हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र न्यायालय में विचाराधीन वाद के दौरान उस स्थिति में प्रस्तुत किया जाता है जब किसी पक्षकार या अभियुक्त के लिए निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होना संभव न हो। बीमारी, आकस्मिक पारिवारिक कार्य, यात्रा में बाधा अथवा अन्य अपरिहार्य कारणों से अनुपस्थिति होने पर अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा सकता है।
न्यायालय प्रार्थना पत्र में उल्लिखित कारणों का परीक्षण कर उचित पाए जाने पर उस तिथि की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर सकता है। हालांकि, यह न्यायालय के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है और प्रत्येक मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र में वाद संख्या, पक्षकारों का विवरण, अनुपस्थिति का कारण तथा अगली तिथि पर उपस्थित रहने का आश्वासन स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। एक सुव्यवस्थित और तथ्यात्मक आवेदन न्यायालय के समक्ष पक्षकार की सद्भावना प्रदर्शित करता है तथा न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में सहायक होता है।
📘 हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र क्या है, इसे कब और कैसे प्रस्तुत किया जाता है, तथा न्यायालय में अनुपस्थिति के लिए आवेदन का आसान प्रारूप, PDF
न्यायालय प्रार्थना पत्र में उल्लिखित कारणों का परीक्षण कर उचित पाए जाने पर उस तिथि की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर सकता है। न्यायालय के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है और प्रत्येक मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाता है। आप इसे ऑनलाइन देख सकते हैं तथा डाउनलोड भी कर सकते हैं। ✍️⚖️
अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है

