भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 9 न्यायालय में साक्ष्य की प्रासंगिकता (Relevancy of Facts) से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह धारा बताती है कि कुछ तथ्य सामान्य परिस्थितियों में सुसंगत (Relevant) नहीं माने जाते, लेकिन यदि वे किसी विवादित तथ्य के अस्तित्व या अनस्तित्व को अत्यधिक संभावित या अत्यधिक असंभावित बनाते हैं, तो वे न्यायालय में सुसंगत हो जाते हैं।
यह प्रावधान विशेष रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) को कानूनी मान्यता प्रदान करता है और न्यायालय को वास्तविक सत्य तक पहुँचने में सहायता करता है।
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):-
BSA 2023 की धारा :- 9 वे तथ्य जो अन्यथा सुसंगत नहीं हैं कब सुसंगत हैं. वे तथ्य, जो अन्यथा सुसंगत नहीं हैं, सुसंगत हैं :-
(1) यदि वे किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य से असंगत हैं;
(2) यदि वे स्वयमेव या अन्य तथ्यों के संसर्ग में किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य का अस्तित्व या अनस्तित्व अत्यन्त अधिसम्भाव्य या अनधिसम्भाव्य बनाते हैं।
उदाहरण:- (क) प्रश्न यह है कि क्या जगदीश ने किसी अमुक दिन चेन्नई में अपराध किया। यह तथ्य कि वह उस दिन लद्दाख में था, सुसंगत है। यह तथ्य कि जब अपराध किया गया था उस समय के लगभग जगदीश उस स्थान से, जहां कि वह अपराध किया गया था, इतनी दूरी पर था कि जगदीश द्वारा उस अपराध का किया जाना यदि असम्भव नहीं तो अत्यन्त अनधिसम्भाव्य था, सुसंगत है।
(ख) प्रश्न यह है कि क्या सोहन ने अपराध किया है। परिस्थितियां ऐसी है कि वह अपराध सोहन, मोहन, श्याम, या सुरेश में से किसी एक के द्वारा अवश्य किया गया होगा। वह हर तथ्य, जिससे यह दर्शित होता है कि वह अपराध किसी अन्य के द्वारा नहीं किया जा सकता था वह मोहन, श्याम या सुरेश में से किसी के द्वारा नहीं किया गया था, सुसंगत है।
सेक्शन 9 का मकसद
इस सेक्शन का मकसद यह पक्का करना है कि कोर्ट सिर्फ़ सीधे सबूत पर ही निर्भर न रहे, बल्कि उन हालात के फैक्ट्स पर भी ध्यान दे जो सच तक पहुँचने में अहम भूमिका निभाते हैं।
क्राइम की जाँच में डिजिटल सबूत, साइंटिफिक रिपोर्ट, लोकेशन डेटा, CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तेज़ी से ज़रूरी होते जा रहे हैं। सेक्शन 9 ऐसे सबूतों की अहमियत के लिए एक कानूनी आधार देता है।
आसान शब्दों में समझें
मान लीजिए किसी व्यक्ति पर लखनऊ में शाम 7 बजे चोरी करने का आरोप है।
अगर मोबाइल लोकेशन, फ़्लाइट रिकॉर्ड, या होटल रजिस्टर से यह साबित होता है कि वह व्यक्ति उसी समय जयपुर में था, तो यह बात सीधे तौर पर चोरी से जुड़ी नहीं है, लेकिन इससे अपराध लगभग नामुमकिन हो जाता है।
इसलिए, यह बात सेक्शन 9 के तहत ज़रूरी मानी जाएगी।
धारा 9 के आवश्यक तत्व
इस धारा के लागू होने के लिए निम्न बातें आवश्यक हैं—
• तथ्य सामान्य रूप से सुसंगत न हो।
• उसका किसी विवादित तथ्य से तार्किक संबंध हो।
• वह किसी तथ्य के अस्तित्व या अनस्तित्व की संभावना को प्रभावित करे।
• न्यायालय को सत्य तक पहुँचने में सहायता मिले।
• तथ्य अनुमान मात्र न होकर विश्वसनीय साक्ष्य पर आधारित हो।
Bare Act में दिए गए उदाहरण का एनालिसिस
उदाहरण 1:- अगर सवाल यह है कि क्या जगदीश ने चेन्नई में क्राइम किया,लेकिन यह साबित हो जाता है कि वह उसी दिन लद्दाख में मौजूद था। यह बात सीधे तौर पर क्राइम से जुड़ी नहीं है, लेकिन यह साबित करती है कि यह बहुत कम संभावना थी कि उसने चेन्नई में क्राइम किया हो। इसलिए यह बात सेक्शन 9 के तहत ज़रूरी होगी।
उदाहरण 2:- अगर कोई क्राइम चार लोगों में से किसी एक ने किया है—सोहन, मोहन, श्याम और सुरेश—तो सबूत यह साबित करते हैं कि घटना के समय मोहन, श्याम और सुरेश कहीं और थे, तो शक स्वाभाविक रूप से सिर्फ़ सोहन पर ही जाता है। इस तरह, बाकी तीन लोगों की गैर-मौजूदगी को साबित करने वाले तथ्य भी कोर्ट में काम आएंगे।
धारा 9 और परिस्थितिजन्य साक्ष्य
परिस्थितिजन्य साक्ष्य वे होते हैं जो सीधे अपराध को नहीं देखते, लेकिन परिस्थितियों के आधार पर किसी निष्कर्ष तक पहुँचने में सहायता करते हैं।
उदाहरण—
• सीसीटीवी फुटेज
• मोबाइल लोकेशन
• कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
• GPS रिकॉर्ड
• बैंक ट्रांजैक्शन
• ई-टोल रिकॉर्ड
• होटल एंट्री रजिस्टर
• रेलवे या हवाई टिकट
• डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड
• फोरेंसिक रिपोर्ट
ये सभी धारा 9 के अंतर्गत महत्वपूर्ण हो सकते हैं यदि वे विवादित तथ्य की संभावना को प्रभावित करते हों।
आपराधिक मामलों में महत्व
धारा 9 का सबसे अधिक उपयोग निम्न मामलों में होता है—
• हत्या
• डकैती
• अपहरण
• साइबर अपराध
• आर्थिक अपराध
• संगठित अपराध
• आतंकवाद से जुड़े मामले
इन मामलों में कई बार प्रत्यक्ष गवाह उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में परिस्थितिजन्य साक्ष्य ही अभियोजन या बचाव का आधार बनते हैं।
सिविल केस में महत्व
यह सेक्शन सिर्फ़ क्रिमिनल केस तक ही सीमित नहीं है।
इसका इस्तेमाल इन मामलों में भी किया जाता है:
• प्रॉपर्टी के झगड़े
• कॉन्ट्रैक्ट के झगड़े
• विरासत के झगड़े
• मालिकाना हक के झगड़े
• पैसे वापस पाने के मुकदमे
• इंश्योरेंस के झगड़े
अगर कोई बात किसी दावे को ज़्यादा मुमकिन या नामुमकिन बनाती है, तो कोर्ट उस पर विचार कर सकता है।
न्यायालय किन बातों पर ध्यान देता है?
धारा 9 के अंतर्गत न्यायालय सामान्यतः निम्न बातों की जांच करता है—
• क्या तथ्य विश्वसनीय है?
• क्या उसका विवादित तथ्य से तार्किक संबंध है?
• क्या वह घटना की संभावना को प्रभावित करता है?
• क्या वह अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से मेल खाता है?
• क्या उससे वास्तविक सत्य तक पहुँचने में सहायता मिलती है?
इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 और BSA 2023 के बीच अंतर
पुराने इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 के सेक्शन 11 को नए इंडियन एविडेंस एक्ट, 2023 में सेक्शन 9 के तौर पर रीनंबर किया गया है।
इस प्रोविज़न का बेसिक प्रिंसिपल ज़्यादातर वैसा ही है। बदलाव मुख्य रूप से सेक्शन नंबर और विधिक भाषा में हैं।
ज़रूरी बातें
• हर अलग बात कोर्ट में मानी नहीं जाती।
• बात का विवादित बात से लॉजिकल कनेक्शन होना चाहिए।
• बात सिर्फ़ अंदाज़े पर आधारित नहीं होनी चाहिए।
• हालात के सबूत भरोसेमंद होने चाहिए।
• कोर्ट हर मामले के फैक्ट्स के आधार पर अपना फ़ैसला देता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रश्न 1. BSA 2023 की धारा 9 किस विषय से संबंधित है?
उत्तर: यह धारा बताती है कि सामान्यतः असुसंगत तथ्य किन परिस्थितियों में न्यायालय में सुसंगत माने जाएंगे।
प्रश्न 2. क्या धारा 9 परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर लागू होती है?
उत्तर: हाँ। यह धारा मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्य की प्रासंगिकता को मान्यता देती है।
प्रश्न 3. क्या मोबाइल लोकेशन धारा 9 के अंतर्गत साक्ष्य हो सकती है?
उत्तर: यदि मोबाइल लोकेशन किसी विवादित तथ्य के होने या न होने की संभावना को प्रभावित करती है, तो वह धारा 9 के अंतर्गत सुसंगत हो सकती है।
प्रश्न 4. IEA की कौन-सी धारा अब BSA में धारा 9 बनी है?
उत्तर: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 11 को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में धारा 9 के रूप में पुनः क्रमांकित किया गया है।
निष्कर्ष
BSA 2023 का सेक्शन 9 इंडियन एविडेंस एक्ट का एक ज़रूरी प्रोविज़न है, जो यह साफ़ करता है कि जो फैक्ट्स आम तौर पर इर्रेलेवेंट लगते हैं, वे भी कोर्ट में रेलिवेंट हो सकते हैं अगर वे किसी विवादित फैक्ट के होने या न होने को बहुत ज़्यादा पॉसिबल या बहुत ज़्यादा अनलाइकली बनाते हैं। मॉडर्न ज्यूडिशियल सिस्टम में डिजिटल, साइंटिफिक और सर्कमस्टेंशियल एविडेंस की बढ़ती भूमिका ने इस सेक्शन की इंपॉर्टेंस को और बढ़ा दिया है। यह प्रोविज़न कोर्ट को असली फैक्ट्स के आधार पर सही फैसला देने में काफी मदद करता है।
(IEA) की धारा 11 को (BSA) की धारा 9 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
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