Type Here to Get Search Results !

BSA की धारा 21 क्या है? सिविल मामलों में स्वीकृतियां हिंदी में

BSA की धारा 21 क्या है? सिविल मामलों में स्वीकृतियां हिंदी में
सिविल मामलों में स्वीकृतियां,


(सिविल मामलों में स्वीकृतियां कब सुसंगत होती हैं)

BSA Section 21 in Hindi भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक है। यह धारा सिविल मामलों में स्वीकृतियों की सुसंगतता और उन परिस्थितियों से संबंधित है, जिनमें किसी स्वीकृति को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान पक्षकारों के बीच समझौते की बातचीत को उचित संरक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):-सिविल मामलों में कोई भी स्वीकृति सुसंगत नहीं है, यदि वह या तो इस अभिव्यक्त शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाएगा, या ऐसी परिस्थितियों के अधीन दी गई हो जिनसे न्यायालय यह अनुमान कर सके कि पक्षकार इस बात पर परस्पर सहमत हो गए थे कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए।

स्पस्टीकरण:- इस धारा की कोई भी बात किसी अधिवक्ता को किसी ऐसी बात का साक्ष्य देने से छूट देने वाली नहीं मानी जाएगी जिसका साक्ष्य देने के लिए धारा 132 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन उसे विवश किया जा सकता है।


BSA की धारा 21 क्या कहती है?

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 21 के अनुसार, सिविल मामलों में कोई स्वीकृति सुसंगत नहीं होगी, यदि वह इस स्पष्ट शर्त पर की गई हो कि उसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार, यदि परिस्थितियों से न्यायालय यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति थी कि स्वीकृति को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, तो भी वह इस धारा के अंतर्गत सुसंगत नहीं होगी।

इस धारा का उद्देश्य ऐसे मामलों में पक्षकारों को संरक्षण देना है, जहां वे विवाद का समाधान करने के लिए बातचीत करते हैं और कुछ बातें इस समझ के साथ स्वीकार करते हैं कि उनका उपयोग बाद में न्यायालय में साक्ष्य के रूप में नहीं किया जाएगा।


सिविल मामलों में स्वीकृति का क्या अर्थ है?

स्वीकृति से आशय ऐसे कथन से है, जो किसी विवाद से संबंधित तथ्य के बारे में पक्षकार की स्थिति को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, संपत्ति विवाद, धन की वसूली या अनुबंध से जुड़े मुकदमे में पक्षकार कोई तथ्य स्वीकार कर सकता है।

हालांकि, प्रत्येक स्वीकृति पर धारा 21 लागू नहीं होती। इस धारा के अंतर्गत मुख्य बात यह है कि स्वीकृति स्पष्ट शर्त पर दी गई थी या परिस्थितियों से यह निष्कर्ष निकलता है कि पक्षकार उसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल न करने पर सहमत थे।


BSA की धारा 21 का उदाहरण

मान लीजिए कि दो व्यक्तियों के बीच दस लाख रुपये की वसूली को लेकर सिविल मुकदमा चल रहा है। दोनों पक्ष विवाद समाप्त करने के लिए समझौते पर बातचीत करते हैं। बातचीत के दौरान एक पक्ष कहता है कि वह विवाद समाप्त करने के लिए कुछ राशि देने को तैयार है, लेकिन यह बातचीत इस स्पष्ट शर्त पर होती है कि इसे न्यायालय में उसके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा।

ऐसी परिस्थिति में BSA की धारा 21 प्रासंगिक हो सकती है। न्यायालय यह देखेगा कि क्या कथन स्पष्ट शर्त के साथ दिया गया था या क्या परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि दोनों पक्ष उसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल न करने पर सहमत थे।

यह केवल समझाने के लिए दिया गया काल्पनिक उदाहरण है। किसी वास्तविक मामले में परिणाम संबंधित तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगा।


धारा 21 में अधिवक्ता से संबंधित स्पष्टीकरण

इस धारा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका कोई प्रावधान किसी अधिवक्ता को ऐसे विषय पर साक्ष्य देने से छूट नहीं देता, जिसके संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 132 की उपधारा (1) और (2) के अंतर्गत उससे साक्ष्य देने की अपेक्षा की जा सकती है।

इसलिए धारा 21 को पूर्ण और असीमित संरक्षण के रूप में नहीं समझना चाहिए। इसके प्रभाव का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों के साथ पढ़कर किया जाना चाहिए।


BSA की धारा 21 का महत्व

यह प्रावधान सिविल विवादों में समझौते की बातचीत को प्रोत्साहित करने में सहायक है। यदि समझौते के दौरान की गई प्रत्येक रियायत को बिना किसी अपवाद के मुकदमे में इस्तेमाल किया जा सके, तो पक्षकार विवाद सुलझाने के लिए खुलकर बातचीत करने से हिचक सकते हैं।

धारा 21 के अंतर्गत लागू होने वाली शर्तें ऐसी बातचीत को आवश्यक कानूनी संरक्षण प्रदान करती हैं। हालांकि, केवल किसी बातचीत को समझौता वार्ता कह देने से इस धारा का संरक्षण स्वतः प्राप्त नहीं होता।


निष्कर्ष

BSA की धारा 21 सिविल मामलों में उन स्वीकृतियों की सुसंगतता से संबंधित है, जिन्हें साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत न करने की स्पष्ट शर्त पर किया गया हो या जिन परिस्थितियों से पक्षकारों के बीच ऐसा समझौता निष्कर्षित किया जा सके। इस प्रावधान को समझना कानून के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और सिविल मुकदमों से जुड़े व्यक्तियों के लिए उपयोगी है।

(IEA) की धारा 23 को (BSA) की धारा 21 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है
(IEA) की धारा 23 को (BSA) की धारा 21 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक और सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है। किसी विशिष्ट विवाद में कानूनी सलाह के लिए योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।




एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.