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BSA 2023 की धारा 2(1)(f) "तथ्य" की परिभाषा: अर्थ, प्रकार और न्यायिक महत्व


BSA 2023 की धारा 2(1)(f) "तथ्य" की परिभाषा: अर्थ, प्रकार और न्यायिक महत्व
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BSA 2023 की धारा 2(1)(f) "तथ्य" की परिभाषा: अर्थ, प्रकार और न्यायिक महत्व


पूरे लेख का मूल प्रावधान (Bare Act Text):- 


2. परिभाषाएं. - (1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(च) "तथ्य" से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आती हैं-

(i) ऐसी कोई वस्तु, वस्तुओं की अवस्था, या वस्तुओं का सम्बन्ध जो इन्द्रियों द्वारा बोधगम्य हो;

(ii) कोई मानसिक दशा, जिसका भान किसी व्यक्ति को हो।

उदाहरण :-  (i) यह कि अमुक स्थान में अमुक क्रम से अमुक पदार्थ व्यवस्थित हैं, एक तथ्य है।

(ii) यह कि किसी व्यक्ति ने कुछ सुना या देखा, एक तथ्य है।

(iii) यह कि किसी व्यक्ति ने अमुक शब्द कहे, एक तथ्य है।

(iv) यह कि कोई व्यक्ति अमुक राय रखता है, अमुक आशय रखता है, सद्भावपूर्वक या कपटपूर्वक कार्य करता है या किसी विशिष्ट शब्द को विशिष्ट भाव में प्रयोग करता है, या उसे किसी विशिष्ट संवेदना का भान है या किसी विनिर्दिष्ट समय में था, एक तथ्य है;


प्रस्तावना:- 

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य के मूल्यांकन और तथ्यों की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम की धारा 2(1)(f) में "तथ्य" (Fact) की परिभाषा दी गई है। किसी भी दीवानी या फौजदारी मुकदमे में न्यायालय का मुख्य कार्य विवादित तथ्यों का निर्धारण करना होता है। इसलिए "तथ्य" की अवधारणा को समझना कानून के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के लिए अत्यंत आवश्यक है।


धारा 2(1)(f) के अनुसार तथ्य की परिभाषा:- 

BSA 2023 की धारा 2(1)(f) के अनुसार, "तथ्य" से अभिप्राय है—

कोई भी वस्तु, स्थिति या वस्तुओं के बीच संबंध, जिसे इंद्रियों द्वारा देखा, सुना या अन्य प्रकार से अनुभव किया जा सकता हो। 

किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति, जैसे उसका इरादा, ज्ञान, सद्भावना, लापरवाही, भय, द्वेष या अन्य मानसिक दशा। 

अर्थात, तथ्य केवल भौतिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के मनोभाव और मानसिक स्थिति भी तथ्य के दायरे में आते हैं।


तथ्य के प्रमुख प्रकार:- 

1. भौतिक तथ्य (Physical Facts)

वे तथ्य जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा, सुना या महसूस किया जा सकता है, भौतिक तथ्य कहलाते हैं।

उदाहरण:

• सड़क पर वाहन का खड़ा होना। 

• किसी व्यक्ति का किसी स्थान पर उपस्थित होना। 

• गोली चलने की आवाज सुनाई देना। 


2. मानसिक तथ्य (Mental Facts):- 


वे तथ्य जो किसी व्यक्ति की मानसिक अवस्था से संबंधित हों, मानसिक तथ्य कहलाते हैं।

उदाहरण:

• अपराध करने का इरादा। 

• किसी घटना की जानकारी होना। 

• धोखा देने की योजना बनाना। 

न्यायालय इन तथ्यों का निर्धारण परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।


न्यायालय में तथ्य का महत्व:- 

किसी भी मुकदमे का निर्णय तथ्यों पर आधारित होता है। पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य न्यायालय के समक्ष तथ्यों को सिद्ध या असिद्ध करने का माध्यम बनते हैं। यदि कोई तथ्य प्रमाणित हो जाता है, तो वह न्यायालय के निर्णय को प्रभावित कर सकता है।

उदाहरण के लिए:-  हत्या के मुकदमे में अभियुक्त का घटना स्थल पर मौजूद होना एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है। इसी प्रकार, अभियुक्त का अपराध करने का इरादा भी एक प्रासंगिक तथ्य माना जा सकता है।


तथ्य और साक्ष्य का संबंध:- 

तथ्य और साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। साक्ष्य वह माध्यम है जिसके द्वारा किसी तथ्य को न्यायालय के समक्ष सिद्ध किया जाता है। बिना साक्ष्य के किसी तथ्य को सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता।

उदाहरण:

√ प्रत्यक्षदर्शी गवाह का बयान। 

√ दस्तावेज। 

√ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड। 

√ वैज्ञानिक रिपोर्ट। 

इनके माध्यम से न्यायालय तथ्यों की सत्यता का परीक्षण करता है।


BSA 2023 में तथ्य की व्यापक अवधारणा:- 

BSA 2023 ने तथ्य की परिभाषा को व्यापक रूप में स्वीकार किया है। आधुनिक समय में डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक संचार और ऑनलाइन गतिविधियों का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में तथ्य की अवधारणा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समकालीन बनाने में सहायता करती है।


निष्कर्ष:- 

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 2(1)(f) न्यायिक व्यवस्था की आधारभूत अवधारणाओं में से एक "तथ्य" को परिभाषित करती है। तथ्य किसी भी मुकदमे की नींव होते हैं और न्यायालय इन्हीं के आधार पर सत्य का निर्धारण करता है। भौतिक और मानसिक दोनों प्रकार के तथ्य कानून की दृष्टि में महत्वपूर्ण हैं। इसलिए BSA 2023 की इस परिभाषा को समझना न्यायिक प्रक्रिया की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।


(IEA) की धारा 3, PARA 2 को (BSA) की धारा 2(1)F में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है
(IEA) की धारा 3, PARA 2 को (BSA) की धारा 2(1)F में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है


अस्वीकरण: लेख/प्रारूप में दिए गए वाद संख्या, सन, नाम, एड्रेस, दिनांक, मोबाइल नंबर या किसी भी प्रकार का लेख/प्रारूप काल्पनिक है यह लेख/प्रारूप मात्र जानकारी के लिए है जिसका किसी भी घटना के साथ मेल इस लेख/प्रारूप से कोई संबंध नहीं है सलाह सहित यह लेख/प्रारूप केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है. यह किसी भी तरह से योग्य अधिवक्ता राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने अधिवक्ता से परामर्श करें. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023  इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है





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