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Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) 2026: NDPS केस में 3 साल से अधिक हिरासत पर मिली जमानत, जानिए हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) 2026: NDPS केस में 3 साल से अधिक हिरासत पर मिली जमानत, जानिए हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
काल्पनिक चित्र


Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) 2026: NDPS केस में जमानत का महत्वपूर्ण फैसला

Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) & Anr. वर्ष 2026 का NDPS Act से संबंधित एक महत्वपूर्ण जमानत फैसला है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 मई 2026 को BAIL APPLN. 1455/2026 में नियमित जमानत प्रदान करते हुए लंबी अवधि की न्यायिक हिरासत, Article 21 के अधिकार तथा कथित बरामदगी में स्वतंत्र गवाह और फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी के अभाव जैसे पहलुओं पर विचार किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Prateek Jalan ने की।


क्या था मामला?

आरोपी के विरुद्ध NDPS Act की धारा 20 के तहत FIR दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार उसके पास से गांजा बरामद किया गया और कुल बरामदगी commercial quantity की श्रेणी में आती थी। इसलिए जमानत के मामले में Section 37 NDPS Act की कठोर शर्तें लागू थीं। अभियोजन ने इसी आधार पर जमानत का विरोध किया।

आरोपी की ओर से यह महत्वपूर्ण तर्क रखा गया कि कथित seizure किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह की उपस्थिति में नहीं हुआ था और बरामदगी की photography या videography भी नहीं की गई थी। इसके अतिरिक्त आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय से हिरासत में था और 17 अभियोजन गवाहों में से केवल 9 गवाहों की गवाही पूरी हुई थी।


Section 37 NDPS Act और Article 21

दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि commercial quantity के कारण Section 37 NDPS Act की कठोर शर्तें लागू होती हैं। हालांकि, Court ने यह भी स्पष्ट किया कि Section 37 को इस प्रकार लागू नहीं किया जा सकता जिससे संविधान के Article 21 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हो।

Court ने लंबी pre-trial custody और trial के शीघ्र समाप्त होने की संभावना को महत्वपूर्ण माना। इस संदर्भ में Mohd. Muslim v. State (NCT of Delhi), Dheeraj Kumar Shukla v. State of Uttar Pradesh और Rabi Prakash v. State of Odisha जैसे निर्णयों के सिद्धांतों पर विचार किया गया।


Public Witness और Videography क्यों महत्वपूर्ण रहे?

इस मामले में कथित recovery के समय कोई स्वतंत्र public witness शामिल नहीं किया गया था। साथ ही seizure की photography या videography भी नहीं हुई थी।

Court ने Bantu v. State Govt. of NCT of Delhi के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए माना कि केवल photography या videography का अभाव अपने-आप prosecution case को समाप्त नहीं करता, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार यह bail के स्तर पर prosecution की recovery की विश्वसनीयता पर विचार करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

विशेष रूप से जब recovery public place के आसपास हुई हो और फिर भी स्वतंत्र गवाह उपलब्ध न कराया गया हो, तो Court ऐसे तथ्य को सावधानीपूर्वक देख सकता है।


हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

दिल्ली हाई कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को नियमित जमानत प्रदान कर दी। Court ने ₹50,000 के bail bond और समान राशि की एक surety सहित कई शर्तें लगाईं। आरोपी को प्रत्येक तारीख पर Court में उपस्थित रहने, गवाहों से संपर्क या उन्हें प्रभावित न करने तथा evidence से छेड़छाड़ न करने जैसी शर्तों का पालन करना था।


NDPS Bail में इस फैसले का महत्व

यह फैसला यह बताता है कि commercial quantity होने मात्र से हर परिस्थिति में जमानत असंभव नहीं हो जाती। Section 37 के साथ-साथ Court आरोपी की custody की अवधि, trial की प्रगति, recovery की परिस्थितियों और Article 21 के संवैधानिक अधिकार को भी देख सकता है।

हालांकि इस निर्णय को हर NDPS मामले में स्वतः लागू नहीं माना जा सकता। जमानत का निर्णय प्रत्येक मामले के facts, recovery, quantity, Section 37 की आवश्यकताओं और trial की स्थिति पर निर्भर करेगा।


निष्कर्ष: 

Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) 2026 NDPS bail मामलों में विशेष रूप से तब उपयोगी हो सकता है जब आरोपी लंबे समय से custody में हो, trial धीमी गति से चल रहा हो और कथित recovery के समर्थन में स्वतंत्र public witness तथा photography/videography जैसी corroborative सामग्री उपलब्ध न हो।

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दिल्ली हाई कोर्ट निर्णय PDF

Sarfaraj v. State (NCT of Delhi) 2026 NDPS Bail Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने Section 37 NDPS के बावजूद लंबी हिरासत, Article 21 और recovery में public witness व videography की कमी को देखते हुए जमानत दी। एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारी एक ही PDF में उपलब्ध है।

📘 PDF ऑनलाइन देखें

नीचे दिए गए PDF Viewer में दस्तावेज़ को ऑनलाइन पढ़ें। आवश्यकता होने पर नीचे दिए गए बटन से PDF डाउनलोड भी कर सकते हैं।

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