| BSA 2023 Section 20 in Hindi |
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 20: दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैं
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) भारत की विधिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार है। इसने 1872 के पुराने 'इंडियन एविडेंस एक्ट' (Indian Evidence Act, 1872) को प्रतिस्थापित किया है। पुरानी कानून व्यवस्था की धारा 22 को नए अधिनियम में धारा 20 (Section 20) के रूप में शामिल किया गया है।
यह धारा इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब कोई दस्तावेज (Document) मौजूद हो, तो न्यायालय सबसे पहले प्राथमिक साक्ष्य (Primary Evidence) अर्थात् मूल दस्तावेज को ही देखना चाहता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में दस्तावेज के अंदर लिखी बातों (अन्तर्वस्तु) के संबंध में दिए गए मौखिक कथनों (Oral Admissions) को भी सुसंगत (Relevant) माना जाता है।
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):- BSA 2023 की धारा :- 20. दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां कब सुसंगत होती है-
"किसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां तब तक सुसंगत नहीं होतीं, यदि और जब तक उन्हें साबित करने की प्रस्थापना करने वाला पक्षकार यह दर्शित न कर दे कि ऐसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तुओं का द्वितीयक साक्ष्य देने का वह एतस्मिन्पश्चात् दिए हुए नियमों के अधीन हकदार है, अथवा जब तक पेश की गई दस्तावेज का असली होना प्रश्नगत न हो।"
धारा 20 का मुख्य नियम (General Rule)
सामान्य नियम यह है कि किसी भी दस्तावेज में क्या लिखा है, इसे साबित करने के लिए मौखिक साक्ष्य या मौखिक स्वीकृति को स्वीकार नहीं किया जाता। कानून का मानना है कि "दस्तावेज स्वयं बोलता है"। इसलिए, यदि मूल दस्तावेज उपलब्ध है, तो किसी व्यक्ति के मौखिक बयान के आधार पर उसकी सामग्री तय नहीं की जा सकती।
मौखिक स्वीकृतियों की सुसंगतता की शर्तें (Exceptions)
BSA 2023 की धारा 20 के अनुसार, दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु (Contents) के संबंध में मौखिक स्वीकृतियां केवल दो मुख्य परिस्थितियों में ही सुसंगत (Relevant) और न्यायालय द्वारा स्वीकार्य होंगी:-
1. जब पक्षकार द्वितीयक साक्ष्य (Secondary Evidence) देने का हकदार हो :- यदि मामला ऐसा है जहाँ कानून के अनुसार मूल दस्तावेज पेश न करके उसका द्वितीयक साक्ष्य (जैसे फोटोकॉपी, प्रतिलिपि, या मौखिक साक्ष्य) दिया जा सकता है, तो वहाँ मौखिक स्वीकृति सुसंगत हो जाती है।
उदाहरण: यदि मूल दस्तावेज खो गया है, नष्ट हो गया है, या विरोधी पक्षकार के कब्जे में है और नोटिस देने के बाद भी वह उसे पेश नहीं कर रहा है (जैसा कि BSA की धारा 60/65 के तहत उपबंधित है), तो ऐसी स्थिति में दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में दी गई मौखिक स्वीकृति स्वीकार्य होगी।
2. जब दस्तावेज की असली/असली न होने (Genuineness) पर प्रश्न हो :- यदि न्यायालय के समक्ष प्रश्न यह है कि प्रस्तुत किया गया दस्तावेज असली (Genuine) है या जाली (Forged), तो उस दस्तावेज की प्रामाणिकता या सत्यता को स्पष्ट करने के लिए दी गई मौखिक स्वीकृति सुसंगत मानी जाती है।
धारा 20 का व्यावहारिक उदाहरण (Illustration)
मान लीजिए कि 'क' और 'ख' के बीच एक संपत्ति की बिक्री के अनुबंध (Agreement) को लेकर विवाद है।
यदि 'क' न्यायालय में कहता है कि "ख ने मुझसे मौखिक रूप से स्वीकार किया था कि अनुबंध पत्र में 5 लाख रुपये की राशि लिखी है", तो न्यायालय इस मौखिक बयान को सामान्यतः स्वीकार नहीं करेगा। न्यायालय कहेगा कि मूल अनुबंध पत्र पेश किया जाए।
अपवाद स्थिति:- यदि 'क' यह साबित कर देता है कि मूल अनुबंध पत्र 'ख' की आग में जलकर नष्ट हो गया है (जिससे द्वितीयक साक्ष्य का अधिकार बनता है), तो अब 'ख' द्वारा दी गई मौखिक स्वीकृति कि "हाँ, अनुबंध में 5 लाख ही लिखे थे", धारा 20 के तहत न्यायालय में साक्ष्य के रूप में सुसंगत और ग्राह्य (Admissible) होगी।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में इसका महत्व
साक्ष्य की गुणवत्ता और प्रामाणिकता:- यह धारा मौखिक साक्ष्य के बजाय लिखित और तकनीकी साक्ष्य को प्राथमिकता देकर फर्जी या झूठे मौखिक बयानों पर रोक लगाती है।
द्वितीयक साक्ष्य का संतुलन:- जहाँ वास्तविक कारणों से मूल दस्तावेज पेश करना असंभव हो, वहाँ यह धारा न्याय के हित में मौखिक साक्ष्य का द्वार खोलती है।
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल युग में प्रासंगिकता:- BSA 2023 में दस्तावेजों के दायरे में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ईमेल और डिजिटल मैसेज भी शामिल हैं। इसलिए, डिजिटल दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठने की स्थिति में धारा 20 का महत्व और बढ़ जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 20 स्पष्ट करती है कि दस्तावेजों की सामग्री के मामले में "लिखित साक्ष्य ही सर्वोत्तम साक्ष्य" है। मौखिक स्वीकृतियों को केवल तभी स्थान दिया जाता है जब द्वितीयक साक्ष्य की कानूनी शर्तें पूरी होती हों या दस्तावेज की प्रामाणिकता पर ही प्रश्न चिन्ह लगा हो। न्याय प्रणाली में निष्पक्षता और साक्ष्य की सत्यता बनाए रखने के लिए यह प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| (IEA) की धारा 22 को (BSA) की धारा 20 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी वास्तविक कानूनी मामले, मुकदमे या विवाद की स्थिति में किसी विशेषज्ञ अधिवक्ता (Advocate) से विधिक सलाह अवश्य लें।

