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BSA 2023 की धारा 26 क्या है? मृत व्यक्ति के बयान कब साक्ष्य माने जाते हैं?

BSA 2023 की धारा 26 क्या है? मृत व्यक्ति के बयान कब साक्ष्य माने जाते हैं?
 व्यक्ति के बयान कब साक्ष्य माने जाते हैं?


BSA 2023 की धारा 26 हिंदी में: मृत व्यक्ति के बयान और साक्ष्य के नियम

न्यायालय में किसी मामले का फैसला करने के लिए साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मामले से जुड़ा कोई व्यक्ति मर जाता है, लापता हो जाता है या किसी अन्य कारण से न्यायालय में गवाही देने में असमर्थ होता है। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि क्या उस व्यक्ति द्वारा पहले दिया गया बयान न्यायालय में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है?

इसी प्रश्न का उत्तर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 26 में दिया गया है। यह धारा बताती है कि किन विशेष परिस्थितियों में ऐसे व्यक्ति के मौखिक या लिखित कथन को सुसंगत माना जा सकता है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ। 


BSA 2023 की धारा 26 क्या है?

धारा 26 का संबंध ऐसे व्यक्ति के बयान से है जो मर चुका है, जिसका पता नहीं लगाया जा सकता, जो साक्ष्य देने में असमर्थ हो गया है या जिसकी उपस्थिति न्यायालय के अनुसार अनुचित देरी या खर्च के बिना सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

इस धारा के अंतर्गत हर बयान को स्वीकार नहीं किया जाता। बयान का संबंध कानून में बताई गई विशेष परिस्थितियों से होना चाहिए। जब ये शर्तें पूरी होती हैं, तब संबंधित कथन न्यायालय में सुसंगत हो सकता है।


धारा 26 के अंतर्गत बयान कब सुसंगत होते हैं?

1. मृत्यु के कारण से संबंधित बयान:- यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण न्यायालय में विचाराधीन है और उस व्यक्ति ने अपनी मृत्यु के कारण या मृत्यु तक पहुँचाने वाली घटना की परिस्थितियों के बारे में बयान दिया था, तो वह बयान प्रासंगिक हो सकता है।

उदाहरण:- किसी व्यक्ति को गंभीर चोट लगती है। अस्पताल में वह बताता है कि उस पर किसने हमला किया। बाद में उसकी मृत्यु हो जाती है। यदि उसकी मृत्यु का कारण मुकदमे में विचाराधीन है, तो उसका बयान धारा 26 के अंतर्गत सुसंगत हो सकता है।

इसे सामान्यतः- मृत्यु कालिक कथन या Dying Declaration कहा जाता है। इसके लिए यह आवश्यक नहीं है कि बयान देते समय व्यक्ति को अपनी मृत्यु होने की आशंका हो।


2. व्यापार या पेशे के दौरान दिया गया बयान:-  यदि किसी व्यक्ति ने अपने सामान्य व्यापार, व्यवसाय या पेशेवर कार्य के दौरान कोई रिकॉर्ड, लेखा-प्रविष्टि, रसीद या अन्य दस्तावेज तैयार किया था, तो निर्धारित परिस्थितियों में उसका बयान प्रासंगिक हो सकता है।

उदाहरण:- किसी व्यापारी की मृत्यु के बाद उसकी नियमित बही में दर्ज लेन-देन से संबंधित विवाद उत्पन्न होता है। ऐसी प्रविष्टियाँ मामले में प्रासंगिक हो सकती हैं।


3. अपने हित के विरुद्ध दिया गया बयान:- यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा बयान दिया था जो उसके आर्थिक या संपत्ति संबंधी हित के विरुद्ध था, तो कुछ परिस्थितियों में वह बयान सुसंगत हो सकता है। इसी प्रकार, यदि बयान सही होने पर उस व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चल सकता था या उससे हर्जाना माँगा जा सकता था, तो भी यह प्रावधान लागू हो सकता है।

उदाहरण:- किसी व्यक्ति ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि विवादित धनराशि पर उसका अधिकार नहीं है। बाद में उसकी मृत्यु हो जाती है। संबंधित विवाद में यह बयान प्रासंगिक हो सकता है।


4. सार्वजनिक अधिकार या प्रथा से जुड़ा बयान:- किसी व्यक्ति ने सार्वजनिक अधिकार, प्रथा या सामान्य हित के विषय में अपनी जानकारी के आधार पर बयान दिया हो और यह बयान विवाद उत्पन्न होने से पहले दिया गया हो, तो निर्धारित शर्तों के अधीन उसे प्रासंगिक माना जा सकता है।

उदाहरण:- किसी गाँव में लंबे समय से प्रचलित सार्वजनिक रास्ते के उपयोग को लेकर विवाद है। विवाद शुरू होने से पहले दिया गया किसी जानकार व्यक्ति का कथन प्रासंगिक हो सकता है।


5. पारिवारिक संबंधों से जुड़ा बयान:- रक्त संबंध, विवाह या गोद लेने से बने संबंधों के बारे में ऐसे व्यक्ति का बयान प्रासंगिक हो सकता है, जिसे उन संबंधों की विशेष जानकारी थी। इसके लिए कानून में निर्धारित परिस्थितियों का पूरा होना आवश्यक है।

उदाहरण:- किसी परिवार में संपत्ति के बँटवारे को लेकर विवाद है। परिवार के पुराने सदस्य ने अपने जीवनकाल में परिवार के सदस्यों के संबंधों के बारे में जानकारी दी थी। यदि कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो उसका बयान प्रासंगिक हो सकता है।

6. पुराने पारिवारिक दस्तावेजों में दर्ज संबंध:- किसी मृत व्यक्ति के पारिवारिक संबंधों का उल्लेख वसीयत, पारिवारिक दस्तावेज, वंशावली, समाधि-लेख या परिवार में प्रचलित किसी अन्य उपयुक्त माध्यम में मिलता है, तो निर्धारित परिस्थितियों में वह कथन सुसंगत हो सकता है।

उदाहरण:- परिवार के पुराने वंशावली दस्तावेज में किसी व्यक्ति को परिवार का सदस्य बताया गया है। उत्तराधिकार संबंधी विवाद में यह दस्तावेज प्रासंगिक हो सकता है, यदि धारा की शर्तें पूरी हों।


7. अधिकार या प्रथा से जुड़े दस्तावेज में बयान:-
यदि किसी ऐसे दस्तावेज में बयान दर्ज है जो किसी अधिकार या प्रथा के निर्माण, दावे, परिवर्तन, मान्यता या अस्वीकार से संबंधित लेन-देन का हिस्सा है, तो वह निर्धारित परिस्थितियों में प्रासंगिक हो सकता है।

उदाहरण:- किसी पुराने दस्तावेज में भूमि पर रास्ते के अधिकार का उल्लेख है। रास्ते के अधिकार से जुड़े विवाद में उस दस्तावेज का महत्व हो सकता है।


8. कई व्यक्तियों द्वारा व्यक्त भावनाएँ या विचार:- कुछ परिस्थितियों में कई व्यक्तियों द्वारा व्यक्त भावनाएँ या धारणाएँ भी प्रासंगिक हो सकती हैं, यदि उनका संबंध मामले के किसी विवादित तथ्य से हो।

उदाहरण:- किसी सार्वजनिक स्थान या संपत्ति के संबंध में लोगों द्वारा लंबे समय से व्यक्त किए गए विचार, यदि कानूनी शर्तें पूरी करते हों, तो संबंधित विवाद में प्रासंगिक हो सकते हैं।


धारा 26 का महत्व

इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी महत्वपूर्ण तथ्य से जुड़ा बयान केवल इसलिए नजरअंदाज न हो जाए कि उसे देने वाला व्यक्ति अब गवाही देने के लिए उपलब्ध नहीं है। इससे न्यायालय को पुराने दस्तावेजों, मृत्यु से पहले दिए गए बयानों और अन्य संबंधित तथ्यों की जाँच करने में सहायता मिलती है।

हालाँकि, किसी बयान का सुसंगत होना और उसका सत्य साबित होना अलग-अलग बातें हैं। न्यायालय उसकी विश्वसनीयता, परिस्थितियों और दूसरे साक्ष्यों को ध्यान में रखकर उसका मूल्यांकन करता है।


निष्कर्ष

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 26 साक्ष्य कानून का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसमें बताया गया है कि मृत, लापता या गवाही देने में असमर्थ व्यक्ति के बयान किन विशेष परिस्थितियों में न्यायालय के लिए प्रासंगिक हो सकते हैं।

इस धारा में मृत्यु के कारण से जुड़े बयान, व्यापारिक रिकॉर्ड, आर्थिक हित के विरुद्ध कथन, सार्वजनिक अधिकार, पारिवारिक संबंध और पुराने दस्तावेजों सहित कई परिस्थितियाँ शामिल हैं। कानून के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और सामान्य पाठकों के लिए इस धारा को सरल भाषा में समझना उपयोगी है।


Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):- BSA 26:-  वे दशाएं जिनमें उस व्यक्ति द्वारा विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य का किया गया कथन सुसंगत है, जो मर गया है या मिल नहीं सकता, इत्यादि:- 

सुसंगत तथ्यों के लिखित या मौखिक कथन, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए थे, जो मर गया या मिल नहीं सकता है या जो साक्ष्य देने के लिए असमर्थ हो गया है या जिसकी हाजिरी इतने विलम्ब या व्यय के बिना उपाप्त नहीं की जा सकती, जितना मामले की परिस्थितियों में न्यायालय को अयुक्तियुक्त प्रतीत होता है, निम्नलिखित दशाओं में स्वयमेव सुसंगत हैं, अर्थात् :-

(क) जब कि वह कथन किसी व्यक्ति द्वारा अपनी मृत्यु के कारण के बारे में या उस संव्यवहार की किसी परिस्थिति के बारे में किया गया है जिसके फलस्वरूप उसकी मृत्यु हुई, तब उन मामलों में, जिनमें उस व्यक्ति की मृत्यु का कारण प्रश्नगत हो। ऐसे कथन सुसंगत हैं चाहे उस व्यक्ति को, जिसने उन्हें किया है, उस समय जब वे किए गए थे। मृत्यु की प्रत्याशंका थी या नहीं और चाहे उस कार्यवाही की, जिसमें उस व्यक्ति की मृत्यु का कारण प्रश्नगत होता है, प्रकृति कैसी ही क्यों न हो;

(ख) जब कि वह कथन ऐसे व्यक्ति द्वारा कारबार के मामूली अनुक्रम में किया गया था तथा विशेषतः जबकि वह, उसके द्वारा कारबार के मामूली अनुक्रम में या वृत्तिक कर्तव्य के निवर्हन में रखी जाने वाली पुस्तकों में उसके द्वारा की गई किसी प्रविष्टि या किए गए ज्ञापन के रूप में है, या उसके द्वारा धन, माल, प्रतिभूतियों या किसी भी किस्म की सम्पत्ति की प्राप्ति की लिखित या हस्ताक्षरित अभिस्वीकृत है, या वाणिज्य में उपयोग में आने वाली उसके द्वारा लिखित या हस्ताक्षरित किसी दस्तावेज के रूप में है अथवा किसी पत्र या अन्य दस्तावेज की तारीख के रूप में है, जो कि उसके द्वारा प्रायः दिनांकित, लिखित या हस्ताक्षरित की जाती थी;

(ग) जब कि वह कथन उसे करने वाले व्यक्ति के धन सम्बन्धी या साम्पतिक हित के विरुद्ध है या जबकि, यदि वह सत्य हो, तो उसके कारण उस पर दाण्डिक अभियोजन या नुकसानी का वाद लाया जा सकता है या लाया जा सकता था;

(घ) जब कि उस कथन में उपर्युक्त व्यक्ति की राय किसी ऐसे लोक अधिकार या रूढ़ि या लोक या साधारण हित के विषय में अस्तित्व के बारे में है, जिसके अस्तित्व से, यदि वह अस्तित्व में होता तो उससे उस व्यक्ति का अवगत होना सम्भाव्य होता और जब कि ऐसा कथन ऐसे किसी अधिकार, रूढ़ि या बात के बारे में किसी संविवाद के उत्पन्न होने से पहले किया गया था;

(ङ) जब कि वह कथन किन्हीं ऐसे व्यक्तियों के बीच रक्त, विवाह या दत्तकग्रहण पर आधारित किसी नातेदारी के अस्तित्व के सम्बन्ध में है, जिन व्यक्तियों की रक्त, विवाह या दत्तकग्रहण पर आधारित नातेदारी के बारे में उस व्यक्ति के पास, जिसने वह कथन किया है, ज्ञान के विशेष साधन थे और जब कि वह कथन विवादग्रस्त प्रश्न के उठाए जाने से पूर्व किया गया था;

(च) जब कि वह कथन मृत व्यक्तियों के बीच रक्त, विवाह या दत्तकग्रहण पर आधारित किसी नातेदारी के अस्तित्व के सम्बन्ध में है और उस कुटुम्ब की बातों से, जिसका ऐसा मृत व्यक्ति अंग था, सम्बन्धित किसी विल या विलेख में या किसी कुटुम्बवंशावली में या किसी समाधिप्रस्तर, कुटुम्ब चित्र या अन्य चीज पर जिस पर ऐसे कथन प्रायः किये जाते हैं, किया गया है, और जब कि ऐसा कथन विवादग्रस्त प्रश्न के उठाए जाने से पूर्व किया गया था;

(छ) जब कि वह कथन किसी ऐसे विलेख, विल या अन्य दस्तावेज में अन्तर्विष्ट है, जो किसी ऐसे संव्यवहार से सम्बन्धित है जैसा धारा 11 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट है;

(ज) जब कि वह कथन कई व्यक्तियों द्वारा किया गया था और प्रश्नगत बात से सुसंगत उनकी भावनाओं या धारणाओं को अभिव्यक्त करता है।

उदाहरण:- (क) प्रश्न यह है कि क्या रमेश की हत्या सुरेश द्वारा की गयी थी; या रमेश की मृत्यु किसी संव्यवहार में हुई क्षतियों से हुई है, जिसके अनुक्रम में उससे बलात्संग किया गया था प्रश्न यह है कि क्या उससे सुरेश द्वारा बलात्संग किया गया था, या प्रश्न यह है कि क्या रमेश, सुरेश द्वारा ऐसी परिस्थितियों में मारा गया था कि रमेश की विधवा द्वारा सुरेश पर वाद लाया जा सकता है। अपनी मृत्यु के कारण के बारे में रमेश द्वारा किए गए वे कथन, जो उसने क्रमशः विचाराधीन हत्या, बलात्संग और अनुयोज्य दोष को निर्देशित करते हुए किए हैं, सुसंगत तथ्य हैं।

(ख) प्रश्न सुरेश के जन्म की तारीख के बारे में हैं। एक मृत शल्यचिकित्सक की अपने कारबार के मामूली अनुक्रम में नियमित रूप से रखी जाने वाली डायरी में इस कथन की प्रविष्टि कि अमुक दिन उसने सुरेश की माता की परिचर्या की और उसे पुत्र का प्रसव कराया सुसंगत तथ्य है।

(ग) प्रश्न यह है कि क्या दिनेश अमुक दिन नागपुर में था। कारबार के मामूली अनुक्रम में नियमित रूप से रखी गई एक मृत सालिसिटर की डायरी में यह कथन कि अमुक दिन वह सालिसिटर नागपुर में एक वर्णित स्थान पर विनिर्दिष्ट कारबार के बारे में विचार-विमर्श करने के प्रयोजनार्थ दिनेश के पास रहा सुसंगत तथ्य है।

(घ) प्रश्न यह है कि क्या कोई पोत मुम्बई बन्दरगाह से अमुक दिन रवाना हुआ। किसी वाणिज्यिक फर्म के, जिसके द्वारा वह पोत भाड़े पर लिया गया था, मृत भागीदार द्वारा चेन्नई स्थित अपने सम्पर्कियों को, जिन्हें वह स्थोरा परेषित किया गया था, यह कथन करने वाला पत्र कि पोत मुम्बई पत्तन से अमुक दिन चल दिया सुसंगत तथ्य है।

(ङ) प्रश्न यह कि क्या दिनेश को अमुक भूमि का भाटक दिया गया था। दिनेश के मृत अभिकर्ता का दिनेश के नाम पत्र जिसमें यह कथन है कि उसने दिनेश के निमित्त भाटक प्राप्त किया है और वह उसे दिनेश के आदेशाधीन रखे हुए है, सुसंगत तथ्य है।

(च) प्रश्न यह है कि क्या रामू और नीलम का विवाह वैध रूप से हुआ था। एक मृत पादरी का यह कथन कि उसने उनका विवाह ऐसी परिस्थितियों में कराया था, जिनमें उसका कराना अपराध होता, सुसंगत है।

(छ) प्रश्न यह है कि क्या एक व्यक्ति रामू ने जो मिल नहीं सकता अमुक दिन एक पत्र लिखा था। यह तथ्य कि उसके द्वारा लिखित एक पत्र पर उस दिन की तारीख दिनांकित है, सुसंगत है।

(ज) प्रश्न यह है कि किसी पोत के ध्वंस का कारण क्या है। कप्तान द्वारा, जिसकी हाजिरी उपाप्त नहीं की जा सकती, दिया गया प्रसाक्ष्य सुसंगत तथ्य है।

(झ) प्रश्न यह है कि क्या अमुक सड़क लोक मार्ग है। ग्राम के मृत प्रधान रामू द्वारा किया गया कथन कि वह सड़क लोक-मार्ग है, सुसंगत तथ्य है।

(ञ) प्रश्न यह है कि विशिष्ट बाजार में अमुक दिन अनाज की क्या कीमत थी। एक मृत व्यवसायी द्वारा अपने कारबार के मामूली अनुक्रम में किया गया कीमत का कथन सुसंगत तथ्य है।

(ट) प्रश्न यह है कि क्या मोहन, जो मर चुका है दिनेश का पिता था। मोहन द्वारा किया गया यह कथन कि दिनेश उसका पुत्र है सुसंगत तथ्य है।

(ठ) प्रश्न यह है कि दिनेश के जन्म की तारीख क्या है। दिनेश के मृत पिता द्वारा किसी मित्र को लिखा हुआ पत्र, जिसमें यह बताया गया है कि दिनेश का जन्म अमुक दिन हुआ, सुसंगत तथ्य है।

(ड) प्रश्न यह है कि क्या और कब राजू और रोशनी का विवाह हुआ था। रोशनी के मृत पिता जगदीश द्वारा किसी याददाश्त पुस्तिका में अपनी पुत्री का राजू के साथ अमुक तारीख को विवाह होने की प्रविष्टि सुसंगत तथ्य है।

(ढ) दुकान की खिड़की में अभिदर्शित रंगित उपहासांकन में अभिव्यक्त अपमान-लेख के लिए मोहन पर जगदीश वाद लाता है। प्रश्न उपहासांकन की समरूपता तथा उसके अपमान-लेखीय प्रकृति के बारे में है। इन बातों पर दर्शकों की भीड़ की टिप्पणियां साबित की जा सकेंगी।


(IEA) की धारा 32 को (BSA) की धारा 26 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है

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