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धारा 144 BNSS अधिवक्ता प्रशिक्षण मैनुअल: मेंटेनेंस केस की पूरी कोर्ट प्रक्रिया, ट्रायल, साक्ष्य एवं जिरह

धारा 144 BNSS भरण-पोषण अधिवक्ता प्रशिक्षण मैनुअल की कोर्ट प्रक्रिया दर्शाती न्याय का तराजू और गैवल की कॉपीराइट फ्री इमेज।
काल्पनिक चित्र

यदि आपका उद्देश्य अधिवक्ता के रूप में धारा 144 BNSS (पूर्व धारा 125 CrPC) का मुकदमा लड़ना सीखना है, तो केवल कानून जानना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी आवश्यक है कि किस तारीख पर क्या करना है, कौन-सा आवेदन कब देना है, कौन-सा दस्तावेज कब पेश करना है, किस गवाह से क्या कहलवाना है और जिरह कैसे करनी है।

नीचे एक व्यावहारिक (Practical) कोर्ट ट्रायल दिया जा रहा है, जैसा वास्तविक न्यायालय में होता है।


पहला चरण – क्लाइंट से पहली मुलाकात

यदि पत्नी आपके पास आती है, तो सबसे पहले ये जानकारी लें:

• विवाह कब हुआ? 

• बच्चे कितने हैं? 

• कब से अलग रह रही है? 

• अलग होने का कारण क्या है? 

• पति कहाँ रहता है? 

• पति की नौकरी या व्यवसाय क्या है? 

• अनुमानित मासिक आय कितनी है? 

• पत्नी की अपनी आय है या नहीं? 

• पहले कोई मुकदमा चल रहा है या नहीं (DV Act, 498A, HMA आदि)? 

आवश्यक दस्तावेज:- 

• विवाह का प्रमाण 

• आधार कार्ड 

• बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र 

• पति की नौकरी या व्यवसाय का कोई प्रमाण 

• बैंक स्टेटमेंट 

• खर्च का विवरण 

• स्कूल फीस 

• मेडिकल बिल


दूसरा चरण – याचिका तैयार करना

याचिका में केवल कहानी नहीं लिखनी है। उसमें कानूनी आधार भी देना है।

उदाहरण:- 

• विवाह सिद्ध है। 

• पति सक्षम है। 

• पत्नी स्वयं का पालन नहीं कर सकती। 

• पति ने उपेक्षा की। 

Maintenance दिलाया जाए। 

अंत में प्रार्थना

• ₹30,000 प्रति माह 

• अंतरिम Maintenance 

• मुकदमा खर्च 

• अन्य उचित राहत


तीसरा चरण – Filing

• फाइलिंग काउंटर


• Scrutiny


• कमियां दूर करना


• रजिस्ट्रेशन


• कोर्ट नंबर आवंटित


• पहली तारीख


चौथा चरण – पहली तारीख

कोर्ट नोटिस भेजता है।

• "Notice Issue" अधिवक्ता को देखना चाहिए सही पता है?, मोबाइल नंबर है?, ईमेल है?, RPAD कराया गया? 

यदि पता गलत है तो नोटिस कभी सर्व नहीं होगा।



पाँचवाँ चरण – Notice Serve

यदि प्रतिवादी नहीं आया तब

• Fresh Notice (फिर से नोटिस)

• RPAD 

• Dasti 

• Substitute Service 

आवश्यक होने पर समाचार पत्र में प्रकाशन (Publication) की प्रार्थना भी की जा सकती है।


छठा चरण – Written Statement

अब पति उत्तर देगा। यहीं से केस की असली रणनीति शुरू होती है। आपको उत्तर पढ़कर देखना है—

• कौन-कौन से तथ्य स्वीकार किए गए? 

• कौन-से तथ्य नकारे गए? 

• कौन-सा नया बचाव लिया गया? 

उदाहरण

● पति लिखता है

● "पत्नी स्वयं नौकरी करती है।"

अब आपको नौकरी न करने के प्रमाण जुटाने होंगे।


सातवाँ चरण – Interim Maintenance

यहीं अधिकांश अधिवक्ता गलती करते हैं। केवल आवेदन नहीं देना है। बल्कि पति की आय का अनुमान 

• Lifestyle 

• Social Media 

• Car 

• Property 

• GST 

• Income Tax 

• Company Details 

सभी रिकॉर्ड जुटाने चाहिए। यदि आय सिद्ध नहीं है
तब भी Lifestyle से आय साबित की जा सकती है।


आठवाँ चरण – Evidence Affidavit

पत्नी का मुख्य साक्ष्य शपथपत्र के रूप में दाखिल होता है। इसमें प्रत्येक तथ्य क्रमवार लिखा जाता है।

उदाहरण:- 

• विवाह 

• बच्चे 

• अलग रहना 

• मारपीट 

• खर्च 

• पति की आय 

वर्तमान कठिनाई


नौवाँ चरण – Exhibit

अब दस्तावेज Exhibit होंगे। अधिवक्ता को देखना चाहिए कोई दस्तावेज बिना Exhibit न रह जाए।


दसवाँ चरण – Cross Examination

यहीं केस जीता या हारा जाता है। यदि आप पत्नी की ओर से हैं तो पति से पूछिए

• कितनी आय है? 

• बैंक खाते कितने हैं? 

• ITR दाखिल करते हो? 

• कितनी जमीन है? 

• कितनी दुकानें हैं? 

• कितने वाहन हैं? 

• बच्चों की फीस कौन देता है? 

• LIC कितनी है? 

• यदि वह झूठ बोलता है

• बाद में दस्तावेज से पकड़िए।


ग्यारहवाँ चरण – Husband Evidence

अब पति गवाही देगा। यहीं उसका झूठ पकड़ना होता है।

उदाहरण:- वह कहता है "मेरी आय केवल ₹10,000 है।" लेकिन Car है,  House Loan चल रहा है, Income Tax देता है, विदेश घूम चुका है तो उसकी विश्वसनीयता समाप्त हो सकती है।


बारहवाँ चरण – Summoning Record

यदि आय छिपाई जा रही हो तो आवेदन देकर मंगाइए

• Salary Record 

• Bank Statement 

• Income Tax Return 

• GST 

• EPFO 

• ESIC 

• Property Record 

• Electricity Bill 

• Vehicle Registration 

• Employer Record


तेरहवाँ चरण – Final Argument

बहस का क्रम:- 

पहला:- विवाह सिद्ध।

दूसरा:- पति सक्षम।

तीसरा:- पत्नी निर्भर।

चौथा:- पति ने Maintenance नहीं दिया।

पाँचवाँ:- Supreme Court के सिद्धांत लागू।

छठा:- उचित राशि निर्धारित की जाए।


चौदहवाँ चरण – Judgment

कोर्ट देखती है

• Income 

• Need 

• Dependency 

• Conduct 

• Documents 

• Cross Examination 

फिर राशि तय करती है।


पंद्रहवाँ चरण – Execution

यदि पति पैसा नहीं देता तो तुरंत प्रवर्तन (Execution/Enforcement) की कार्यवाही करें।

संभावित कदम:- 

• Recovery Warrant 

• Salary Attachment 

• Property Attachment (जहाँ लागू हो) 

BNSS के प्रावधानों के अनुसार डिफॉल्ट पर दंडात्मक कार्यवाही का अनुरोध


चरण 16 – Revision

यदि किसी पक्ष को आदेश से असंतोष हो तो वह BNSS के प्रासंगिक पुनरीक्षण (Revision) प्रावधानों के अंतर्गत सत्र न्यायालय या उपयुक्त उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है। 


एक सफल अधिवक्ता की रणनीति

• पहले दिन से आय के प्रमाण जुटाएँ। 

• केवल मौखिक आरोपों पर निर्भर न रहें। 

• प्रतिपक्ष के दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण करें। 

• जिरह छोटे, स्पष्ट और तथ्यपरक प्रश्नों से करें। 

• विरोधाभासों को नोट करके अंतिम बहस में प्रमुखता से रखें। 
• अंतरिम भरण-पोषण की सुनवाई को उतनी ही गंभीरता से लें जितनी अंतिम सुनवाई को।


एक सामान्य टाइमलाइन

• आवेदन दाखिल 

• केस पंजीकरण 

• नोटिस जारी 

• नोटिस की तामील 

• प्रतिवादी की उपस्थिति 

• लिखित जवाब 

• प्रत्युत्तर (यदि हो) 

• अंतरिम भरण-पोषण पर आदेश 

• पत्नी का साक्ष्य 

• जिरह 

• पति का साक्ष्य 

• जिरह 

• अंतिम बहस 

• निर्णय 

• आदेश का पालन/वसूली 

संशोधन (धारा 146) या प्रवर्तन (धारा 147), यदि आवश्यक हो।



📘 धारा 144 BNSS के अंतर्गत पत्नी, बच्चों और माता-पिता द्वारा भरण-पोषण (Maintenance) का दावा किया जाता है। यह एक Summary Proceeding है, इसलिए इसकी प्रक्रिया सामान्य दीवानी मुकदमों से कुछ सरल और तेज होती है। और आवेदन प्रक्रिया। आसान प्रारूप, PDF

BNSS में नोटिस की तामील के बाद आवेदन के निस्तारण के लिए 60 दिन का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। आप इसे ऑनलाइन देख सकते हैं तथा डाउनलोड भी कर सकते हैं। ✍️⚖️



अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

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