| हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2020: NDPS Act में मिश्रण की पूरी मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला। |
हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2020: NDPS Act में मिश्रित मादक पदार्थ की मात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Hira Singh v. Union of India) वर्ष 2020 का NDPS Act से संबंधित एक महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब किसी Narcotic Drug या Psychotropic Substance को किसी एक या अधिक neutral substance के साथ मिलाकर बरामद किया जाता है, तब यह निर्धारित करते समय कि बरामद पदार्थ “Small Quantity” है या “Commercial Quantity”, केवल वास्तविक नशीले पदार्थ का वजन ही नहीं देखा जाएगा, बल्कि मिश्रण में मौजूद neutral substance की मात्रा को भी शामिल किया जाएगा।
हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस की जानकारी
केस का नाम: Hira Singh and Another v. Union of India and Another
निर्णय की तारीख: 22 अप्रैल 2020
केस नंबर: Criminal Appeal No. 722 of 2017
पीठ: Justice Arun Mishra, Justice Indira Banerjee और Justice M. R. Shah
मुख्य कानून: Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 यानी NDPS Act
महत्वपूर्ण प्रावधान: Section 21 और NDPS Act में quantity से संबंधित प्रावधान।
मामले में मुख्य कानूनी सवाल क्या था?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह था कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई narcotic drug या psychotropic substance किसी दूसरे neutral substance के साथ मिश्रित अवस्था में मिलता है, तो Small Quantity और Commercial Quantity निर्धारित करने के लिए किस वजन को माना जाए।
क्या केवल असली narcotic drug या psychotropic substance का वजन लिया जाए?
या फिर पूरे mixture का वजन, जिसमें neutral substance भी शामिल है, quantity निर्धारित करने के लिए माना जाए?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि NDPS Act में सजा की गंभीरता कई परिस्थितियों में बरामद पदार्थ की quantity से जुड़ी होती है। Small Quantity और Commercial Quantity के बीच अंतर होने से आरोपी पर लागू होने वाले कानूनी परिणाम काफी बदल सकते हैं।
E. Micheal Raj मामले से विवाद
हीरा सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले के E. Micheal Raj v. Intelligence Officer, Narcotic Control Bureau (2008) के निर्णय पर भी पुनर्विचार का प्रश्न आया।
E. Micheal Raj मामले में यह दृष्टिकोण अपनाया गया था कि यदि narcotic drug किसी neutral substance के साथ मिश्रित है, तो सजा निर्धारित करने के लिए मुख्य रूप से narcotic drug या psychotropic substance की वास्तविक मात्रा को देखा जाना चाहिए।
बाद में इस दृष्टिकोण की वैधानिक व्याख्या और NDPS Act की विभिन्न धाराओं तथा सरकारी notifications के संदर्भ में पुनः जांच की आवश्यकता महसूस हुई। इसी कारण मामला तीन-न्यायाधीशों की पीठ के सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि mixture में मौजूद neutral substance को अलग करके केवल वास्तविक drug content के आधार पर Small Quantity या Commercial Quantity निर्धारित नहीं की जाएगी।
अर्थात यदि narcotic drug या psychotropic substance किसी neutral substance के साथ मिश्रित है, तो quantity निर्धारित करते समय पूरे mixture की मात्रा को ध्यान में रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि NDPS Act की Section 21 को अकेले पढ़कर उसकी व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। इसे Act के अन्य संबंधित प्रावधानों और लागू notifications के साथ पढ़ना आवश्यक है।
Neutral Substance क्या होता है?
सरल भाषा में neutral substance से आशय ऐसे पदार्थ से है जो स्वयं संबंधित narcotic drug या psychotropic substance नहीं है, लेकिन उसे drug के साथ मिलाया गया हो।
ऐसी स्थिति में केवल यह कहकर mixture का वजन कम नहीं किया जा सकता कि उसमें कुछ हिस्सा neutral substance का है।
हीरा सिंह फैसले का मुख्य प्रभाव यही है कि mixture की कुल मात्रा को quantity determination में महत्व दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की reasoning
सुप्रीम कोर्ट ने NDPS Act की पूरी statutory scheme को ध्यान में रखा। न्यायालय ने माना कि Act को उसके उद्देश्य और संबंधित प्रावधानों के साथ पढ़ना चाहिए।
न्यायालय ने यह दृष्टिकोण स्वीकार नहीं किया कि mixture में neutral substance की मात्रा को पूरी तरह हटाकर केवल pure drug content को quantity determination का आधार बनाया जाए।
फैसले में 19 अक्टूबर 2001 और 18 नवंबर 2009 से संबंधित notifications तथा NDPS Act की definitions और provisions के परस्पर संबंध पर भी विचार किया गया।
इस फैसले का महत्व
हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसला NDPS मामलों में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि quantity का निर्धारण सीधे मामले की कानूनी गंभीरता को प्रभावित कर सकता है।
यदि किसी बरामद पदार्थ को Small Quantity, Intermediate Quantity या Commercial Quantity की श्रेणी में रखा जाना है, तो उसका सही classification आवश्यक है।
इस फैसले के बाद mixture के मामले में केवल laboratory report में बताए गए pure drug content को देखकर quantity classification करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। Mixture में neutral substance की मात्रा भी relevant हो सकती है। बाद के न्यायिक फैसलों में भी हीरा सिंह के सिद्धांत का उल्लेख किया गया है।
क्या इस फैसले ने E. Micheal Raj को बदल दिया?
हाँ। तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने E. Micheal Raj में अपनाए गए उस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया जिसमें mixture में neutral substance को quantity निर्धारण से बाहर रखने की बात कही गई थी।
हीरा सिंह का फैसला इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया और mixture की कुल मात्रा को quantity determination के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
निष्कर्ष
हीरा सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2020 NDPS Act के अंतर्गत quantity determination से संबंधित एक महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट judgment है। इस फैसले का मूल सिद्धांत यह है कि जब कोई narcotic drug या psychotropic substance एक या अधिक neutral substances के साथ mixture के रूप में बरामद होता है, तो Small Quantity या Commercial Quantity निर्धारित करते समय neutral substance को पूरी तरह बाहर नहीं किया जा सकता।
इस फैसले ने NDPS Act की संबंधित धाराओं, statutory definitions और सरकारी notifications को साथ पढ़ते हुए mixture की कुल मात्रा को महत्व दिया। यही कारण है कि यह निर्णय NDPS Act के मामलों में आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

