पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):-
(बालक को अश्लील वस्तुओं का विक्रय, आदि.)
जो कोई, किसी बालक को कोई ऐसी अश्लील वस्तु, जो धारा 294 में निर्दिष्ट है, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरण करेगा, प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसा करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करेगा प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।
🔆 BNS धारा 295 – बच्चों को अश्लील वस्तुएँ देने/बेचने पर सजा | पूरी जानकारी :-
धारा 295 Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 के तहत एक महत्वपूर्ण कानून है जिसका उद्देश्य बच्चों को अश्लील सामग्री से बचाना है। यह धारा विशेष रूप से उन कृत्यों को अपराध मानती है जिसमें कोई व्यक्ति नाबालिग (18 वर्ष से कम) को कोई अश्लील वस्तु बेचता, वितरित करता, प्रदर्शित करता या दिखाता है।
🔎 धारा 295: कानूनी पाठ (Legal Text) :-
“यथा कोई भी व्यक्ति किसी भी नाबालिग को ऐसी अश्लील वस्तु बेचता है, किराए पर देता है, वितरित करता है, प्रदर्शित करता है, या उसके पास पहुँचाता है, या ऐसा करने का प्रयास या प्रस्ताव करता है, तो वह अपराध माना जाएगा।”
यह धारा अश्लील वस्तुओं का दायरा फिजिकल और डिजिटल दोनों रूपों में लागू करती है।
🧠 धारा 295 का उद्देश्य (Purpose) :-
धारा 295 का मुख्य लक्ष्य है:
✅ बच्चों की रक्षा – 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को अश्लील सामग्री से बचाना
✅ सामाजिक नैतिकता बनाए रखना
✅ सामग्री प्रदर्शकों और वितरकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना
✔️ यह धारा बच्चों को मानसिक और नैतिक रूप से प्रभावित करने वाली सामग्री के प्रसार को रोकती है।
🚫 क्या अपराध माना जाता है? :-
धारा 295 के तहत निम्न कार्य अपराध हैं:
✔️ किसी नाबालिग को अश्लील पुस्तक, पत्रिका, वीडियो देना
✔ अश्लील चीज़ों का किराए पर देना
✔ ऐसी सामग्री को दिखाना या प्रदर्शित करना
✔ बच्चों को अश्लील वस्तु दिखाने के लिए कोशिश/प्रस्ताव करना
✔ ऑनलाइन अश्लील सामग्री भेजना या प्रचार करना
✔ किसी भी प्रकार से अश्लील सामग्री का वितरण
यह सिर्फ वस्तु देने तक ही सीमित नहीं है – प्रयास या प्रस्ताव करना भी दंडनीय है।
⚖️ दंड और सजा (Punishment Under Section 295) :-
सजा:- प्रथम दोषसिद्धि पर 3 वर्ष के लिए कारावास और 2,000 रुपए का जुर्माना, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, 7 वर्ष के लिए कारावास और 5,000 रुपए का जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।
👉 यह सजा बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति सख्त रवैये को दर्शाती है।
👶 “अश्लील वस्तु” का अर्थ :-
धारा 295 में “अश्लील वस्तु” से अभिप्राय वे सभी सामग्री या वस्तुएँ हैं जो:
📌 कामवासना को बढ़ावा देती हैं
📌 बच्चों के नैतिक या मानसिक विकास को नुकसान पहुँचा सकती हैं
📌 शालीनता और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ मानी जाती हैं
इनमें किताबें, चित्र, डिजिटल फाइलें, वीडियो, पोस्टर और अन्य रिप्रेजेंटेशन शामिल हैं।
📊 व्यावहारिक उदाहरण (Examples)
✔️ किसी स्टोर पर अश्लील कॉमिक्स को नाबालिग को बेचना
✔ स्कूल परिसर के पास अश्लील पोस्टर दिखाना
✔ वेबसाइट द्वारा अश्लील वीडियो को बच्चों को भेजना
✔ सोशल मीडिया पर अश्लील चित्रों को 18 से कम उम्र के लोगों के लिए प्रचारित करना
📌 महत्व और सामाजिक प्रभाव:-
▪️बच्चों की सुरक्षा बढ़ती है
▪️माता-पिता को बच्चों का संरक्षण करने का अधिकार
▪️अश्लीलता के प्रसार को रोकता है
▪️डिजिटल युग में बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाता है
📄 निष्कर्ष :-
BNS धारा 295 एक सख्त और प्रभावी कानून है जो बच्चों को अश्लीलता से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह धारा सिर्फ वस्तु को बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी प्रकार से अश्लील सामग्री बच्चों तक पहुँचाने वाला कार्य अपराध मानती है।
(IPC) की धारा 293 को (BNS) की धारा 295 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

