📕 पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):-
(अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि)
(1) उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए किसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र रंगचित्र, रूपण, आकृति या अन्य वस्तु जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक प्ररूप में किसी अंतर्वस्तु का प्रदर्शन भी है, को अश्लील समझा जाएगा यदि वह कामोद्दीपक है या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहां उसमें दो या अधिक सुभिन्न मदें समाविष्ट हैं वहां) उसकी किसी मद का प्रभाव, समग्र रूप से विचार करने पर, ऐसा है जो उन व्यक्तियों को दुराचारी तथा भ्रष्ट बनाए जिसके द्वारा उसमें अन्तर्विष्ट या सन्निविष्ट विषय का पढ़ा जाना, देखा जाना या सुना जाना सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सम्भाव्य है।
(2) जो कोई-
(क) किसी अश्लील पुस्तक, पुस्तिका, कागज, किसी रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति या किसी भी अन्य अश्लील वस्तु को, चाहे वह किसी भी रीतियों में कुछ भी हो, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरित करेगा, लोक प्रदर्शित करेगा, या उसको किसी भी प्रकार परिचालित करेगा, या उसे विक्रय, भाड़े, वितरण, लोक प्रदर्शन या परिचालन के प्रयोजनों के लिए रचेगा, उत्पादित करेगा, या अपने कब्जे में रखेगा;
या
(ख) किसी अश्लील वस्तु का आयात या निर्यात या प्रवहण पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए करेगा या यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि ऐसी वस्तु बेची, भाड़े पर दी, वितरित या लोक प्रदर्शित या, किसी प्रकार से परिचालित की जाएगी; या
(ग) किसी ऐसे कारबार में भाग लेगा या उससे लाभ प्राप्त करेगा, जिस कारबार में वह यह जानता है या यह विश्वास करने का कारण रखता है कि कोई ऐसी अश्लील वस्तु पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए रची जातीं, उत्पादित की जातीं, क्रय की जातीं, रखी जातीं, आयात की जातीं, निर्यात की जातीं, प्रवहण की जातीं, लोक प्रदर्शित की जातीं या किसी भी प्रकार से परिचालित की जातीं हैं; या
(घ) यह विज्ञापित करेगा या किन्हीं साधनों द्वारा वे चाहे कुछ भी हों यह ज्ञात कराएगा कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य में, जो इस धारा के अधीन अपराध है, लगा हुआ है, या लगने के लिए तैयार है, या यह कि कोई ऐसी अश्लील वस्तु किसी व्यक्ति से या किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त की जा सकती है; या
(ङ) किसी ऐसे कार्य को, जो इस धारा के अधीन अपराध है, करने की प्रस्थापना करेगा या करने का प्रयत्न करेगा,
प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।
अपवाद. - इस धारा का विस्तार निम्नलिखित पर नहीं होगा:-
(क) किसी ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति-
(i) जिसका प्रकाशन लोकहित में होने के कारण इस आधार पर न्यायोचित साबित हो गया है कि ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या या सर्वजन सम्बन्धी अन्य उद्देश्यों के हित में है; या
(ii) जो सद्भावपूर्वक धार्मिक प्रयोजनों के लिए रखी या उपयोग में लाई जाती है,
(ख) कोई ऐसा रूपण जो,-
(i) प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (1958 का 24) के अर्थ में प्राचीन संस्मारक पर या उसमें, या
(ii) किसी मंदिर पर या उसमें या मूर्तियों के प्रवहण के उपयोग में लाए जाने वाले या किसी धार्मिक प्रयोजन के लिए रखे या उपयोग में लाए जाने वाले किसी रथ पर,
तक्षित, उत्कीर्ण, रंगचित्रित या अन्यथा रूपित हों।
⭕ अश्लीलता की परिभाषा (Meaning of Obscene):-
🔸“अश्लील” वह सामग्री है जो कामोत्तेजक (prurient) इच्छाओं को उकसाती है,
🔸लैसिवियस (lascivious) हो, या
🔸सामग्रियों को एक साथ मिलाकर प्रकाशित करने पर ऐसी प्रभावशीलता हो जो लोगों के नैतिक मूल्य कम कर दे एवं उन्हें भ्रष्ट कर दे, खासकर उन लोगों को जो सामग्री को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना रखते हों।
📍 धारा 294 के अंतर्गत अपराध क्या है? :-
धारा 294 के अंतर्गत निम्नलिखित कृत्य अपराध माने जाते हैं:
1. किसी भी अश्लील पुस्तक, पत्रिका, पम्फलेट, चित्र, लेख या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का विक्रय।
2. ऐसी सामग्री को किराये पर देना, वितरित करना, सार्वजनिक प्रदर्शन करना या परिचालित करना।
3. ऐसे वस्तुओं को उत्पादित, बनाना या रखने का प्रयास।
4. आयात/निर्यात या परिवहन करना जब व्यक्ति जानता हो या मान लेकर चले कि यह अश्लील सामग्री के रूप में बिकेगा।
5. ऐसे व्यवसाय में लाभ लेना या भाग लेना जहाँ अश्लील सामग्री बनाई/वितरित/प्रदर्शित होती हो।
6. इसके लिए प्रचार या विज्ञापन करना कि यह अश्लील सामग्री उपलब्ध है।
📊 दंड (Punishment):-
सजा:- प्रथम दोषसिद्धि पर 2 वर्ष के लिए कारावास और 5,000 रुपए का जुर्माना, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, 5 वर्ष के लिए कारावास और 10,000 रुपए का जुर्माना
अपराध:- संज्ञेय
जमानत:- जमानतीय
विचारणीय:- कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
अशमनीय:- अशमनीय का मतलब है, ऐसा अपराध जिसके लिए समझौता नहीं किया जा सकता हैं।
📌 अपवाद (Exceptions) :-
धारा 294 लागू नहीं होगी यदि:
✔️ वह पुस्तक/चित्र/प्रतिनिधित्व वैज्ञानिक, साहित्यिक, कला या सीख के हित में तथा सार्वजनिक भलाई के कारण प्रकाशित किया गया हो।
✔️ वह सामग्री धार्मिक उद्देश्य से वास्तविक रूप से रखी या उपयोग की गई हो।
✔️ किसी प्राचीन स्मारक या धार्मिक स्थल में बनी पुरातन कलाकृतियाँ इस धारा के अंतर्गत नहीं आतीं।
📌 डिजिटल सामग्री भी शामिल:-
यह धारा इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध अश्लील सामग्री को भी कवर करती है — जैसे ई-बुक, वेबसाइट पर अश्लील चित्र/लेख आदि
📌 उद्देश्य को जानना जरूरी:-
यदि व्यक्ति जानता है या कारण-सम्बंधित विश्वास रखता है कि सामग्री अश्लील है और बिक्री/वितरण/प्रदर्शन किया जाएगा, तो यह अपराध माना जाएगा।
📌 व्यापार में लाभ लेना भी अपराध:-
केवल सामान बेचना ही नहीं, बल्कि ऐसे व्यापार में भाग लेना या लाभ कमाना भी दंडनीय है।
📌 सार:-
BNS Section 294 यह स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी अश्लील पुस्तक, पत्रिका, लेख, चित्र या डिजिटल सामग्री का विक्रय, वितरण, प्रदर्शन या परिचालन करना अपराध है, जब तक वह **वैज्ञानिक, साहित्यिक, कला, शिक्षा या धार्मिक कारणों से वैध रूप से प्रकाशित नहीं किया गया हो। इस अपराध पर दो वर्ष तक जेल और ₹5,000 तक जुर्माना है, और पुनः दोषसिद्धि पर पांच वर्ष तक जेल और ₹10,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
📌 मुख्य बिंदु:-
∆ BNS धारा 294 अश्लील पुस्तकों, लेखों, चित्रों या किसी भी अश्लील सामग्री के विक्रय, वितरण, प्रदर्शन और प्रसारण को अपराध मानती है।
∆ यह डिजिटल और प्रिंट दोनों रूप में लागू होती है।
∆ पहली बार दोषी पाए जाने पर 2 साल तक कैद और ₹5,000 तक जुर्माना, और पुनः दोषसिद्धि पर 5 साल तक कैद और ₹10,000 तक जुर्माना हो सकता है।
वैज्ञानिक, साहित्यिक, कला, शिक्षा या धार्मिक उद्देश्यों वाली सामग्री को इससे बाहर रखा गया है
(IPC) की धारा 292 को (BNS) की धारा 294 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: सलाह सहित यह प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

