| BSA 2023 की धारा 29 के तहत लोक तथा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की प्रासंगिकता |
29. कर्तव्य पालन में की गई लोक अभिलेख या इलैक्ट्रानिकी अभिलेख की प्रविष्टियों की सुसंगति:-
Bare Act में लिखी हुई मूल भाषा (Bare Act Text):- किसी लोक या अन्य राजकीय पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलैक्ट्रानिक अभिलेख में की गई प्रविष्टि, जो किसी विवाद्यक या सुसंगत तथ्य का कथन करती है और किसी लोक सेवक द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में या उस देश की, जिसमें ऐसी पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलैक्ट्रानिक अभिलेख रखा जाता है, विधि द्वारा विशेष रूप से व्यादिष्ट कर्तव्य के पालन में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई है, स्वयं सुसंगत तथ्य है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 29 क्या है?
BSA की धारा 29 यह निर्धारित करती है कि यदि किसी लोक सेवक (Public Servant) द्वारा अपने पदीय कर्तव्य (Official Duty) का पालन करते हुए किसी लोक या अन्य शासकीय पुस्तक, रजिस्टर, या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में कोई प्रविष्टि (Entry) की जाती है, तो वह प्रविष्टि अदालत में एक प्रासंगिक तथ्य (Relevant Fact) मानी जाएगी।
सरल शब्दों में, सरकारी या लोक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा में दर्ज बातें खुद-ब-खुद साक्ष्य के रूप में प्रासंगिक हो जाती हैं, बशर्ते वे कानून के तहत किसी लोक सेवक द्वारा अपने कर्तव्य के दौरान लिखी गई हों।
धारा 29 की प्रमुख शर्तें और घटक
BSA की धारा 29 के तहत किसी प्रविष्टि को साक्ष्य में प्रासंगिक मानने के लिए निम्नलिखित तीन मुख्य शर्तों का पूरा होना आवश्यक है:
प्रविष्टि का स्वरूप:- प्रविष्टि किसी लोक या अन्य शासकीय पुस्तक (Public or Official Book), रजिस्टर, या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख (Electronic Record) में होनी चाहिए।
कर्तव्य का पालन:- वह प्रविष्टि किसी लोक सेवक द्वारा अपने शासकीय या पदीय कर्तव्यों के निष्पादन (Performance of Official Duty) के दौरान की गई हो।
विधि द्वारा निर्दिष्ट कर्तव्य:- वह कर्तव्य किसी ऐसे देश के कानून द्वारा विशेष रूप से निर्दिष्ट (Enjoined by Law) किया गया हो जहाँ ऐसा रजिस्टर या अभिलेख रखा जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों (Digital Records) का समावेश
पुराने कानून (भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 35) की तुलना में BSA की धारा 29 में "इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख" (Electronic Record) को स्पष्ट और मजबूती से शामिल किया गया है।
आज के डिजिटल इंडिया के दौर में निम्नलिखित इलेक्ट्रॉनिक प्रविष्टियाँ धारा 29 के तहत प्रासंगिक मानी जाती हैं:-
• डिजिटल भूमि रिकॉर्ड (Digital Land Records)
• ई-पोर्टल पर दर्ज जन्म और मृत्यु का डेटा
• डिजिटल पुलिस डायरी (CCTNS नेटवर्क)
• डिजिटल वाहन पंजीकरण (RC) और ड्राइविंग लाइसेंस डेटाबेस
धारा 29 के तहत प्रासंगिक दस्तावेजों के उदाहरण
राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records):- पटवारी या तहसीलदार द्वारा तैयार की गई खतौनी, जमाबंदी या दाखिल-खारिज का रजिस्टर।
नगर निगम या अस्पताल रिकॉर्ड:- सरकारी अस्पताल या निकाय द्वारा दर्ज जन्म और मृत्यु का प्रमाणिक डेटा।
पुलिस स्टेशन की सामान्य डायरी (General Diary/GD):- कर्तव्य पर मौजूद पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की गई दैनिक घटनाएँ।
सरकारी गजट और मतदाता सूची:- चुनाव आयोग द्वारा जारी वोटर लिस्ट या सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाएँ।
न्याय प्रणाली और मुकदमों में धारा 29 का महत्व
समय और संसाधनों की बचत:- लोक अभिलेखों को साबित करने के लिए हर बार उस लोक सेवक को अदालत में बुलाकर गवाही दिलाना आवश्यक नहीं होता जिसने वह प्रविष्टि लिखी है। दस्तावेज स्वयं अपनी सत्यता का प्राथमिक आधार बनता है।
निष्पक्षता का अनुमान:- यह माना जाता है कि लोक सेवक बिना किसी व्यक्तिगत हित के अपना कर्तव्य निभाते हैं, इसलिए उनके द्वारा दर्ज प्रविष्टियों में निष्पक्षता और सत्यता की संभावना अधिक होती है।
डिजिटल न्याय को बढ़ावा:- इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को स्पष्ट मान्यता मिलने से साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और प्रशासनिक मामलों में तेजी से न्याय मिलना संभव हो पाता है।
निष्कर्ष
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 29 प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह न केवल कागजी सरकारी रजिस्टरों को बल्कि आज के आधुनिक डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को भी कानूनी मान्यता और साक्ष्य में प्रासंगिकता प्रदान करती है। न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और गति लाने के लिए यह धारा एक मजबूत स्तंभ है।
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(IEA) की धारा 35 को (BSA) की धारा 29 में बदल दिया गया है। - अगर आप चाहे तो लोगो पर क्लिक करके देख सकते है |
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी वास्तविक कानूनी मामले, मुकदमे या विवाद की स्थिति में किसी विशेषज्ञ अधिवक्ता (Advocate) से विधिक सलाह अवश्य लें।


