भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा - 18
(विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना)
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):- कोई बात अपराध नही है, जो दुर्घटना या दुर्भाग्य से और किसी आपराधिक आशय या ज्ञान के बिना विधिपूर्ण रीति से विधिपूर्ण साधनों द्वारा और उचित सतर्कता और सावधानी के साथ विधिपूर्ण कार्य करने में ही हो जाती है।
उदाहरण - A कुल्हाड़ी से काम कर रहा है, कुल्हाड़ी का फल उसमे से निकल कर उछल जाता है और निकट खड़ा हुआ व्यक्ति उससे मारा जाता हैं यहाँ यदि A की ओर से उचित सावधानी का कोई अभाव नही था तो उसका कार्य माफी योग्य है और अपराध नही है
BNS Section 18 in Hindi: विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना क्या है? (पूर्ण जानकारी)
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में कई आधुनिक बदलाव किए हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 80 को अब नए कानून में BNS की धारा 18 के रूप में शामिल किया गया है। यह धारा उन स्थितियों से संबंधित है जहाँ कोई अनहोनी या दुर्घटना किसी वैध (कानूनी) कार्य को करते समय घटित हो जाती है। आइए इस धारा के प्रावधानों, उद्देश्यों और कानूनी पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
BNS धारा 18 क्या है? (What is BNS Section 18?)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 18 के अनुसार, कोई भी ऐसा कार्य अपराध (Offence) नहीं माना जाएगा जो किसी दुर्घटना (Accident) या दुर्भाग्यवश (Misfortune) हुआ हो और जिसे करते समय किसी भी प्रकार का आपराधिक आशय (Criminal Intent) या आपराधिक ज्ञान न हो।
यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर, उचित सावधानी और सतर्कता (Proper Care and Caution) के साथ अपना काम कर रहा है, और इस दौरान कोई आकस्मिक दुर्घटना घट जाती है, तो उसे इस धारा के तहत पूर्ण कानूनी संरक्षण मिलता है।
BNS Section 18 के प्रमुख आवश्यक तत्व (Key Elements)
इस धारा का लाभ या कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है:-
विधिपूर्ण कार्य (Lawful Act):- जिस कार्य को किया जा रहा है, वह कानूनी रूप से वैध होना चाहिए। यदि कार्य ही अवैध है, तो इस धारा का लाभ नहीं मिलेगा।
विधिपूर्ण साधन और तरीका:- कार्य को करने का ढंग और तरीका भी कानूनन सही होना चाहिए।
दुर्घटना का होना:- घटना पूरी तरह से आकस्मिक और अनियोजित होनी चाहिए, जिसकी पहले से कोई योजना या पूर्व-नियोजित साजिश न हो।
उचित सावधानी (No Negligence):- कार्य करने वाले व्यक्ति की तरफ से सावधानी बरतने में कोई उपेक्षा या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
कानूनी उदाहरण से समझें (Classic Example)
इस प्रावधान को स्पष्ट करने के लिए विधि शास्त्र में एक बहुत प्रसिद्ध उदाहरण दिया जाता है:-
मान लीजिए, 'विनोद' नामक व्यक्ति अपने हाथ में कुल्हाड़ी लेकर जंगल में लकड़ी काट रहा है। लकड़ी काटते समय अचानक कुल्हाड़ी का लोहा (फल) निकलकर दूर जा गिरता है और पास ही खड़े किसी अन्य व्यक्ति को लग जाता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है।
इस मामले में 'विनोद' का कोई गलत इरादा नहीं था और उसने पूरी सावधानी से अपना वैध काम किया था। इसलिए, BNS धारा 18 के तहत 'विनोद' का यह कृत्य अपराध नहीं माना जाएगा और इसे एक क्षमा योग्य दुर्घटना माना जाएगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
BNS की धारा 18 न्याय व्यवस्था का एक बेहद न्यायसंगत और मानवीय पहलू है। यह कानून इस बात की गारंटी देता है कि किसी भी निर्दोष नागरिक को केवल इसलिए दण्डित न किया जाए क्योंकि वह सामान्य जीवन में किसी वैध कार्य को करते समय दुर्भाग्यपूर्ण हादसे का शिकार हो गया। यह धारा आपराधिक न्याय के मूल सिद्धांत—"दोषी मन (Mens Rea) के बिना कोई अपराध नहीं होता"—को मजबूती प्रदान करती है।
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| (IPC) की धारा 80 को (BNS) की धारा 18 में बदल दिया गया है। |
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी वास्तविक कानूनी मामले, मुकदमे या विवाद की स्थिति में किसी विशेषज्ञ अधिवक्ता (Advocate) से विधिक सलाह अवश्य लें।


