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BSA Section 24 in Hindi || सह-अभियुक्त की संस्वीकृति का कानून एवं प्रभाव

BSA Section 24 in Hindi || सह-अभियुक्त की संस्वीकृति का कानून एवं प्रभाव
 सह-अभियुक्त की संस्वीकृति का कानून एवं प्रभाव

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 24: सह-अभियुक्त की संस्वीकृति का कानूनी प्रभाव 


भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में साक्ष्य का अत्यधिक महत्व होता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 24 यह प्रावधान करती है कि जब किसी अपराध के लिए एक से अधिक व्यक्तियों का संयुक्त विचारण (Joint Trial) हो रहा हो, और उनमें से कोई एक अभियुक्त अपनी तथा अन्य सह-अभियुक्तों की संस्वीकृति (Confession) करता है, तो न्यायालय उस संस्वीकृति को किस प्रकार विचार में ले सकता है।

यह धारा पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 30 का नया और विस्तृत रूप है। 


Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):- साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना- 

जबकि एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित हैं तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध तथा ऐसे संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विचार में ले सकेगा।

स्पष्टीकरण 1.- इस धारा में प्रयुक्त "अपराध" शब्द के अन्तर्गत उस अपराध का दुष्प्रेरण या उसे करने का प्रयत्न आता है।

स्पष्टीकरण 2.- एक से अधिक व्यक्तियों का विचारण किसी ऐसे अभियुक्त की अनुपस्थिति में किया जाता है, जो भगौड़ा है या जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 के अधीन जारी उ‌द्घोषणा का अनुपालन करने में असफल रहता है, इस धारा के प्रयोजन के लिए संयुक्त विचारण समझा जाएगा।

उदाहरण:- (क) रामू और सोहन को मोहन की हत्या के लिए संयुक्ततः विचारित किया जाता है यह साबित किया जाता है कि रामू ने कहा, "सोहन और मैंने मोहन की हत्या की है।" सोहन के विरुद्ध इस संस्वीकृति के प्रभाव पर न्यायालय विचार कर सकेगा।

(ख) सूरज की हत्या करने के लिए राधे का विचारण हो रहा है। यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य है कि सूरज की हत्या राधे और जगदीश द्वारा की गई थी कि जगदीश ने कहा था कि "राधे और मैंने सूरज की हत्या की है।" न्यायालय इस कथन को राधे के विरुद्ध विचारार्थ नहीं ले सकेगा, क्योंकि जगदीश संयुक्ततः विचारित नहीं हो रहा है।


BSA की धारा 24 का मुख्य प्रावधान 

BSA की धारा 24 के अनुसार, जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों पर एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारण किया जा रहा हो और उनमें से किसी एक अभियुक्त द्वारा स्वयं को तथा अन्य सह-अभियुक्तों को प्रभावित करने वाली संस्वीकृति सिद्ध (Proved) हो जाती है, तो न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ अन्य सह-अभियुक्तों के विरुद्ध भी विचार में ले सकता है।


धारा 24 की मुख्य आवश्यकताएँ (Essential Conditions)

संयुक्त विचारण (Joint Trial):- सभी अभियुक्तों का विचारण एक साथ और एक ही अदालत में होना अनिवार्य है।

समान अपराध (Same Offence):- सभी व्यक्तियों पर एक ही अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा रहा हो। 

खुद और दूसरों को प्रभावित करना:- संस्वीकृति देने वाले व्यक्ति ने अपराध में अपनी भागीदारी स्वीकार करने के साथ-साथ सह-अभियुक्त की भूमिका को भी दर्शाया हो।

सिद्ध संस्वीकृति (Proved Confession):- संस्वीकृति न्यायालय के समक्ष नियमानुसार और बिना किसी दबाव या लालच के सिद्ध की गई हो। 


कानूनी साक्ष्य के रूप में इसका मूल्य (Evidentiary Value)

सह-अभियुक्त की संस्वीकृति को एक कमजोर प्रकार का साक्ष्य (Weak Evidence) माना जाता है। न्यायालय केवल किसी सह-अभियुक्त के बयान के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा सकता। इसका उपयोग केवल अन्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के समर्थन (Corroboration) के लिए एक संपोषक साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है।


निष्कर्ष

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 24 सह-अभियुक्तों के मामलों में न्याय प्रक्रिया को संतुलित बनाती है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि जहाँ एक ओर सह-अभियुक्त का इकबालिया बयान मुख्य अभियुक्त की संलिप्तता की पुष्टि कर सकता है, वहीं न्यायालय साक्ष्यों की गहन जाँच के बाद ही इसका प्रयोग करे ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।


(IEA) की धारा 30 को (BSA) की धारा 24 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

अस्वीकरण:- लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है। 






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