भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 14 इस बात से संबंधित है कि किसी कारोबार (Business) के नियमित अनुक्रम (Course of Business) का अस्तित्व किन परिस्थितियों में न्यायालय के लिए सुसंगत (Relevant) माना जाएगा।
सरल शब्दों में यदि किसी मामले में यह साबित करना हो कि कोई कार्य सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया के अनुसार हुआ होगा या नहीं हुआ होगा, तो उस व्यापारिक प्रक्रिया का नियमित क्रम न्यायालय में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा सकता है।
यह धारा न्यायालय को यह समझने में सहायता करती है कि सामान्य परिस्थितियों में व्यवसाय, कार्यालय, बैंक, डाक विभाग, सरकारी कार्यालय या अन्य संस्थान किस प्रकार कार्य करते हैं।
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):-
BSA 2023 की धारा :- 14. कारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है।
जबकि प्रश्न यह है कि क्या कोई विशिष्ट कार्य किया गया था, तब कारबार के ऐसे किसी भी अनुक्रम का अस्तित्व, जिसके अनुसार वह कार्य स्वभावतः किया जाता, सुसंगत तथ्य है।
उदाहरण:- (क) प्रश्न यह है कि क्या एक विशिष्ट पत्र प्रेषित किया गया था। ये तथ्य कि कारबार का यह साधारण अनुक्रम था कि वे सभी पत्र, जो किसी खास स्थान में रख दिए जाते थे, डाक में डाले जाने के लिए ले जाए जाते थे और कि वह पत्र उस स्थान में रख दिया गया था, सुसंगत हैं।
(ख) प्रश्न यह है कि क्या एक विशिष्ट पत्र जोसेफ को मिला। ये तथ्य कि वह सम्यक् अनुक्रम में डाक में डाला गया था, और कि वह पुनः प्रेषण केन्द्र द्वारा लौटाया नहीं गया था, सुसंगत हैं।
धारा 14 का उद्देश्य
इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब किसी घटना का प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध न हो, तब न्यायालय उस संस्था या व्यक्ति के सामान्य कार्य-व्यवहार (Ordinary Course of Business) को देखकर उचित निष्कर्ष निकाल सके।
उदाहरण के लिए—
• बैंक का लेन-देन कैसे होता है।
• डाक विभाग पत्र कैसे भेजता है।
• सरकारी कार्यालय फाइलों को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं।
• किसी कंपनी में बिल और भुगतान की प्रक्रिया क्या होती है।
यदि यह सिद्ध हो जाए कि संबंधित संस्था हमेशा एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करती है, तो न्यायालय उस प्रक्रिया के आधार पर अनुमान (Presumption) लगा सकता है।
धारा 14 का सरल अर्थ
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कहा कि उसने रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजा था।
यदि डाक विभाग के रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि पत्र सामान्य प्रक्रिया के अनुसार स्वीकार किया गया, पंजीकृत हुआ और भेज दिया गया, तो न्यायालय यह मान सकता है कि डाक विभाग ने अपना नियमित कार्य किया होगा।
इसी प्रकार यदि किसी बैंक के रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज है और बैंक की नियमित प्रक्रिया ऐसी है कि बिना सत्यापन भुगतान नहीं किया जाता, तो यह भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।
कारोबार के अनुक्रम (Course of Business) का अर्थ
कारोबार का अनुक्रम वह नियमित प्रक्रिया है जिसका पालन कोई संस्था, विभाग, कंपनी या व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों में करता है।
उदाहरण—
• बिल बनाना
• भुगतान करना
• चालान जारी करना
• स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि करना
• बैंक एंट्री करना
• रजिस्टर्ड डाक भेजना
• सरकारी फाइल पर नोटिंग करना
• कार्यालय डायरी में पत्र दर्ज करना
यदि यह सिद्ध हो जाए कि यह कार्य हमेशा इसी क्रम में होता है, तो वह न्यायालय में प्रासंगिक (Relevant) हो सकता है।
न्यायालय में इसका महत्व
धारा 14 का उपयोग विशेष रूप से निम्न मामलों में होता है—
• दीवानी वाद (Civil Cases)
• आपराधिक मुकदमे (Criminal Cases)
• बैंकिंग विवाद
• बीमा विवाद
• कंपनी विवाद
• सरकारी विभागों के रिकॉर्ड
• चेक एवं भुगतान विवाद
• टैक्स संबंधी मामले
• अनुबंध (Contract) विवाद
उदाहरण:- (1) राम ने दावा किया कि उसने कंपनी को भुगतान कर दिया था। कंपनी के अकाउंट विभाग ने रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जिसमें यह दर्शाया गया कि भुगतान प्राप्त होने पर हमेशा कंप्यूटर में एंट्री होती है और रसीद जारी होती है। यदि संबंधित भुगतान की एंट्री मौजूद है, तो यह सामान्य कारोबारी प्रक्रिया का प्रमाण होगा।
उदाहरण:- (2) किसी व्यक्ति ने कहा कि उसे कानूनी नोटिस प्राप्त नहीं हुआ। दूसरी ओर डाक विभाग का रिकॉर्ड बताता है कि पत्र रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा भेजा गया तथा सामान्य प्रक्रिया के अनुसार वितरित किया गया ऐसी स्थिति में न्यायालय धारा 14 के आधार पर उस नियमित प्रक्रिया को महत्वपूर्ण मान सकता है।
उदाहरण:- (3) एक बैंक कर्मचारी पर आरोप लगाया गया कि उसने बिना अनुमति धनराशि निकाल दी। बैंक यह साबित करता है कि उसके यहां प्रत्येक भुगतान से पहले—
• ग्राहक का सत्यापन होता है।
• हस्ताक्षर मिलाए जाते हैं।
• कंप्यूटर एंट्री होती है।
• अधिकारी की अनुमति ली जाती है।
यह नियमित प्रक्रिया न्यायालय के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है।
धारा 14 के प्रमुख तत्व
इस धारा के अंतर्गत निम्न बातें महत्वपूर्ण होती हैं—
• नियमित व्यापारिक प्रक्रिया का होना।
• उस प्रक्रिया का लंबे समय से पालन होना।
• रिकॉर्ड का विश्वसनीय होना।
• प्रक्रिया सामान्य परिस्थितियों में अपनाई जाती हो।
• न्यायालय का यह संतुष्ट होना कि प्रक्रिया वास्तविक है।
किन मामलों में यह धारा लागू हो सकती है?
धारा 14 निम्न प्रकार के मामलों में विशेष रूप से उपयोगी है—
• बैंक रिकॉर्ड
• ई-मेल रिकॉर्ड
• कंपनी के अकाउंट
• सरकारी कार्यालयों की फाइलें
• अस्पताल के रिकॉर्ड
• स्कूल का प्रवेश रजिस्टर
• डाक विभाग का रिकॉर्ड
• ऑनलाइन ट्रांजैक्शन
• डिजिटल भुगतान
• ई-कॉमर्स ऑर्डर रिकॉर्ड
डिजिटल युग में धारा 14 का महत्व
आज अधिकांश कारोबार ऑनलाइन हो चुका है।
अब न्यायालय निम्न डिजिटल रिकॉर्ड पर भी विचार कर सकता है—
• UPI भुगतान
• नेट बैंकिंग रिकॉर्ड
• ई-मेल लॉग
• सर्वर लॉग
• ERP सिस्टम
• GST पोर्टल रिकॉर्ड
• ई-इनवॉइस
• डिजिटल रसीदें
यदि यह सिद्ध हो जाए कि ये रिकॉर्ड नियमित कारोबारी प्रक्रिया के अंतर्गत स्वतः तैयार होते हैं, तो उनका साक्ष्य मूल्य काफी बढ़ जाता है।
BSA 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में अंतर
BSA 2023 की धारा 14 का मूल सिद्धांत पुराने Indian Evidence Act, 1872 के समान है, लेकिन नए कानून में डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और आधुनिक व्यापारिक प्रणालियों के महत्व को अधिक प्रभावी रूप से स्वीकार किया गया है।
इससे ऑनलाइन बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और डिजिटल व्यापार से जुड़े मामलों में न्यायालय को अधिक स्पष्ट आधार प्राप्त होता है।
अधिवक्ताओं के लिए महत्व
वकीलों के लिए यह धारा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि—
• बैंक रिकॉर्ड सिद्ध करने में सहायता मिलती है।
• सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता स्थापित होती है।
• कंपनी रिकॉर्ड प्रस्तुत करना आसान होता है।
• इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की उपयोगिता बढ़ती है।
• परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) को मजबूत किया जा सकता है।
न्यायालय किन बातों पर ध्यान देता है?
न्यायालय सामान्यतः निम्न बातों की जांच करता है—
• क्या प्रक्रिया नियमित थी?
• क्या रिकॉर्ड वास्तविक है?
• क्या रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ हुई है?
• क्या संस्था लंबे समय से यही प्रक्रिया अपनाती रही है?
• क्या रिकॉर्ड अन्य साक्ष्यों से मेल खाता है?
निष्कर्ष
BSA 2023 की धारा 14 न्यायालय को यह समझने में सहायता करती है कि किसी संस्था, व्यवसाय, बैंक या सरकारी कार्यालय की नियमित कार्यप्रणाली (Course of Business) क्या है और क्या विवादित घटना उसी सामान्य प्रक्रिया के अनुसार हुई थी। जब प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं होते, तब नियमित कारोबारी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड न्यायालय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाते हैं। आधुनिक डिजिटल युग में इस धारा का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि अधिकांश लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए जाते हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions)
प्रश्न 1. BSA 2023 की धारा 14 किस विषय से संबंधित है?
उत्तर: यह धारा कारोबार या व्यवसाय के नियमित अनुक्रम (Course of Business) के अस्तित्व की सुसंगतता से संबंधित है।
प्रश्न 2. कारोबार का अनुक्रम क्या होता है?
उत्तर:- किसी संस्था या व्यवसाय द्वारा प्रतिदिन अपनाई जाने वाली नियमित कार्यप्रणाली को कारोबार का अनुक्रम कहते हैं।
प्रश्न 3. क्या बैंक रिकॉर्ड इस धारा के अंतर्गत सुसंगत हो सकते हैं?
उत्तर:- हाँ, यदि वे बैंक की सामान्य और नियमित प्रक्रिया के अनुसार तैयार किए गए हों।
प्रश्न 4. क्या डिजिटल रिकॉर्ड भी इस धारा के अंतर्गत महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:- हाँ, UPI, ई-मेल, नेट बैंकिंग, सर्वर लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड नियमित कारोबारी प्रक्रिया का हिस्सा होने पर महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
प्रश्न 5. न्यायालय इस धारा का उपयोग कब करता है?
उत्तर:- जब किसी घटना को नियमित कारोबारी प्रक्रिया के आधार पर समझना या सिद्ध करना आवश्यक हो।
(IEA) की धारा 16 को (BSA) की धारा 14 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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