल मीडिया या डिजिटल प्रोफ़ाइल को वास्तविक व्यक्ति का नाम, फोटो और पहचान दिखाकर बनाना और लोगों को पैसे देने या किसी सामान/सेवा का भुगतान करने के लिए प्रेरित करना भी प्रतिरूपण द्वारा छल है।


धारा 319 की सजा (Punishment under Section 319)


धारा 319 के सेक्शन 2 के अनुसार, जो भी व्यक्ति जानबूझकर इस प्रकार का धोखा करता है, वह दंडित किया जाएगा। सजा में शामिल हैं: 

सजा:- 5 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माने से या दोनों

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।

👉 सजा का निर्णय कोर्ट पर निर्भर करता है और केस की गंभीरता के अनुसार यह तय किया जाता है। 


क्या यह अपराध केवल पहचान-कर्मियों के लिए है?


नहीं। धारा 319 केवल अधिकारियों या सार्वजनिक कर्मियों के लिए नहीं है। इसमें शामिल कोई भी व्यक्ति — चाहे वह आम नागरिक हो, पेशेवर हो, व्यवसायी हो, या डिजिटल दुनिया में किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान बनाकर चलने वाला व्यक्ति हो — यदि उसने जानबूझकर धोखा देने के लिए किसी की पहचान का गलत उपयोग किया, तो वह इस धारा के अंतर्गत आता है। 

छल और प्रतिरूपण के कानूनी तत्व — आसान शब्दों में


धारा 319 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए चार मुख्य बातें साबित होनी चाहिए: 

🔻प्रतिरूपण (Personation): व्यक्ति ने किसी दूसरे की पहचान को अपनाया हो।

🔻जानबूझकर धोखा: झूठी पहचान स्पष्ट रूप से जानबूझकर दी गई हो।

🔻दूसरे को हानि या नुकसान: धोखे के कारण पीड़ित को आर्थिक या अन्य नुकसान हुआ हो।

🔻गलत मकसद: उद्देश्य केवल धोखा देना या लाभ प्राप्त करना हो। 


ऑनलाइन प्रतिरूपण और साइबर फ्रॉड


आज की डिजिटल दुनिया में ऑनलाइन पहचान धोखा देना बहुत आम होता जा रहा है। फर्जी ई-मेल आईडी, नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल, और क्लोन वेबसाइटों के ज़रिए लोग आसानी से दूसरों को धोखा दे रहे हैं। ऐसे ऑनलाइन धोखे भी धारा 319 के दायरे में आते हैं क्योंकि मूल बात पहचान का गलत इस्तेमाल और धोखे का इरादा है।


धारा 319 क्यों महत्वपूर्ण है?


धारा 319 इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह पहचान के दुरुपयोग और धोखे से होने वाले आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक नुकसानों को रोकती है। इससे लोगों को इस बात का भरोसा मिलता है कि सरकार और न्याय व्यवस्था उनके पहचान और धन की सुरक्षा करती है। 


आम गलतफहमियाँ

क्या सिर्फ फ़र्जी दस्तावेज़ होने पर धारा 319 लागू होती है?

👉 केवल फ़र्जी दस्तावेज़ का होना पर्याप्त नहीं है — उसके साथ धोखे का इरादा और पहचान का जानबूझकर गलत उपयोग भी साबित होना आवश्यक है। 

क्या किसी व्यक्ति को मिलकर पहचान देना भी अपराध है?

👉 हाँ, यदि यह पहचान धोखे के मकसद से दी गई है और इससे किसी को नुकसान हुआ है, तो यह धारा की संज्ञा बन सकती है।

निष्कर्ष


BNS की धारा 319 वास्तव में प्राकृतिक व्यक्तित्व और पहचान की सुरक्षा का कानून है, जो पहचान को धोखे में उपयोग करके लोगों को ठगने वाले अपराधियों को दंडित करती है। चाहे वह बैंक फ्रॉड हो, मृत व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग, या डिजिटल दुनिया में नकली प्रोफाइल से ठगी — यह धारा उन्हें रोकने और कड़ी सजा देने का माध्यम है।

इसलिए अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी पहचान को कोई धोखे में इस्तेमाल कर रहा है, तो यह फ़रज़ी नुकसान कानून के तहत धारा 319 के अंतर्गत अपराध हो सकता है और आपको तुरंत कानूनी सलाह लेनी चाहिए।


BNS धारा 319 — प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by Personation) सारांश तालिका


विशेषता / तत्वविवरण
कानून का नामभारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS)
धारा संख्या319
अपराध का नामप्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by Personation)
परिभाषाकिसी अन्य व्यक्ति का नाम, पहचान या स्थान लेते हुए जान-बूझकर धोखा देना; चाहे व्यक्ति वास्तविक हो या काल्पनिक। 
मुख्य तत्व— किसी अन्य की पहचान में स्वयं को पेश करना— व्यक्ति जानबूझकर कर रहा हो— धोखा/अन्य को आर्थिक या लाभ हेतु गुमराह करना 
उदाहरण (Illustrations)— किसी अमीर व्यक्ति के नाम से खुद को पेश करना— मृत व्यक्ति का नाम इस्तेमाल करना 
दंड/सजा— अधिकतम 5 वर्ष तक की जेल, या — जुर्माना, या — दोनों 
पहचान का प्रकारवास्तविक, मृत या काल्पनिक — सभी शामिल हैं 
उद्देश्य/इरादाधोखे/झूठ के माध्यम से लाभ या अन्य को नुकसान पहुँचाना
IPC के समतुल्य (Equivalent IPC)यह IPC के Section 416 (Cheating by personation) जैसा है, लेकिन BNS में अधिकतम सजा 5 साल तक है। 
क्यों महत्वपूर्ण हैपहचान फ़्रॉड, नकली पहचान धोखाधड़ी और सामाजिक व आर्थिक हानि रोकने में प्रभावी।




अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है


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