🧑⚖️ BNS की धारा अंतरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन — एक विस्तृत विश्लेषण
भारत में कानून संपत्ति के लेन-देन और दस्तावेजों की सत्यता को अत्यंत गंभीरता से लेता है। जब कोई व्यक्ति बेईमानी या कपटपूर्वक किसी संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज़ (विलेख) को निष्पादित करता है और उसमें प्रतिफल (consideration) के बारे में मिथ्या या झूठा विवरण शामिल करता है, तो यह केवल एक साधारण अनुचित व्यवहार नहीं माना जाता—बल्कि यह गंभीर आपराधिक अपराध के रूप में प्रतिपादित होता है।
इस तरह के अपराध को भारतीय दंड संहिता (पुराने IPC यूनिफॉर्म कोड) के तहत Section 423 में परिभाषित किया गया था और अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) Section 322 के रूप में भी देखा जाता है।
पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):-
( अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन )
जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख को हस्ताक्षरित करेगा, निष्पादित करेगा, या उसका पक्षकार बनेगा, जिससे किसी संपत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अंतरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया जाना, तात्पर्थित और जिसमें ऐसे अंतरण या भार के प्रतिफल से संबंधित, या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों से संबंधित, जिसके या जिनके उपयोग या फायदे के लिए उसका प्रवर्तित होना वास्तव में आशयित है, कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा। है,
📜 धारा का कानूनी स्वरूप (Legal Provision)
📌 BNS Section 322 / IPC Section 423
BNS के इस प्रावधान के अनुसार:
➡️ जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख को हस्ताक्षरित या निष्पादित करेगा,
➡️ जिससे किसी संपत्ति का हस्तांतरण या उस पर किसी प्रकार का भार दर्शाया जाता है,
➡️ तथा उस दस्तावेज़ में प्रतिफल के संबंध में गलत या मिथ्या कथन शामिल हो,
➡️ या यह गलत बयान उस व्यक्ति के बारे में हो जिसके लिए यह दस्तावेज़ वास्तव में बनाया गया,
➡️ तो ऐसे व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए:
👉 किसी संपत्ति के विक्रय विलेख में यह दावा करना कि खरीदार ने ₹50 लाख दिए, जबकि वास्तविक राशि ₹30 लाख ही है,
👉 या किसी दस्तावेज़ में यह लिखना कि किसी अन्यों को लाभ पहुँचाने के लिए हस्तांतरण किया जा रहा है, जबकि वास्तविक लाभार्थी कोई और है —
ये स्थितियाँ इसी धारा के अंतर्गत अपराध मानी जाती हैं।
🧠 धारा के प्रमुख घटक (Essential Ingredients)
किसी व्यक्ति के खिलाफ यह धारा लागू होने के लिए नीचे दिए गए तत्वों का होना आवश्यक है:
📌 दस्तावेज़ का अस्तित्व: यह एक विलेख या लिखित दस्तावेज़ होना चाहिए जो संपत्ति के हस्तांतरण से सम्बंधित हो।
🤥 मिथ्या कथन (False Statement): उस दस्तावेज़ में प्रतिफल (मूल्य या पैसे) के बारे में झूठा विवरण होना चाहिए।
😈 बेईमानी या कपट (Dishonest/Fraudulent Intent): दोषी व्यक्ति का इरादा जानबूझकर धोखाधड़ी करना था।
✍️ दस्तावेज़ निष्पादन: व्यक्ति ने उस दस्तावेज़ को निष्पादित (execute) किया हो या उसका पक्षकार हो।
👤 लाभार्थी के बारे में गलत जानकारी: यदि दस्तावेज़ में लाभार्थी के नाम या उपयोग के बारे में भी झूठ है, तो यह भी अपराध के घटक में आता है।
इन तत्वों में से किसी एक का अभाव होने पर यह धारा लागू नहीं होगी। गलत जानकारी या त्रुटि से अलग, इरादे का धोखाधड़ापूर्ण होना आवश्यक है।
⚖️ पुण्यात्मक उदाहरण (Illustrations)
यहाँ कुछ सरल उदाहरण हैं जो इस धारा के अर्थ को स्पष्ट करते हैं:
📍 उदाहरण 1:
राजेश अपने घर को सोहन को बेचता है, लेकिन बिक्री के विलेख में प्रतिफल ₹50 लाख दर्ज करता है, जबकि खरीदे की असली राशि केवल ₹30 लाख थी, ताकि कम रजिस्ट्री शुल्क दे सके या बैंक को धोखा दे सके।
📍 उदाहरण 2:
राजेश एक संपत्ति को मोहन के नाम पर ट्रांसफर करता है, जबकि दस्तावेज़ में लिखता है कि संपत्ति का लाभार्थी राम है, केवल सोहन के उत्तराधिकारी को धोखा देने के लिए।
📍 उदाहरण 3:
एक विलेख में प्रतिफल ₹10 लाख लिखा गया है, लेकिन वास्तविक मूल्य ₹30 लाख है, ताकि सरकारी करों से छूट मिले।
इन व्यवहारों को अपनाने वाला व्यक्ति गंभीर आपराधिक दायित्व के अंतर्गत आता है और इसके लिए दंडनीय कार्रवाई हो सकती है।
🔎 सजा और दंड प्रावधान (Punishment)
BNS Section 322 (यहां IPC की धारा का प्रतिरूप) के तहत:
सजा:- 3 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।
इससे स्पष्ट है कि यह अपराध महज तकनीकी दोष नहीं है, बल्कि कानून की निगाह में गंभीर धोखाधड़ी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संपत्ति लेन-देन के सभी दस्तावेज सत्य और पारदर्शी हों।
📌 धारा के तहत ट्रायल और प्रक्रिया
लीगल प्रक्रिया में यह मामला:
✔️ मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई योग्य है।
✔️ संज्ञेय अपराध (Non-cognizable) होने पर पुलिस बिना वॉरंट गिरफ्तारी नहीं कर सकती है।
✔️ आरोपियों को जमानत मिल सकती है।
यह प्रवृत्ति कानून में न केवल दोषी को दंडित करने के लिए है, बल्कि सत्य और ईमानदारी को प्रोत्साहित करने के लिए भी है।
📌 कानूनी सलाह / सावधानियाँ
यदि आप किसी भी संपत्ति के विलेख या दस्तावेज़ को निष्पादित कर रहे हैं, तो:
✅ हमेशा सही प्रतिफल लिखें।
✅ किसी को लाभ पहुँचाने के लिए छुपी जानकारी न दें।
✅ वकील से सलाह लेना सुनिश्चित करें, खासकर संपत्ति मामलों में।
✅ दस्तावेज़ों के मूल्यांकन के समय किसी भी प्रकार का धोखा न करें।
✨ निष्कर्ष
“BNS की धारा अंतरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन” न केवल एक तकनीकी कानूनी शब्दावली है, बल्कि भारतीय दंड संहिता में धोखाधड़ी और झूठी जानकारी के खिलाफ एक सशक्त प्रावधान है।
यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता, सत्यता और कानूनी निष्ठा बनी रहे, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को सख्ती से रोका जा सके
(IPC) की धारा 423 को (BNS) की धारा 322 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

