Type Here to Get Search Results !

Kunal Rameshbhai Kalyani बनाम State of Gujarat: BNS धारा 69 पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

Kunal Rameshbhai Kalyani v. State of Gujarat, 2026 INSC 987
Kunal Rameshbhai Kalyani v. State of Gujarat, 2026 INSC 987

Kunal Rameshbhai Kalyani v. State of Gujarat, 2026 INSC 987 सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत शादी के वादे से जुड़े यौन संबंध के मामले पर विचार किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में संबंधित FIR को रद्द कर दिया।


मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी की मुलाकात एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई थी। दोनों के बीच पहले दोस्ती और बाद में प्रेम संबंध विकसित हुआ। शिकायत के अनुसार आरोपी ने शादी करने की इच्छा व्यक्त की और दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। बाद में आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया और शिकायत में इसका कारण उसकी मां की शादी के लिए सहमति न होना बताया गया।

मामले में आरोपी के विरुद्ध BNS की धारा 69 के तहत FIR दर्ज की गई थी। आरोपी ने FIR को रद्द करने की मांग की, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा बाद में पूरा न होना अपने-आप में BNS की धारा 69 के अपराध को स्थापित नहीं करता। अदालत ने पुराने न्यायिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि शादी का वादा करते समय आरोपी की वास्तव में शादी करने की मंशा थी या नहीं।

अर्थात यदि शुरुआत से ही शादी करने का कोई इरादा नहीं था और इसी धोखे के आधार पर महिला से शारीरिक संबंध बनाए गए, तो मामला धारा 69 के दायरे में आ सकता है। लेकिन यदि शुरुआत में शादी का वास्तविक इरादा था और बाद में परिस्थितियों के कारण विवाह नहीं हो सका, तो हर ऐसे मामले को स्वतः आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

इस मामले में FIR क्यों रद्द हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने FIR में दर्ज तथ्यों को देखते हुए पाया कि दोनों के बीच संबंध को शिकायत में सहमति वाला संबंध बताया गया था। अदालत को ऐसे पर्याप्त तथ्य नहीं मिले जिनसे यह दिखाई दे कि आरोपी ने शुरुआत से ही धोखे से शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाए थे।

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि शिकायत के अनुसार बाद में शादी से इनकार करने का कारण आरोपी की मां की असहमति थी। इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि केवल शादी की इच्छा व्यक्त करना अपने-आप में “deceitful means” नहीं माना जा सकता।

फैसले का कानूनी महत्व

यह निर्णय BNS Section 69, false promise to marry, consensual relationship और deceitful means से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि अदालत को केवल इस तथ्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि विवाह अंततः हुआ या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि कथित वादे के समय आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अंततः FIR No. 11196030250292 को रद्द कर दिया और संबंधित आपराधिक कार्यवाही को आगे जारी रखने का आधार नहीं पाया।

निष्कर्ष

Kunal Rameshbhai Kalyani फैसला यह समझने में महत्वपूर्ण है कि हर टूटा हुआ शादी का वादा BNS की धारा 69 के तहत अपराध नहीं बनता। मामले के तथ्यों और विशेष रूप से शुरुआत में आरोपी की मंशा तथा कथित धोखे की भूमिका का परीक्षण आवश्यक है।

📄

Kunal Rameshbhai Kalyani बनाम State of Gujarat: BNS धारा 69 पर Supreme Court का फैसला

Kunal Rameshbhai Kalyani v. State of Gujarat, 2026 INSC 987 में सुप्रीम कोर्ट ने BNS धारा 69 और शादी के वादे पर बने संबंध से जुड़े मामले में FIR रद्द की। जानिए फैसले की मुख्य बातें।

📘 PDF ऑनलाइन देखें

नीचे दिए गए PDF Viewer में दस्तावेज़ को ऑनलाइन पढ़ें। आवश्यकता होने पर नीचे दिए गए बटन से PDF डाउनलोड भी कर सकते हैं।

नोट: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के उद्देश्य से है। किसी विशेष मामले में जमानत या गिरफ्तारी से संबंधित निर्णय लेने से पहले संबंधित कानून और मामले के वर्तमान तथ्यों के आधार पर योग्य अधिवक्ता से सलाह लेना उचित है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.