भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 18 उन स्वीकृतियों (Admissions) से संबंधित है जो ऐसे व्यक्तियों द्वारा की जाती हैं, जिन्हें वाद (Suit) या न्यायिक कार्यवाही के किसी पक्षकार ने स्पष्ट रूप से अपनी ओर से बोलने या कोई कथन करने के लिए अधिकृत किया हो।
इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी पक्षकार ने अपने प्रतिनिधि के रूप में अधिकृत किया है, तो उसके द्वारा की गई स्वीकृति भी न्यायालय में उसी प्रकार स्वीकार की जा सकती है, जैसे वह स्वयं पक्षकार द्वारा की गई हो।
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):-
BSA 2023 की धारा :- 18. वाद के पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियां-
वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं जिनको वाद के किसी पक्षकार ने किसी विवादग्रस्त विषय के बारे में जानकारी के लिए अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट किया है, स्वीकृतियां हैं।
उदाहरण :- यह प्रश्न है कि क्या रघुवीर द्वारा सोहन को बेचा हुआ घोड़ा अच्छा है। सोहन से रघुवीर कहता है कि "जाकर सुरेश से पूछ लो, सुरेश इस बारे में सब कुछ जानता है"। सुरेश का कथन स्वीकृति है।
धारा 18 का सरल अर्थ
यदि कोई व्यक्ति किसी मुकदमे के पक्षकार की ओर से स्पष्ट रूप से अधिकृत (Expressly Authorized) है और वह किसी तथ्य को स्वीकार करता है, तो ऐसी स्वीकृति न्यायालय में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य हो सकती है।
अर्थात—
जिस व्यक्ति को किसी पक्षकार ने अपनी ओर से बयान देने, बातचीत करने या किसी तथ्य को स्वीकार करने का अधिकार दिया है, उसके द्वारा की गई स्वीकृति भी उस पक्षकार के विरुद्ध प्रयुक्त की जा सकती है।
धारा 18 का उद्देश्य
इस धारा का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
• अधिकृत प्रतिनिधियों की स्वीकृतियों को कानूनी मान्यता देना।
• न्यायालय को वास्तविक तथ्यों तक पहुँचने में सहायता करना।
• पक्षकारों को बाद में अपने अधिकृत प्रतिनिधि के कथनों से मुकरने से रोकना।
• न्यायिक समय की बचत करना।
धारा 18 के आवश्यक तत्व
धारा 18 लागू होने के लिए निम्नलिखित शर्तों का होना आवश्यक है—
1. वाद का पक्षकार होना चाहिए
जिस व्यक्ति के विरुद्ध स्वीकृति प्रयुक्त की जा रही है, वह किसी न्यायिक कार्यवाही का पक्षकार होना चाहिए।
2. स्पष्ट अधिकार (Express Authority)
संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट रूप से अधिकार दिया गया हो कि वह पक्षकार की ओर से कार्य करे या कथन दे।
3. अधिकार के दायरे में कथन
स्वीकृति उसी विषय से संबंधित हो जिसके लिए उसे अधिकार प्रदान किया गया था।
4. स्वीकृति प्रासंगिक हो
कथन मुकदमे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य से संबंधित होना चाहिए।
अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट व्यक्ति कौन हो सकता है?
धारा 18 के अंतर्गत कई प्रकार के व्यक्ति आ सकते हैं, जैसे—
• अधिकृत प्रतिनिधि
• पावर ऑफ अटॉर्नी धारक
• अधिकृत अधिवक्ता (जहाँ अधिकार प्रदान किया गया हो)
• कंपनी का अधिकृत अधिकारी
• अधिकृत एजेंट
• विधिक प्रतिनिधि
अन्य कोई व्यक्ति जिसे लिखित या मौखिक रूप से स्पष्ट अधिकार दिया गया हो।
उदाहरण द्वारा समझिए
उदाहरण:- (1) 'मोहन' ने 'जगदीश' को अपनी ओर से संपत्ति विवाद में बातचीत करने और तथ्य स्वीकार करने का अधिकार दिया। यदि 'जगदीश' कहता है "हाँ, यह भूमि वास्तव में 'सोहन' की है।" तो यह कथन 'मोहन' के विरुद्ध न्यायालय में स्वीकृति माना जा सकता है।
उदाहरण:- (2) एक कंपनी अपने प्रबंधक को अधिकृत करती है कि वह अनुबंध संबंधी विवाद में कंपनी की ओर से बातचीत करे। यदि प्रबंधक स्वीकार करता है "कंपनी ने भुगतान प्राप्त कर लिया था।" तो यह कथन कंपनी के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त हो सकता है।
क्या प्रत्येक कर्मचारी की स्वीकृति मान्य होगी?
(नहीं)
यदि किसी कर्मचारी के पास स्पष्ट अधिकार नहीं है, तो उसके द्वारा दिया गया कथन धारा 18 के अंतर्गत स्वीकृति नहीं माना जाएगा।
केवल वही व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत आएगा जिसे संबंधित विषय पर स्पष्ट रूप से अधिकार दिया गया हो।
धारा 18 और एजेंट की भूमिका
अक्सर पक्षकार स्वयं प्रत्येक कार्य नहीं कर पाता।
ऐसी स्थिति में वह किसी एजेंट या प्रतिनिधि को अधिकार देता है।
जब एजेंट—
• अधिकार के भीतर कार्य करता है,
• उसी विषय पर कथन देता है,
• और वह कथन मुकदमे से संबंधित है,
• तो न्यायालय उसे स्वीकार कर सकता है।
धारा 18 का महत्व
इस धारा का न्यायिक प्रक्रिया में विशेष महत्व है क्योंकि—
• प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय होती है।
• मुकदमों में अनावश्यक विवाद कम होते हैं।
• झूठे बचाव की संभावना घटती है।
• वास्तविक तथ्यों की पुष्टि आसान होती है।
• न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है।
किन परिस्थितियों में धारा 18 लागू नहीं होगी?
धारा 18 निम्न परिस्थितियों में लागू नहीं होगी—
• व्यक्ति को कोई अधिकार न दिया गया हो।
• अधिकार समाप्त हो चुका हो।
• कथन अधिकार के बाहर दिया गया हो।
• कथन मुकदमे से असंबंधित हो।
• केवल व्यक्तिगत राय व्यक्त की गई हो।
• कथन अनुमान या अफवाह पर आधारित हो।
न्यायालय किन बातों पर विचार करता है?
स्वीकृति स्वीकार करने से पहले न्यायालय सामान्यतः यह देखता है—
• क्या अधिकार वास्तव में दिया गया था?
• क्या अधिकार लिखित था या मौखिक?
• कथन किस परिस्थिति में किया गया?
• क्या कथन स्वेच्छा से किया गया?
• क्या कथन मुकदमे के विषय से संबंधित है?
• क्या कथन अधिकार की सीमा के भीतर है?
व्यावहारिक महत्व
व्यवहार में यह धारा निम्न मामलों में अत्यंत उपयोगी होती है—
• संपत्ति विवाद
• अनुबंध विवाद
• व्यावसायिक लेन-देन
• कंपनी विवाद
• दीवानी वाद
• बैंकिंग विवाद
• व्यापारिक दावे
• वाणिज्यिक मुकदमे
महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points)
धारा 18 अधिकृत व्यक्तियों द्वारा की गई स्वीकृतियों से संबंधित है।
• अधिकार स्पष्ट (Express) होना चाहिए।
• केवल अधिकार के दायरे में दिया गया कथन ही ग्राह्य होगा।
• प्रत्येक कर्मचारी या परिचित व्यक्ति की स्वीकृति मान्य नहीं होती।
• न्यायालय अधिकार की प्रकृति एवं सीमा की जांच करता है।
• यह धारा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाती है।
निष्कर्ष
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 18 यह सुनिश्चित करती है कि यदि किसी पक्षकार ने किसी व्यक्ति को स्पष्ट रूप से अपनी ओर से कार्य करने या कथन देने का अधिकार प्रदान किया है, तो उसके द्वारा की गई स्वीकृति को भी न्यायालय उचित परिस्थितियों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है। यह प्रावधान न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है। साथ ही, यह पक्षकारों को अपने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से किए गए स्वीकारोक्तिपूर्ण कथनों की कानूनी जिम्मेदारी से अवगत कराता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. BSA 2023 की धारा 18 किस विषय से संबंधित है?
उत्तर: यह धारा वाद के पक्षकार द्वारा स्पष्ट रूप से अधिकृत व्यक्तियों द्वारा की गई स्वीकृतियों से संबंधित है।
प्रश्न 2. क्या हर एजेंट की स्वीकृति मान्य होगी?
उत्तर: नहीं, केवल उसी एजेंट की जिसे संबंधित विषय पर स्पष्ट अधिकार दिया गया हो।
प्रश्न 3. क्या मौखिक अधिकार भी पर्याप्त हो सकता है?
उत्तर: परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय मौखिक अधिकार का भी मूल्यांकन कर सकता है।
प्रश्न 4. क्या कंपनी का कर्मचारी धारा 18 के अंतर्गत आ सकता है?
उत्तर: हाँ, यदि वह कंपनी द्वारा उस विषय पर स्पष्ट रूप से अधिकृत किया गया हो।
प्रश्न 5. धारा 18 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा की गई स्वीकृतियों को उचित परिस्थितियों में कानूनी मान्यता प्रदान करना और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाना।
(IEA) की धारा 20 को (BSA) की धारा 18 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

