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BNS धारा 337 – न्यायालय के अभिलेख या लोक रजिस्टर की कूटरचना | सजा, उदाहरण और पूरी जानकारी
परिचय
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में दस्तावेजों की सत्यता को अत्यधिक महत्व दिया गया है। न्यायालय, तहसील, नगर पालिका और सरकारी विभागों के रिकॉर्ड पर ही नागरिक अधिकार आधारित होते हैं।
यदि इन रिकॉर्डों से छेड़छाड़ हो जाए तो —
▪️गलत व्यक्ति को अधिकार मिल सकता है
▪️निर्दोष व्यक्ति अपराधी बन सकता है
▪️जमीन विवाद बढ़ सकते हैं
▪️न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है
इसी कारण BNS की धारा 337 को एक गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
धारा 337 क्या है?
जब कोई व्यक्ति जानबूझकर न्यायालय के रिकॉर्ड, सरकारी रजिस्टर या सार्वजनिक दस्तावेज को फर्जी बनाता, बदलता या उपयोग करता है — तो यह धारा 337 के अंतर्गत अपराध होता है।
अर्थात
Public Record Forgery = Section 337 BNS
किन दस्तावेजों पर लागू होती है यह धारा?
1. न्यायालय अभिलेख
जजमेंट / आदेश
जमानत आदेश
वॉरंट
केस फाइल
बयान रिकॉर्ड
2. लोक रजिस्टर
जन्म-मृत्यु रजिस्टर
विवाह रजिस्टर
भूमि रिकॉर्ड
राजस्व अभिलेख
नगर पालिका रजिस्टर
3. सरकारी प्रमाणपत्र
जाति प्रमाणपत्र
निवास प्रमाणपत्र
आय प्रमाणपत्र
सरकारी लाइसेंस
सरकारी नियुक्ति दस्तावेज
पूरे लेख के मूल प्रावधान (मूल अधिनियम का पाठ):-
( न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना )
जो कोई ऐसे दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख की, जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना, या सरकार द्वारा जारी किसी पहचान दस्तावेज, जिसके अन्तर्गत पहचान पत्र या आधार कार्ड भी है, या जन्म, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक सेवक द्वारा लोक सेवकके नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र की या ऐसी दस्तावेज की जिसके बारे में यह तात्पर्यित हो कि वह किसी लोक सेवक द्वारा उसकी पदीय हैसियत से रची गई है, या जो किसी वाद को संस्थित करने या वाद में प्रतिरक्षा करने का, उसमें कोई कार्यवाही करने का, या दावा संस्वीकृत कर लेने का, प्राधिकार हो या कोई मुख्तारनामा हो, कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने को भी, दायी होगा।
व्याख्या:- इस धारा के प्रयोजनों के लिए "रजिस्टर" के अन्तर्गत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (द) में परिभाषित इलेक्ट्रानिक रूप में रखी गई कोई सूची, डाटा या किसी प्रविष्टि का अभिलेख भी है।
सजा (Punishment)
सजा:- 7 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना
अपराध:- असंज्ञेय
जमानत:- अजमानतीय
विचारणीय:- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए कोई समझौता या सेटलमेंट संभव नही है।
👉 यह अपराध गंभीर माना जाता है लेकिन आजीवन कारावास नहीं है।
अपराध के आवश्यक तत्व (Ingredients)
धारा 337 लागू होने के लिए अभियोजन को साबित करना होगा:
🔻दस्तावेज सार्वजनिक महत्व का था
🔻उसमें जालसाजी की गई
🔻आरोपी को इसकी जानकारी थी
🔻लाभ या धोखा देने का उद्देश्य था
इन चारों का सिद्ध होना आवश्यक है।
अपराध की प्रकृति
🔸संज्ञेय (Cognizable)
🔸गैर-जमानती (Non-Bailable)
🔸सेशन ट्रायल योग्य
🔸पुलिस सीधे FIR दर्ज कर सकती है।
व्यावहारिक उदाहरण
उदाहरण 1 — जमीन हड़पना
किसी व्यक्ति ने खतौनी में अपना नाम दर्ज करवा लिया जबकि जमीन उसकी नहीं थी।
➡ धारा 337 लागू
उदाहरण 2 — फर्जी जमानत आदेश
किसी आरोपी को छुड़ाने के लिए नकली कोर्ट ऑर्डर बनाया गया।
➡ धारा 337 लागू
उदाहरण 3 — उम्र कम दिखाना
सरकारी नौकरी पाने के लिए जन्म रजिस्टर में बदलाव कराया गया।
➡ धारा 337 लागू
अदालत में साबित कैसे होता है?
कोर्ट सामान्यतः इन साक्ष्यों पर निर्भर करती है:
🔺मूल बनाम फर्जी दस्तावेज तुलना
🔺हैंडराइटिंग विशेषज्ञ रिपोर्ट
🔺डिजिटल रिकॉर्ड जांच
🔺संबंधित अधिकारी की गवाही
🔺रजिस्टर की मूल प्रविष्टि
आरोपी का बचाव (Defense)
आरोपी निम्न आधारों पर बचाव ले सकता है:
◾दस्तावेज उसने नहीं बनाया
◾उसे जालसाजी की जानकारी नहीं थी
◾गलत पहचान
◾रिकॉर्ड पहले से गलत था
लेकिन जानबूझकर बदलाव साबित होने पर दोषसिद्धि लगभग तय हो जाती है।
यह अपराध गंभीर क्यों है?
यह अपराध व्यक्ति के विरुद्ध नहीं बल्कि राज्य के विरुद्ध अपराध माना जाता है।
इससे प्रभावित होते हैं:
▪️न्याय व्यवस्था
▪️प्रशासन
▪️संपत्ति अधिकार
▪️सरकारी योजनाएँ
▪️अर्थात समाज की कानूनी व्यवस्था खतरे में पड़ जाती है।
पुराने कानून से अंतर
पहले IPC में यह अपराध धारा 466 के अंतर्गत आता था।
नए कानून में इसे अधिक स्पष्ट बनाकर BNS धारा 337 में शामिल किया गया है।
निष्कर्ष
BNS धारा 337 सार्वजनिक दस्तावेजों की सुरक्षा की धारा है।
कोर्ट रिकॉर्ड, सरकारी रजिस्टर या प्रमाणपत्र से छेड़छाड़ साधारण गलती नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है।
आज डिजिटल युग में भूमि रिकॉर्ड, आधार आधारित प्रमाणपत्र और ऑनलाइन सरकारी रजिस्टर के कारण इस धारा का महत्व और बढ़ गया है।
यदि कोई व्यक्ति सरकारी रिकॉर्ड में गलत बदलाव करता है — उसे अधिकतम 7 वर्ष तक कारावास हो सकता है।
| (IPC) की धारा 466 को (BNS) की धारा 337 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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