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BNS धारा 324 – रिष्टि (Mischief) | सम्पूर्ण गाइड & सजा विवरण 2026

रिष्टि (Mischief)
काल्पनिक चित्र 

BNS धारा 324 – रिष्टि (Mischief): सम्पूर्ण गाइड | अर्थ, तत्व, सजा और उदाहरण


भारत में नया आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू हो चुका है, जिसने IPC (भारतीय दंड संहिता) की कई धाराओं के स्थान पर आधुनिक और स्पष्ट प्रावधान दिए हैं। धारा 324 BNS (रिष्टि / Mischief) इन्हीं महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है, जो संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के अपराध को परिभाषित करती है। इस लेख में हम इसे सरल भाषा में, पूर्ण विवरण के साथ समझेंगे


पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):- 


रिष्टि (Mischief)


(1) जो कोई इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी संपत्ति का नाश या किसी संपत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह "रिष्टि" करता है।

व्याख्या :- 1. रिष्टि के अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी क्षतिग्रस्त या नष्ट संपत्ति के स्वामी को हानि, या नुकसान कारित करने का आशय रखे। यह पर्याप्त है कि उसका यह आशय है या यह वह सम्भाव्य जानता है कि वह किसी संपत्ति को क्षति करके किसी व्यक्ति को, चाहे वह संपत्ति उस व्यक्ति की हो या नहीं सदोष हानि का नुकसान कारित करे।

व्याख्या :- 2. ऐसी संपत्ति पर प्रभाव डालने वाले कार्य द्वारा जो उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की हो, या संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की और अन्य व्यक्तियों की हो, रिष्टि की जा सकेगी।

उदाहरण :- (क) महेश की सदोष हानि कारित करने के आशय से महेश की मूल्यवान प्रतिभूति को सगीर स्वेच्छया जला देता है। सगीर ने रिष्टि की है।

(ख) सगीर की सदोष हानि करने के आशय से, उसके बर्फ घर में राजू पानी छोड़ देता है, और इस प्रकार बर्फ को गला देता है। राजू ने रिष्टि की है।

(ग) दिनेश इस आशय से सोहन की अंगूठी नदी में स्वेच्छया फेंक देता है कि सोहन को तद्वारा सदोष हानि कारित करे। दिनेश ने रिष्टि की है।

(घ) राम यह जानते हुए कि उसकी चीज-बस्त उस ऋण को तुष्टि के लिए, जो दिनेश को उस द्वारा शोध्य है, निष्पादन में ली जाने वाली है, उस चीज-बस्त को इस आशय से नष्ट कर देता है कि ऐसा करके ऋण की तुष्टि अभिप्राप्त करने में दिनेश को निवारित कर दे और इस प्रकार दिनेश को नुकसान कारित करे। राम ने रिष्टि की है।

(ङ) मोहन एक पोत का बीमा कराने के पश्चात् उसे इस आशय से कि बीमा करने वालों को नुकसान कारित करे, उसको स्वेच्छया संत्यक्त करा देता है। मोहन ने रिष्टि की है।

(च) मोहन को, जिसने बाटमरी पर धन उधार दिया है, नुकसान कारित करने के आशय से केदारनाथ उस पोत को संत्यक्त करा देता है। केदारनाथ ने रिष्टि की है।

(छ) केदारनाथ के साथ एक घोड़े में संयुक्त संपत्ति रखते हुए केदारनाथ को सदोष हानि कारित करने के आशय से जगदीश उस घोड़े को गोली मार देता है। जगदीश ने रिष्टि की है।

(ज) सोहन इस आशय से और यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह मोहन की फसल को नुकसान कारित करे, मोहन के खेत में ढोरों का प्रवेश कारित कर देता है। सोहन ने रिष्टि की है।

(2) जो कोई रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(3) जो कोई रिष्टि करेगा और तद्वारा सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति सहित किसी संपत्ति की हानि या क्षति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(4) जो कोई रिष्टि करेगा और तद्वारा बीस हजार रुपए से अधिक किन्तु एक लाख रुपए के अनधिक रकम, रिष्टि की हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(5) जो कोई रिष्टि करेगा और तद्वारा एक लाख रुपए या उससे अधिक रकम की रिष्टि की हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(6) जो कोई किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे उपहति या उसका सदोष अवरोध कारित करने को, या मृत्यु का, या उपहति का, या सदोष अवरोध का भय कारित करने की, तैयारी करके रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा


🔎 BNS धारा 324 क्या है?


धारा 324 BNS के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या यह जानते हुए कि उसके कृत्य से नुकसान पहुंचेगा, किसी संपत्ति को नष्ट करता है, उसकी उपयोगिता घटाता है, या किसी परिवर्तन के कारण उसकी कीमत कम हो जाती है, तो वह रिष्टि (Mischief) का अपराध करता है। 

यह धारा संपत्ति के खिलाफ किये गए नियोजित या संभावित नुकसान को दंडनीय मानती है — चाहे वह सार्वजनिक संपत्ति हो या किसी निजी व्यक्ति की संपत्ति।


🧠 रिष्टि (Mischief) के महत्वपूर्ण तत्व


धारा 324 के अंतर्गत किसी कार्य को रिष्टि माना जाए, इसके लिए निम्नलिखित तत्व ज़रूरी हैं:

✔️ 1. इरादा या ज्ञान (Intent या Knowledge)

– अपराधी का इरादा जानबूझकर नुकसान पहुँचाने का होना चाहिए,
या उसे यह पता होना चाहिए कि उसके कृत्य से नुकसान होने की संभावना है। 

✔️ 2. संपत्ति को नुकसान पहुँचना (Property Damage)

– किसी की संपत्ति — चाहे वह निजी हो या सार्वजनिक — को नुकसान पहुँचना चाहिए,
या उसकी उपयोगिता/मूल्य घट जाना चाहिए। 

✔️ 3. अपराधी की मानसिक स्थिति (Mens Rea)

– सिर्फ गलती या दुर्घटना रिष्टि नहीं मानी जाती;
यह केवल तब अपराध माना जाता है जब पीछे सोच-समझकर या संभावित परिणाम जानकर कार्य किया गया हो।


📌 उदाहरण से समझें


Example 1:
अगर कोई अपने पडोसी के खेत में जानबूझकर आग लगाता है, जिससे फसल जल जाती है, तो यह धारा 324 BNS के अन्तर्गत रिष्टि माना जाएगा। 

Example 2:
किसी का प्लॉट नुकसान पहुँचाने के लिए कोई व्यक्ति जल की सप्लाई रोक देता है, और यह पता होते हुए भी करता है कि इससे नुकसान होगा — तब यह भी रिष्टि है। 

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि सिर्फ कोई छोटी-सी नीयत या गलती मात्र ही नहीं, बल्कि जानबूझकर या संभावित नुकसान की चेतना होनी ज़रूरी है।


⚖️ रिष्टि (Mischief) का दंड (Punishment)


BNS धारा 324 के तहत दंड की रूपरेखा इस प्रकार है:


उपधारा :- (2) - सजा:- 6 मास के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनों 

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।


उपधारा :- (3) - सजा:-1 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों 

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।


उपधारा :- (4) - सजा:- 2 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों

अपराध:- असंज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

शमनीय:- शमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव है।


उपधारा :- (5) - सजा:- 5 वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।


उपधारा :- (6) - सजा:- 5 वर्ष के लिए कारावास, और जुर्माना

अपराध:- संज्ञेय

जमानत:- जमानतीय

विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।

सजा की सीमा और प्रकार अपराध की गंभीरता और नुकसान की मात्रा पर निर्भर करती है।


📊 क्या यह अपराध Bailable या Non-Bailable है?


धारा 324 BNS के तहत रिष्टि एक गंभीर अपराध है। पारंपरिक IPC में यह कभी-कभी जमानतीय होता था, पर नया कानून इसे अधिक कठोर दृष्टिकोण से देखता है। आमतौर पर रिष्टि के मामलों में बेल (Bail) कोर्ट के विवेक पर होती है, पुलिस अथवा न्यायालय इसे गंभीरता से लेते हैं।

Note: यह निर्भर करता है कि नुकसान की प्रकृति और परिस्थिति क्या थी।


🧑‍⚖️ समान धारा (Equivalent Sections)


– IPC Section 324 मूलतः Voluntarily causing hurt by dangerous weapons or means पर आधारित था। 

– जबकि BNS Section 324 संपत्ति-आधारित Mischief पर केंद्रित है और IPC के पुराने Sections जैसे 425–440 को आधुनिक रूप देता है। 

इस बदलाव से भारतीय आपराधिक कानून अब अधिक स्पष्ट, संगठित और आधुनिक दृष्टिकोण से संपत्ति-आधिकारों को सुरक्षित रखता है।


🧾 धारा 324 BNS का उद्देश्य


धारा 324 का मुख्य उद्देश्य है:

✔️ संपत्ति के खिलाफ करने वाले जानबूझकर या संभावित नुकसानों को रोका जाए। 

✔️ समाज में संपत्ति-सुरक्षा और निजी अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। 

✔️ ऐसे कार्यों को दंडित किया जाए, जिससे अपराधियों में भय उत्पन्न हो और नागरिकों को न्याय मिले।


❓ Frequently Asked Questions (FAQ)


Q. क्या रिष्टि केवल चोरी को ही कहते हैं?
Ans :- नहीं, रिष्टि का मतलब सिर्फ चोरी नहीं है; यह संपत्ति को जानबूझकर या संभावित नुकसान पहुँचाने वाला अपराध है। 

Q. क्या रिष्टि में पुलिस गिरफ्तारी बिना वारंट कर सकती है?
Ans :- हाँ, यदि नुकसान गंभीर है, तो पुलिस गिरफ्तारी बिना वारंट भी कर सकती है, पर अंतिम निर्णय हमेशा कोर्ट का होता है। 

Q. क्या रिष्टि में पीड़ित और आरोपी आपस में समझौता कर सकते हैं?
Ans :- संभव है, पर यह निर्भर करता है प्रकरण की प्रकृति और कोर्ट के निर्णय पर।


📌 निष्कर्ष


धारा 324 BNS (रिष्टि / Mischief) भारतीय न्याय संहिता का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो संपत्ति-आधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। चाहे वह निजी संपत्ति हो या सार्वजनिक संपत्ति, जो कोई भी जानबूझकर या संभावित रूप से नुकसान पहुँचाता है, वह इस धारा के अन्तर्गत दंडनीय होता है। इसके तत्वों का ज्ञान, उदाहरण और दंड की जानकारी इस लेख में सरल रूप से समझाई गई है।

अगर आप कानून, अदालत या न्याय प्रक्रिया से जुड़ी और जानकारी चाहते हैं, तो मैं और विस्तृत गाइड भी दे सकता हूँ।




अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है


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